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शब्द विचार: परिभाषा, प्रकार और उदाहरण

    शब्द का किसी भी भाषा में विशेष स्थान होता है। व्याकरण अथवा भाषा-विज्ञान का मूल साधन शब्द ही है। यह कहना भी अनुचित नही होगा कि भाषा में हमारे अध्ययन का मूलाधार भी शब्द ही है। शब्द का निर्माण ध्वनियों के मेल से होता है। जिस प्रकार एक या एक से अधिक ध्वनियों से शब्द बनता है ठीक उसी प्रकार एक या एक से अधिक शब्दों से वाक्य का निर्माण होता है। यहाँ पर आप शब्द की परिभाषा और शब्दों के प्रकार के बारे में जानेंगे।

    शब्द किसे कहते हैं?

    वर्णों के सार्थक ध्वनि समूह को शब्द कहते हैं। वर्णों के सार्थक एवं व्यवस्थित समूह जिससे कुछ न कुछ अर्थ निकले, उसे शब्द कहते हैं।

    शब्द और पद में क्या अंतर है?

    वर्ण समूह के अकेले ही प्रयुक्त होने पर वह शब्द कहलाता है परन्तु उसी वर्ण समूह के वाक्य में प्रयोग करने पर एवं समूहों से उस वर्ण समूह द्वारा सम्बन्ध स्थापित कर लेने पर वह पद कहलाता है। जैसे – “पुस्तक” शब्द है और ‘मोहन पुस्तक पढ़ता है’ वाक्य में “पुस्तक” पद है।

    शब्दों का वर्गीकरण

    हिंदी व्याकरण में शब्दों का वर्गीकरण निम्न चार आधारों पर किया जाता है –

    1. स्रोत / उत्पत्ति के आधार पर
    2. बनावट / रचना के आधार पर
    3. अर्थ के आधार पर
    4. रूप परिवर्तन के आधार पर

    स्रोत / उत्पत्ति के आधार पर

    उत्पत्ति या स्रोत के आधार पर शब्द के पांच प्रकार हैं:

    1. तत्सम
    2. तद्भव
    3. देशज
    4. विदेशी
    5. संकर

    1. तत्सम शब्द: तत्सम शब्द “तद्+सम” के योग से बना है। यहाँ “तद्” का अर्थ है “उसके” तथा “सम” का अर्थ है “समान”, अर्थात वे शुद्ध संस्कृत के शब्द जिनका प्रयोग ज्यों का त्यों हिंदी में करते हैं, तत्सम शब्द कहलाते हैं। चूंकि संस्कृत ही हिंदी की मूल भाषा है, इसलिए ऐसे शब्द जो जिस प्रकार संस्कृत में प्रयुक्त होते हैं, ठीक उसी प्रकार हिंदी में भी प्रयुक्त होते हैं, उन शब्दों को तत्सम शब्द कहते हैं।

    जैसे – नासिका, चक्षु, अक्षर, चूर्ण, ग्रीवा, हस्त, हाथी आदि।

    2. तद्भव शब्द: तद्भव शब्द “तद्+भव” के योग से बना है, जहां “तद्” का अर्थ है “उससे” और “भव” का अर्थ है “उत्पन्न होने वाला”। वे संस्कृत के शब्द जिनमे लम्बे समय के बाद परिवर्तन हो गया है और जिनका प्रयोग हम हिंदी में करते हैं, उन्हें तद्भव शब्द कहते हैं।

    जैसे – नाक, चावल, चूरा, हाथ, गर्दन, आँख आदि।

    3. देशज शब्द: देशज शब्द “देश+ज” के योग से बना है, जहां “देश” का अर्थ “क्षेत्र (स्थान विशेष)” और “ज” का अर्थ “जन्म देने वाला” है अर्थात जिन शब्दों का जन्म एक अंचल विशेष में होता है, देशज शब्द कहलाते हैं। अर्थात वे क्षेत्रीय भाषाओँ के शब्द जिनका प्रयोग हम हिंदी में करते हैं, देशज शब्द कहलाते हैं।

