Categories: Hindi Quotes

Chanakya Niti in Hindi- सम्पूर्ण चाणक्य नीति (17 अध्याय) हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी में

Chanakya Niti

Chanakya Niti in Hindi, Sanskrit, English – चाणक्य को ही कौटिल्य, विष्णु गुप्त और वात्सायन के नाम से जाना जाता है। चाणक्य को अर्थशास्त्र और राजनीति का महान विद्वान माना जाता है। चाणक्य एक ऐसी महान विभूति थे, जिन्होंने अपनी विद्वत्ता, बुद्धिमता और क्षमता के बल पर भारतीय इतिहास की धारा को बदल दिया। विष्णुपुराण, भागवत आदि पुराणों तथा कथासरित्सागर आदि संस्कृत ग्रंथों में तो चाणक्य का नाम आया ही है, बौद्ध ग्रंथो में भी इसकी कथा बराबर मिलती है। आचार्य चाणक्य के महान विचारों को अगर अपने जीवन में उतार लिया जाए तो वाकई हमारा जीवन सफल हो सकता है। आचार्य चाणक्य ने अपनी बुद्धिमत्ता और कुशाग्र विचारों से कूटनीति और राजनीति की बेहद सरल व्याख्या की है । भारतवर्ष में चाणक्य को एक समाज का सेवक और विद्वान माना जाता हैं।

नाम (Name)चाणक्य
जन्म (Birthday)350 ईसा पूर्व (अनुमानित स्पष्ट नहीं है)
मृत्यु की तिथि (Death)275 ईसा पूर्व, पाटलिपुत्र, (आधुनिक पटना में) भारत
शैक्षिक योग्यता (Education)समाजशास्त्र, राजनीति, अर्थशास्त्र, दर्शन, आदि का अध्ययन।
वैवाहिक स्थितिविवाहित
पिता (Father Name)ऋषि कानाक या चैनिन (जैन ग्रंथों के अनुसार)
माता (Mother Name)चनेश्वरी (जैन ग्रंथों के अनुसार)

चाणक्य का आरंभिक जीवन:

चाणक्य का जन्म 350 BCE में ब्राह्मण परिवार में हुआ था. इनके जन्म स्थान को लेकर कई तरह के मतभेद है। कुछ लोग का मानना है उनका जन्म पाटलिपुत्र के पास कुसुमपुर में हुआ था, जिसे आज हम पटना के नाम से जानते है। बुद्ध महावंसा टिका के हिसाब से उनका जन्म तकशिला में हुआ था। जैन धर्म के हिसाब से चाणक्य का जन्म उनके पिता के घर दक्षिण भारत में हुआ था। उनके पिता का नाम चणक था, कहते है इसी पर उनका नाम चाणक्य रखा गया। वैसे चाणक्य ब्राह्मण थे जो विष्णु के भक्त थे, लेकिन जैन धर्म के अनुसार उम्र के आखिरी पड़ाव में चाणक्य ने चन्द्रगुप्त के साथ जैन धर्म को अपना लिया था।

चाणक्य के जन्म के दौरान उनके दान्त थे, जो इस बात का संकेत था कि वे एक राजा या सम्राट बनेंगें. लेकिन ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने की वजह से इसे अनुचित समझा गया और उनके दांत तोड़ दिए गए। लेकिन ये माना गया कि वे किसी को राजा बनायेंगे और उसके द्वारा राज्य करेंगे. बचपन से ही चाणक्य में नेतृत्व करने की क्षमता थी, उम्र के हिसाब से उन्हें कुछ ज्यादा ही ज्ञान था, जो उनके बराबरी वालों को नहीं था।

चाणक्य के पिता चणक शिक्षा की महत्ता को जानते थे, उस समय पूरी दुनिया में तकशिला शिक्षा का बहुत फेमस केंद्र था। छोटी उम्र से ही चाणक्य ने वेदों का ज्ञान पाना शुरू कर दिया था। वेदों का ज्ञान सबसे कठिन माना जाता था, जिसे चाणक्य ने बचपन में ही पूरा पढ़ लिया था और उसे कंठस्थ भी कर लिया था। चाणक्य को राजनीती के ज्ञान में बहुत रूचि थी, बचपन में ही चाणक्य की राजनीती को लेकर चतुराई व कुशाग्रता देखते ही बनती थी। राजनीती का खेल चाणक्य बचपन से ही सिखने लगे थे, जिसमें कुछ ही समय वे महान ज्ञानी हो गए थे। वे जानते थे कि कैसे अपने सहयोगी को विरोधीयों के पास भेजना चाहिए जिससे, उनकी रुपरेखा का पता चले और विरोधियों को आसानी से नष्ट किया जा सके। चाणक्य परिस्तिथि को अनुरूप करना भलीभांति जानते थे। धर्म व राजनीती का ज्ञान अर्जित करने के बाद उन्होंने अर्थशास्त्र की ओर अपना ध्यान लगाया जो उनका जीवनभर का साथी बन गया. इससे प्रेरित होकर उन्होंने नीतिशास्त्र की रचना की।

