45+ रंगों के नाम हिंदी, इंग्लिश, संस्कृत में | Colours Name in Hindi, English, Sanskrit

Colours Name in Hindi, English, Sanskrit – रंगों के नाम हिंदी, इंग्लिश, संस्कृत में यहाँ पर दिए गये हैं; श्वेत प्रकाश 7 रंगों के प्रकाश से मिलकर बना होता है जो क्रमानुसार बैंगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी तथा लाल हैं। इनको संक्षेप में “बैंनीआहपीनाला” या “VIBGYOR” कहा जाता है। रंगों के नाम हिंदी, इंग्लिश, संस्कृत में (Colours Name in Hindi, English, Sanskrit) निम्न प्रकार हैं:

Colours Name in Hindi, English, Sanskrit (रंगों के नाम हिंदी, इंग्लिश, संस्कृत में)

Colours Name in HindiColours Name in EnglishColours Name in Sanskrit
करौंदिया या भूरा लाल रंगMaroonअसित लोहितः
कालाBlackश्यामः, कालः
गहरा नीलाNavy Blueअसित नीलः
पीलाYellowपीतः, हरिद्राभः
नारंगीOrangeकौसुम्भः, नारङगवर्णः
सफेदWhiteशुक्लः, श्वेतः
हराGreenहरितः, पलाशः
गुलाबीPinkपाटलः, श्वेतरक्तः
नीलाBlueनीलः
भूराBrownश्यावः, कपिशः
बैंगनीPurpleधूम्रवर्ण:
लालRedलोहितः, रक्तवर्णः
ग्रे (धुमैला)Greyधूसरः, धूषरः
अक्वामरीनAquamarineअक्वामरीन:
सुनहराGoldenसुवर्ण:
गहरा लाल रंगRubyसिन्धु वर्ण:
आसमानी रंगAzureआकाशवर्ण:
मिट्टी जैसा रंगClayमृत्तिका वर्णः
कोयले जैसा कालाCharcoalकालिमन् वर्ण:
चांदी जैसा रंगSilverरजतवर्ण:
गहरा पीलाBeige
पीतल रंगBronzeकांस्यवर्ण:
लाल भूरा रंगReddish Brownअरुणः
धूमिल सफ़ेदOff White
धातुमय रंगMetallic
फ़िरोज़ाTurquoise
गहरा लालCrimsonशोणः
भूरा पीला रंगAmber
जंग रंगRust
अंगूर का रंगGrape
खाकी रंगKhakiखाकी वर्ण
बेर रंगPlumआलूकं वर्ण:
टकसाल रंगMint
फ्यूशियाFuchsiaफ्यूशिया
चूने का रंगLimeअम्लसार वर्ण:
जैतून का रंगOliveजितवृक्षवर्ण:
हाथीदांत रंगIvoryहस्तिदन्त: वर्ण:
हलके नीले रंगViolet
हरिनीलCyanइन्दीवर वर्ण:
मटर हरितPea greenहरेणुवर्ण:
गहरा गुलाबी रंगMagentaमैजेंटा वर्ण:
मूंगा रंगCoralप्रवाल वर्ण:
हरे रंग की छायादारTealटीलवर्ण:
सरसों रंगmustard
गेहूँ रंगWheatगोधुमवर्ण:
गरम गुलाबीHot pinkपाटल:
जामुनीIndigo

रंगों का वर्गीकरण

हमारे चारों और कईं रंग हैं। रंगों को व्यवस्थित करने और उनकी पहचान करने के लिए रंगों के वर्गीकरण की युक्ति की गयी है।

  • प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक रंग
  • गर्म और ठंडे रंग
  • निष्प्रभावी रंग (neutral)

प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक रंग

प्राथमिक रंग:

लाल, पीला और नीला प्राथमिक रंग हैं। ये तीनों रंग अन्य रंगों का आधार हैं और इनसे अन्य रंग भी बनाये जा सकते हैं।

द्वितीयक रंग:

दो प्राथमिक रंगों को बराबर मात्रा में मिलाकर बनने वाले रंगों को द्वितीयक रंग कहते हैं। ये रंग नारंगी, हरा और बैंगनी हैं।

तृतीयक रंग:

इन्हें एक प्राथमिक और एक द्वितीयक रंग को बराबर मात्रा में मिलाकर बनाया जाता है।

पीला + नारंगी =पीला नारंगी
लाल + नारंगी =लाल नारंगी
लाल + बैंगनी =लाल बैंगनी
नीला + बैंगनी =नीला बैंगनी
नीला + हरा =नीला हरा
पीला + हरा =पीला हरा

गर्म और ठंडे रंग

गर्म रंग:

गर्म रंग लाल, पीला, नारंगी आदि हैं।इन रंगों में अग्नि या सूर्य का तत्व होता है। ये गर्माहट की अनुभूति देते हैं। इनसे छोटे आकार और लम्बाई का भ्रम होता है। ये रंग उत्साह देने वाले होते हैं और उत्तेजना व प्रसन्नता का आभास कराते हैं।