    जैसे – लोटा, डंडा, लता, खिड़की, बयार आदि।

    4. विदेशी शब्द: विदेशी शब्द का शाब्दिक अर्थ है – अन्य देश में जन्म लेने वाला। अंग्रेजी, पुर्तगाली, फ़्रांसिसी, अरबी, फ़ारसी, उर्दू आदि विदेशी भाषाओँ के शब्द जिनका प्रयोग हम हिंदी भाषा में करते हैं, विदेशी शब्द कहलाते हैं। ये शब्द हिंदी में इतने घुल-मिल गये हैं कि इन्हें हिंदी से पृथक नही किया जा सकता है।

    जैसे – किताब, आलपीन, रिक्शा, क्रिकेट, अलमारी, बालीबाल, फ़ुटबाल आदि।

    अंग्रेजी भाषा के शब्द जो प्रायः हिंदी में प्रयुक्त होते हैं: अंडरवियर, अलमारी, अस्पताल, इंजिनियर, एक्स-रे, एम.पी, क्लास, क्लर्क, कलेक्टर, कॉपी, कार, कैमरा, केस, कोट, क्रिकेट, गार्ड, चेक, टायर, ट्यूब, टेलीविज़न, टेलर, टीचर, ट्रक, डबल बेड, डॉक्टर, ड्राफ्ट, निब, पोस्टकार्ड, पेन, प्लेटफार्म, पाउडर, पोलिंग, पर्लियामेंट, पंचर, फिल्म, फाइल, बस, बैंक, ब्रुश, रेल, मास्टर, शर्ट, सूट इत्यादि

    अरबी भाषा के शब्द: अक्ल, अजीब, अदालत, आजाद, आदमी, इज्जत, इलाज, इन्तजार, इनाम, इस्तीफ़ा, औलाद, कमाल, कब्ज़ा, क़ानून, कुर्सी, किताब, किस्मत, कबीला, कीमत, गरीब, जनाब, जलसा, जवाब, जुर्माना, जिला, तहसील, ताकत, तारीख, तूफ़ान, तराजू, तमाशा, दुनिया, दफ्तर, दौलत, नतीजा, नशा, नकद, फ़कीर इत्यादि

    फ़ारसी के शब्द: अखबार, अमरुद, आराम, आवारा, आसमान, आतिशबाजी, आमदनी, कमर, कारीगर, कमीना, कुश्ती, खराब, खर्च, खजाना, खून, खुश्क, गवाह, गुब्बारा, गुलाब, जानवर, जेब, जगह, जमीन, जलेबी, तनख्वाह, तबाह, दर्जी इत्यादि

    पुर्तगाली भाषा से: अचार, अगस्त, आलपिन, आलू, आया, अन्नानास, इस्पात, कनस्तर, कमीज, कमरा, गमला, गोभी, गोदाम, चाबी, फीता, बस्ता, बटन, बाल्टी, पपीता, प्याला, मेज साबुन इत्यादि

    तुर्की से: आका, उर्दू, काबू, कैंची, कालीन, खंजर, तमाशा, तोप, बारूद, बेगम, बहादुर इत्यादि

    फ्रांसीसी शब्द: अंग्रेज, काजू, कारतूस, कूपन, सूप इत्यादि

    चीनी से: चाय, लीची, लोकात, तूफ़ान

    डच से: तुरुप, बम, चिड़िया, ड्रिल

    जर्मनी से: नात्सी, नाजीवाद, किंडर गार्टन

    जापानी से: रिक्सा, सायोनारा

    तिब्बती से: लामा, डांडी

    रूसी से: जार, सोवियत, रूबल, स्पूतनिक, बुजुर्ग

    यूनानी से: एकेडेमी, एटम, एटलस, टेलीफोन, बाइबिल

    5. संकर शब्द: संकर का शाब्दिक अर्थ है “मिश्रण” अर्थात जहां दो भाषाओं के शब्द मिश्रित रहते हैं, संकर शब्द कहलाते हैं।

    जैसे – * रेलगाड़ी (यहाँ रेल शब्द अंग्रेजी और गाड़ी शब्द हिंदी का है)
    * टिकटघर (यहाँ टिकट शब्द अंग्रेजी का और घर शब्द हिंदी का है)
    * उड़नतस्तरी (यहाँ उड़न शब्द अरबी का और तस्तरी शब्द हिंदी का है)