चाणक्य के बारे मे

ऐसी किंवदन्ती है कि एक बार मगध के राजदरबार में किसी कारण से उनका अपमान किया गया था, तभी उन्होंने नंद – वंश के विनाश का बीड़ा उठाया था. उन्होंने चन्द्रगुप्त मौर्य / Chandragupta Maurya को राजगद्दी पर बैठा कर वास्तव में अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर ली तथा नंद – वंश को मिटाकर मौर्य वंश की स्थापना की. चाणक्य देश की अखण्डता के भी अभिलाषी थे, इसलिये उन्होंने चंद्रगुप्त व्दारा यूनानी आक्रमणकारियों को भारत से बाहर निकलवा दिया और नंद – वंश के अत्याचारों से पीड़ित प्रजा को भी मुक्ति दिलाई.

एक दिन चाणक्य की भेंट बालक चन्द्रगुप्त हुयी , जो उस समय अपने साथियों के साथ राजा और प्रजा का खेल खेल रहा था | राजा के रूप में चन्द्रगुप्त जिस कौशल से अपने संगी साथियो की समस्या को सुलझा रहा था वो चाणक्य को भीतर तक प्रभावित कर गया | चाणक्य को चन्द्रगुप्त में भावी राजा की झलक दिखाई देने लगी | उन्होंने चन्द्रगुप्त के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की और उसे अपने साथ तक्षशिला ले गये | वहा चाणक्य ने चन्द्रगुप्त को वेद शाश्त्रो से लेकर युद्ध और राजनीति तक की शिक्षा दी | लगभग 8 साल तक अपने संरक्ष्ण में चन्द्रगुप्त को शिक्षित करके चाणक्य ने उसे शूरवीर बना दिया |

उन्ही दिनों में विश्वविजय पर निकले यूनानी सम्राट सिकन्दर विभिन्न देशो पर विजय प्राप्त करता हुआ भारत की ओर बढ़ा चला आ रहा था | गांधार का राजा आम्भी सिकन्दर का साथ देकर अपने पुराने शत्रु राजा पुरु को सबक सिखाना चाहता है | चाणक्य को आम्भी की यह योजना पता चली तो वो उसे समझाने के लिए गये | आम्भी से चाणक्य ने इस सन्दर्भ में विस्तारपूर्वक बातचीत की , उसे समझाना चाहा , विदेशी हमलावरों से देश की रक्षा करने के लिए उसे प्रेरित करना चाहा , किन्तु आम्भी ने चाणक्य की एक भी बात नही मानी | वो सिकन्दर का साथ  देने को कटिबद्ध रहा |

संस्कृत-साहित्य में नीतिपरक ग्रन्थों की कोटि में चाणक्य नीति का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसमें सूत्रात्मक शैली में जीवन को सुखमय एवं सफल-सम्पन्न बनाने के लिए उपयोगी अनेक विषयों पर प्रकाश डाला गया है। चाणक्य के अनुसार आदर्श राज्य संस्था वही है जिसकी योजनाएं प्रजा को उसके भूमि, धन-धान्यादि पाते रहने के मूलाधिकार से वंचित कर देनेवाली न हों, उसे लम्बी-चौड़ी योजनाओं के नाम से कर-भार से आक्रांत न कर डालें।

राष्ट्रोद्धारक योजनाएं राजकीय व्ययों में से बचत करके ही चलाई जानी चाहिए। राजा का ग्राह्य भाग देकर बचे प्रजा के टुकड़ों के भरोसे पर लंबी-चौड़ी योजना छेड़ बैठना प्रजा का उत्पीड़न है। चाणक्य का साहित्य समाज में शांति, न्याय, सुशिक्षा, सर्वतोन्मुखी प्रगति सिखानेवाला ज्ञान-भंडार है। राजनीतिक शिक्षा का यह दायित्व है कि वह मानव समाज को राज्य संस्थापन, संचालन, राष्ट्र-संरक्षण-तीनों काम सिखाए।

