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मध्य प्रदेश की मिट्टियाँ – Soil of Madhya Pradesh

Soil of Madhya Pradesh – मध्य प्रदेश की मिट्टियाँ

Soil in Madhya Pradesh – भारतीय भूमि एवं मृदा सर्वेक्षण विभाग ने मध्य प्रदेश की मिट्टी को 5 भागों में वर्गीकृत किया है:

1. काली मिट्टी (ह्यूमस या रेगर)

  • स्थानीय लोग इसे “भर्री या कन्हर” भी कहते हैं
  • मध्य प्रदेश में सर्वाधिक पायी जाने वाली मिट्टी है
  • दक्कन ट्रेप (मालवा के पठार) में बेसाल्ट नामक आग्नेय चट्टानों से निर्मित यह लावा-मिट्टी है ।
  • चीका और बालू निर्मित लोहे और चूने की प्रधानता है।
  • लोहे की अधिकता से काला रंग, चूने की उपस्थिति से आर्द्रता ग्रहण करने की क्षमता होती है।
  • इसका pH मान 6.3-6.4
  • काली मिटटी प्रदेश के 510 लाख एकड़ क्षेत्रफल (48 प्रतिशत) में पायी जाती है।
  • काली मिटटी कपास कृषि के लिए सर्वोत्तम होती है।
  • काली मिटटी को रेगड मिटटी भी कहते हैं।
  • काली मिटटी में फॉस्फेट, नाइट्रोजन एवं जैव पदार्थ की कमी होती है।

2. लाल-पीली मिट्टी

  • दूसरी सर्वाधिक मात्रा में पायी जाने वाली बुंदेलखंड के कुछ भाग तथा बघेलखण्ड में यह पायी जाती है विशेषकर मंडल, बालाघाट, सीधी, शहडोल जिलों में।
  • लाल-पीली मिट्टी का निर्माण आर्कियन, धारवाड़ तथा प्रमुखतः गोंडवाना काल की चट्टानों के ऋतुक्षरण से हुआ है।
  • लाल-पीली मिट्टी के रंग का निर्धारण फेरिक ऑक्साइड की मात्रा द्वारा निर्धारित होता है।
  • लाल-पीली मिट्टी का pH मान – 5.5 से 8.5 तक
  • यह मिट्टी अम्लीय से क्षारीय होती है
  • चावल की कृषि के लिए अधिक उपयुक्त होती है।
  • ह्यूमस तथा नाइट्रोजन की कमी होती है।

3. जलोढ़ मिट्टी (काप मिट्टी)

  • राज्य के उत्तर-पश्चिमी जिलों भिंड, मुरैना, शिवपुरी, ग्वालियर में यह क्षारीय प्रकृति की है।
  • इसे एल्युवाइल मिट्टी या दोमट मिट्टी भी कहते हैं।
  • जलोढ़ मिट्टी का निर्माण बुंदेलखंड नीस के ऋतुक्षरण तथा चम्बल नदी द्वारा निक्षेपित पदार्थों से हुआ है।
  • जलोढ़ मिट्टी में नाइट्रोजन, जैव तत्व तथा फास्फोरस की कमी होती है।
  • प्रदेश के 30 लाख एकड़ क्षेत्रफल में पाई जाती है।
  • pH मान – 7 से अधिक
  • जलोढ़ मिट्टी में बालू, सिल्ट, मृतिका का अनुपात 50:19.6:29.4
  • जलोढ़ मिट्टी में मुख्य रूप से सरसों एवं गेंहू की फसल पैदा की जाती है।
  • जलोढ़ मिट्टी में उर्वरकता अधिक होती है।

4. लैटराइट मिट्टी

  • इसे भाटा भी कहते हैं।
  • छिंदवाड़ा और बालाघाट जिलों के लगभग 70 प्रतिशत भाग में यह पाई जाती है।

5. बलुई मिट्टी

  • इसे लाल-रेतीली मिट्टी भी कहते हैं।
  • बुंदेलखंड के कुछ भाग में रेत और बालू से मिश्रित मिट्टी पायी जाती है।
  • जो नीस, ग्रेनाइट चट्टानों के टूटने से निर्मित है।

मध्य प्रदेश के प्रमुख जलप्रपात – Waterfalls in Madhya Pradesh

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