    बनावट / रचना के आधार पर

    बनावट / रचना के आधार पर शब्द के तीन प्रकार हैं:

    1. रूढ़ शब्द
    2. यौगिक
    3. यौगरूढ़

    1. रूढ़ शब्द: रूढ़ का शाब्दिक अर्थ रूढ़ी या परम्परा होता है। वे शब्द जो परम्परा से एक निश्चित अर्थ ग्रहण करते आ रहे हैं, रूढ़ शब्द कहलाते हैं।

    जैसे – घर, देव, कपड़ा, पुस्तक, गंगा, उदर, कान, आँख आदि।

    2. यौगिक शब्द: वे शब्द जो एकाधिक रूढ़ शब्दों के योग से या किसी रूढ़ शब्द में उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर बनाए जाते हैं, यौगिक शब्द कहलाते हैं।

    जैसे – विद्यालय, देवालय, पुस्तकालय, रसोईघर, प्रहार, प्रबल, सौन्दर्य, मधुरता, सुन्दरता आदि।

    3. यौगरूढ़ शब्द: वे शब्द जहां एकाधिक रूढ़ शब्द या किसी रूढ़ शब्द में उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर बनते हैं लेकिन ये शब्द एक विशेष अर्थ का बोध करवाते हैं; अर्थात बहुब्रीहि समास के उदाहरणों की भांति एक विशिष्ट अर्थ का बोध करवाते हैं।

    जैसे – नीलकंठ, लम्बोदर, गजानंद, चंद्रचूड़, पीताम्बर, श्वेताम्बर आदि।

    अर्थ के आधार पर

    अर्थ के आधार पर शब्द के पांच प्रकार हैं:

    1. एकार्थी शब्द
    2. अनेकार्थी शब्द
    3. विलोम शब्द
    4. पर्यायवाची शब्द
    5. युग्म शब्द / सम-श्रुति भिन्नार्थक

    1. एकार्थी शब्द: वे शब्द जो एक ही अर्थ का बोध करवाते हैं, एकार्थी शब्द कहलाते हैं।

    जैसे – देव, जल, वस्त्र आदि।

    2. अनेकार्थी शब्द: वे शब्द जिनके अनेक अर्थ निकलते हो, अनेकार्थी शब्द कहलाते हैं।

    जैसे – अर्क (रस तथा सूर्य), कर (किरण, हाथ तथा हाथी की सूंड)

    3. विलोम शब्द: वे शब्द जो विपरीत अर्थ का बोध करवाते हैं, विलोम शब्द कहलाते हैं।

    4. पर्यायवाची शब्द: वे शब्द जो समान अर्थ का बोध करवाते हैं, पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

    5. युग्म शब्द / सम-श्रुति भिन्नार्थक: वे शब्द जो उच्चारण की दृष्टि से समान लगते हैं, लेकिन अर्थ अलग-अलग होता है, उन्हें युग्म शब्द कहते हैं।

    जैसे –

    तरणी – नाव
    तरणि – सूर्य

    अंस – कन्धा
    अंश – हिस्सा

    रूप परिवर्तन के आधार पर

    रूप परिवर्तन के आधार पर शब्द के दो प्रकार हैं:

    1. विकारी शब्द
    2. अविकारी शब्द / अव्यय शब्द

    1. विकारी शब्द: वे शब्द जिनमे कर्ता, लिंग, वचन, कारक व काल के अनुसार परिवर्तन होता है विकारी शब्द कहलाते हैं। विकारी शब्द 4 प्रकार के होते हैं:

    • संज्ञा
    • सर्वनाम
    • विशेषण
    • क्रिया

    2. अविकारी / अव्यय शब्द: वे शब्द जिनमे कर्ता, लिंग, वचन, कारक व काल के अनुसार परिवर्तन नही होते हैं, अविकारी शब्द कहलाते हैं। अविकारी शब्द 4 प्रकार के होते हैं:

    • क्रिया-विशेषण
    • समुच्चय बोधक
    • सम्बन्ध बोधक
    • विस्मयादि बोधक

    यह भी देखें 👉👉 समास की परिभाषा, प्रकार और उदाहरण

    यह भी देखें 👉👉 संधि की परिभाषा, भेद, उदाहरण

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