आचार्य चाणक्य मगध के प्रधानमन्त्री होकर भी वह अपना जीवन बहुत सादगी के साथ व्यतीत करते थे | चीन के प्रसिध ऐतिहासिक यात्री ने कहा था, ”इतने बड़े देश के प्रधानमंत्री ऐसी झोपडी में रहता है” यह सुनकर आचार्य चाणक्य ने उतर दिया, “जहा का प्रधानमंत्री झोपडी में रहता है वहा के निवासी भव्य भवनों ने निवास करते है और जिस देश का प्रधानमंत्री राजमहलो में रहता है, वहा की सामान्य जनता झोपड़ियो में रहती है |”

कहा जाता है की आचार्य चाणक्य कुरूप चेहरे वाले, काले रंग के अति कुर्द स्वभाव वाले ब्राह्मण थे | आचार्य चाणक्य ने राजनीति, कूटनीति, अर्थनीति आदि से लेकर व्यक्तिगत जीवन की व्य्व्हारिकता, मित्र – शत्रुभेद और नारी के विषय में जो कुछ लिखा है वह सदेव सदेव के लिए प्रेरणा और ज्ञान का भंडार बना रहेगा |

आचार्य चाणक्य एक ऐसी महान विभूति थे, जिन्होंने अपनी विद्वत्ता और क्षमताओं के बल पर भारतीय इतिहास की धारा को बदल दिया। मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चाणक्य कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में भी विश्वविख्‍यात हुए। इतनी सदियाँ गुजरने के बाद आज भी यदि चाणक्य के द्वारा बताए गए सिद्धांत ‍और नीतियाँ प्रासंगिक हैं तो मात्र इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने गहन अध्‍ययन, चिंतन और जीवानानुभवों से अर्जित अमूल्य ज्ञान को, पूरी तरह नि:स्वार्थ होकर मानवीय कल्याण के उद्‍देश्य से अभिव्यक्त किया। वर्तमान दौर की सामाजिक संरचना, भूमंडलीकृत अर्थव्यवस्था और शासन-प्रशासन को सुचारू ढंग से बताई गई ‍नीतियाँ और सूत्र अत्यधिक कारगर सिद्ध हो सकते हैं।

चाणक्य सम्राट् चंद्रगुप्त मौर्य (321-298 ई.) के महामंत्री थे। उन्होंने चंद्रगुप्त के प्रशासकीय उपयोग के लिए इस ग्रंथ की रचना की थी। यह मुख्यत: सूत्रशैली में लिखा हुआ है और संस्कृत के सूत्रसाहित्य के काल और परंपरा में रखा जा सकता है। यह शास्त्र अनावश्यक विस्तार से रहित, समझने और ग्रहण करने में सरल एवं कौटिल्य द्वारा उन शब्दों में रचा गया है जिनका अर्थ सुनिश्चित हो चुका है। (अर्थशास्त्र, 15.6)’ अर्थशास्त्र में समसामयिक राजनीति, अर्थनीति, विधि, समाजनीति, तथा धर्मादि पर पर्याप्त प्रकाश पड़ता है। इस विषय के जितने ग्रंथ अभी तक उपलब्ध हैं उनमें से वास्तविक जीवन का चित्रण करने के कारण यह सबसे अधिक मूल्यवान् है।

चाणक्य की मृत्यु – Chanakya Death

चाणक्य ने बहुत सी रचनाएँ लिखी जिसमें चाणक्य नीति व अर्थशास्त्र महत्वपूर्ण है। अर्थशास्त्र में लिखी गई बातें आज भी लोगों को ज्ञान देती है, जो आज के समय में भी जरुरी है। चाणक्य नीति में उनके द्वारा कहे गए वचन है जो आज भी हमें सही रास्ता दिखाती है। चाणक्य 200 से ज्यादा साल तक जीवित रहे व लम्बी आयु के बाद उनकी मौत 275 BCE में हुई, उनकी मौत को लेकर बहुत सी अवधारणा है. कुछ लोग कहते है सामराज्य से रिटायर होने के बाद चाणक्य जंगल चले गए वही उनकी। चाणक्य नीति पर बहुत सी किताबें भी लिखी गई।