ठंडे रंग:

ये रंग नीले, हरे, बैंगनी आदि हैं। इनमे वनस्पति या जल तत्व होता है जिनसे ठंडक की अनुभूति होती है। ये शांतिदायक रंग होते हैं जो आराम और शान्ति का अनुभव कराते हैं। ये आकर्षक गर्म रंगों को भी संतुलित करते हैं। गर्म और ठंडे रंग एक दूसरे के पूरक होते हैं।

निष्प्रभावी रंग

सफ़ेद, काले, स्लेटी, भूरे, ताम्बई, हलके पीले रंग निष्प्रभावी उदासीन रंग हैं। ये गहरे रंगों के लिए अत्यंत प्रभावशाली पृष्ठभूमि प्रदान करते हैं। जब भी हम सही रंग योजना के विषय में आश्वस्त नहीं होते तब निष्प्रभावी रंग बहुत ही उपयोगी साबित होते हैं।

रंगों की विशेषताएं

प्रत्येक वास्तु के तीन आयाम अर्थात लम्बाई, चौड़ाई और ऊंचाई की भांति रंगों के भी तीन आयाम होते हैं। और उनकी व्याख्या ह्यू, वैल्यू और इंटेंसिटी के रूप में की जाती है।

ह्यू: ह्यू (का अर्थ) किसी रंग का नाम है। उदाहरण के लिए, लाल, नारंगी, नीला आदि।

वैल्यू: रंग का हल्कापन या गहरापन है। किसी भी रंग में सफ़ेद रंग मिला देने से हल्का रंग प्राप्त होता है। इसे टिंट कहते हैं। किसी रंग में कला रंग मिला देने से गहरा रंग प्राप्त होता है। इसे शेड या टोन कहते हैं। टिंट और टोन विशेष रूप से तब उपयोगी होते हैं जब आप एक प्राकृतिक नमूने की कढ़ाई कर रहे हो।

इंटेंसिटी: इंटेंसिटी का अर्थ किसी रंग के तेज और हल्केपन से है। किसी कशीदे में सभी चमकीले या सभी हल्के रंगों का प्रयोग किया जाय तो वह संतुलित नहीं दिखेगा। अतः उचित अनुपात में चमकीले और हल्के रंगों का उपयोग करना अच्छा रहेगा।

दैनिक जीवन में रंगों का महत्त्व

रंगों का इतिहास मानव के इतिहास जितना ही पुराना है। आदिमानव रंगों में जादुई विशेषताएं देखता था। मानव के कपडे पहनने से काफी पहले भी वह अपने शरीर को प्राकृतिक स्रोतों जैसे बेर से प्राप्त रंगों से सजाता था।

भिन्न-भिन्न रंगों के अर्थ भी भिन्न भिन्न होते हैं। हमारे ऊपर प्रत्येक रंग का मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है। लाल रंग जो अग्नि का प्रतीक है, उसका अर्थ हमारे लिए ताप/गर्मी है। हरा जो ताजा अंकुरित पौंधों का प्रतीक है वह ताजगी देता है और सुनहरा जो सूर्य के प्रकाश का द्योतक है, वह प्रसन्नता का प्रतीक है। संसार के अलग अलग भागों में भी रंगों का अर्थ भिन्न-भिन्न होता है।

उदाहरण के लिए काला रंग पश्चिमी देशों में शोक का प्रतीक है जबकि भारत और चीन में लोग शोक मनाने के लिए सफ़ेद वस्त्र पहनते हैं। भारत में कुछ दुल्हनें लाल वस्त्र पहनती हैं जबकि कुछ अन्य स्थानों/क्षेत्रों में लड़कियाँ सफ़ेद और सुनहरे/लाल कपड़े पहनती हैं।

रंगप्रभाव
गहरा लालप्रेम, स्वास्थ्य, जीवन्तता
चमकीला लालभावावेश, ख़तरा
गहरा स्लेटी, लालबुराई
गुलाबीस्त्रियोचित, उत्सव, नाजुकता, मासूमियत
नारंगीमहत्वाकांक्षा, उत्साह
भूराउपयोगिता, परिपक्वता
पीलाप्रेरणादायक, विवेक, प्रसन्नता
गहरा सुनहराविलासपूर्ण, मूल्यवान
पीला, हराताजगी, यौवन
नीलाशान्ति, संवेदनशील, आदर्शवादिता
बैंगनीभव्यता, राजवंशीय

रंगों से सम्बंधित महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)

  • प्राथमिक रंग कौन कौन से हैं?

    लाल, पीला और नीला

  • द्वितीयक रंग कौन कौन से हैं?

    नारंगी, हरा और बैंगनी

  • पूरक रंग कौन-कौन से हैं?

    हरा-मजेंटा, नीला-पीला, लाल-सियान

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