Chanakya Niti

“चाणक्य नीति” (Chanakya Niti) आचार्य चाणक्य की नीतियों का अद्भुत संग्रह है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना वह दो हजार चार सौ साल पहले था, जब इसे लिखा गया था। Chanakya Niti द्वारा मित्र-भेद से लेकर दुश्मन तक की पहचान, पति-परायण तथा चरित्र हीन स्त्रियों में विभेद, राजा का कर्तव्य और जनता के अधिकारों तथा वर्ण व्यवस्था का उचित निदान हो जाता है। महापंडित आचार्य चाणक्य की ‘चाणक्य नीति’ (Chanakya Niti) में कुल सत्रह अध्याय (17 Chapters) है, जिन्हे आप नीचे दिए गए links पर पढ़ सकते हैं:

सम्पूर्ण चाणक्य नीति – Chanakya Niti

1. चाणक्य नीति: प्रथम अध्याय | Chanakya Niti in Hindi: First Chapter

2. चाणक्य नीति: द्वितीय अध्याय | Chanakya Niti in Hindi: Second Chapter

3. चाणक्य नीति: तीसरा अध्याय | Chanakya Niti in Hindi: Third Chapter

4. चाणक्य नीति: चौथा अध्याय | Chanakya Niti in Hindi: Fourth Chapter

5. चाणक्य नीति: पांचवा अध्याय | Chanakya Niti in Hindi: Fifth Chapter

6. चाणक्य नीति: छठवां अध्याय | Chanakya Niti in Hindi: Sixth Chapter

7. चाणक्य नीति: सातवां अध्याय | Chanakya Niti in Hindi: Seventh Chapter

8. चाणक्य नीति: आठवाँ अध्याय | Chanakya Niti in Hindi: Eighth Chapter

9. चाणक्य नीति: नवां अध्याय | Chanakya Niti in Hindi: Ninth Chapter

10. चाणक्य नीति: दसवाँ अध्याय | Chanakya Niti in Hindi: Tenth Chapter

11. चाणक्य नीति: ग्यारहवाँ अध्याय | Chanakya Niti in Hindi: Eleventh Chapter

12. चाणक्य नीति: बारहवां अध्याय | Chanakya Niti in Hindi: Twelfth Chapter

13. चाणक्य नीति: तेरहवां अध्याय | Chanakya Niti in Hindi: Thirteenth Chapter

14. चाणक्य नीति: चौदहवाँ अध्याय | Chanakya Niti in Hindi: Fourteenth Chapter

15. चाणक्य नीति: पन्द्रहवां अध्याय | Chanakya Niti in Hindi: Fifteenth Chapter

16. चाणक्य नीति: सोलहवां अध्याय | Chanakya Niti in Hindi: Sixteenth Chapter

17. चाणक्य नीति: सत्रहवां अध्याय | Chanakya Niti in Hindi: Seventeenth Chapter

admin

Recent Posts

Pongal 2021 कब है? पोंगल कैसे बनाते है? (मीठा पोंगल व्यंजन बनाने की विधि)

Pongal Pongal - दक्षिण भारत के तमिलनाडु और केरल राज्य में मकर संक्रांति को 'पोंगल' के रुप में मनाया जाता… Read More

51 years ago

Gudi Padwa 2021 Date, Time – गुड़ी पाड़वा पर्व कैसे मनाते हैं?

Gudi Padwa Gudi Padwa - गुड़ी पाड़वा का पर्व चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। इस दिन… Read More

51 years ago

FilmyMeet 2020 Live Link: Free Download Punjabi, Hindi, Telugu Movies

FilmyMeet 2020 Live Link: Free Download Punjabi, Hindi, Telugu Movies FilmyMeet 2020 Live Link: Free Download Punjabi, Hindi, Telugu Movies… Read More

51 years ago

एकलव्य रहस्य: आखिर क्यों भगवान श्री कृष्ण ने “एकलव्य” का किया था वध?

एकलव्य एकलव्य को कुछ लोग शिकारी का पुत्र कहते हैं और कुछ लोग भील का पुत्र। प्रयाग जो इलहाबाद में… Read More

51 years ago

Karva Chauth 2020 Date, Time, Vrat Katha – करवा चौथ 2020

Karva Chauth Karva Chauth - करवा चौथ का दिन और संकष्टी चतुर्थी, जो कि भगवान गणेश के लिए उपवास करने… Read More

51 years ago

DVDPlay 2020 Live Link: Free Download Malayalam, Hindi Movies

DVDPlay 2020 Live Link: Free Download Malayalam, Hindi Movies DVDPlay 2020 Live Link: Free Download Malayalam, Hindi Movies - DVDPlay… Read More

51 years ago

For any queries mail us at admin@meragk.in