काशी विश्वनाथ धाम/कॉरिडोर, इतिहास, पौराणिक कथा | Kashi Vishwanath Dham/Corridor History in Hindi

काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद का विवाद अयोध्या की तरह ही काफी पुराना है। हिन्दू पक्ष के दावे के अनुसार सम्पूर्ण जमीन मंदिर की है। हिन्दू पक्ष का यह भी दावा है कि मस्जिद के नीचे 100 फ़ीट ऊंचा आदि विशेश्वर का स्वयम्भू ज्योतिर्लिंग स्थापित है। बीएचयू के प्राचीन भारतीय इतिहास एवं संस्कृति विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ ए एस ऑल्टेकर ने अपनी किताब ‘हिस्ट्री ऑफ बनारस’ में इस बात का जिक्र किया है। इस किताब में उन्होंने प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेन सांग द्वारा किए गए विश्वनाथ मंदिर के लिंग का जिक्र किया है। किताब में बताया गया है कि विश्वनाथ का शिवलिंग 100 फीट ऊंचा था और उसके ऊपर लगातार गंगा की धारा गिरती थी।

काशी विश्वनाथ धाम/कॉरिडोर क्या है?

काशी विश्वनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है जो हिंदू धर्म के लिए बहुत ही खास है। ऐसी मान्यता है कि काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिका हुआ है। काशी पुरातन समय से ही आध्यात्म का केंद्र रहा है। शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि 12 ज्योतिर्लिंगों में भगवान भोलेनाथ स्वयं विद्यमान रहते हैं। जिनके दर्शन मात्र से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिल जाती है और मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है।

काशी विश्वनाथ धाम/कॉरिडोर का लोकार्पण कब और किसने किया?

पीएम मोदी ने 8 मार्च 2019 को विश्वनाथ मंदिर कॉरीडोर का शिलान्यास किया था। काशी विश्वनाथ धाम/कॉरिडोर का लोकार्पण 13 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया। पौराणिक मान्यता के अनुसार माँ गंगा बाबा विश्वनाथ के चरणों को छूते हुए बहती थी। कहा जाता है गंगा वरुणा और अस्सी घाट के मिलन होने से भगवान शिव की इस पावन नगरी काशी का निर्माण हुआ। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार काशी में करीब 30 करोड़ देवी देवताओं का वास है।

काशी विश्वनाथ मंदिर कहाँ पर स्थित है?

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से 7वां ज्योतिर्लिंग है जो वाराणसी में गंगा नदी के पश्चिम घाट पर स्थित है। मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती के सबसे प्रिय स्थानों में से एक काशी है।

काशी विश्वनाथ धाम का क्षेत्रफल कितना है? (Area of Kashi Vishwanath Dham/Corridor)

काशी विश्वनाथ धाम का क्षेत्रफल लगभग 5 लाख वर्ग फीट है जो कि पहले लगभग 3000 वर्ग फ़ीट था। इसके लिए ज्ञानवापी मस्जिद पक्ष द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद की 1700 वर्ग फीट जमीन भी दे दी गई है। पिछले कुछ सालों में 400 करोड़ रुपए की लागत से मंदिर के आसपास की 300 से ज्यादा बिल्डिंग को खरीदा गया। इसके बाद कंस्ट्रक्शन का काम शुरु हुआ और फिर 400 करोड़ की ही लागत से भव्य कॉरिडोर का निर्माण हुआ।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के अंदर क्या क्या है? (Inside Kashi Vishwanath Dham/Corridor)

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में 23 इमारतें है और कुल 27 मंदिर हैं। 3 हिस्सो में बंटे कॉरिडोर में 4 बड़े गेट हैं। परिक्रमा वाले रूट पर संगमरमर के 22 शिलालेख लगाए गए हैं जिस पर काशी की महिमा का वर्णन है। कॉरिडोर बनाते वक्त इसमें इसमें चुनार के गुलाबी पत्थर, मकराना के सफेद मार्बल और वियतनाम के खास पत्थरों का इस्‍तेमाल किया गया है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में मंदिर चौक, मुमुक्षु भवन, तीन यात्री सुविधा केंद्र, चार शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मल्टीपरपस हॉल, सिटी म्यूजियम, वाराणसी गैलरी जैसी सुविधाएं दी गई हैं।

काशी विश्वनाथ परिसर में ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण किसने किया? (Gyanvapi Mosque)

इतिहासकारों के अनुसार, ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण 1669 में औरंगजेब ने करवाया था। औरंगजेब ने मंदिर को ध्वस्त कर इसके अवशेषों से मस्जिद का निर्माण किया था। इसी मस्जिद को आज ज्ञानवापी मस्जिद के नाम से जाना जाता है।

काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास (Kashi Vishwanath Dham History in Hindi)

इतिहासकारों के मुताबिक इस मंदिर का निर्माण 11वीं सदी में राजा विक्रमादित्य ने करवाया था। वहीं 1194 ईस्वी में इस भव्य मंदिर को मुहम्मद गौरी ने तुड़वा दिया था। इल्तुतमिश के शासन काल में इसे दोबारा बनाया गया था, लेकिन एक बार फिर 1447 ईस्वी में जौनपुर के सुल्तान महमूद गौरी द्वारा तोड़ दिया गया। इसके बाद मुगल शासक अकबर के शासनकाल में इसे फिर से राजा मान सिंह द्वारा बनाए जाने का उल्लेख मिलता है। 1585 में अकबर के शासनकाल में ही राजा टोडरमल द्वारा पंडित नारायण भट्ट की सहायता से मंदिर का पुनरोद्धार कराया गया। कुछ दशकों बाद 1664 में औरंगजेब ने मंदिर को ध्वस्त करने का आदेश दिया। इसके बाद मंदिर का निर्माण इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने 1780 में करवाया।

काशी विश्वनाथ मंदिर की पौराणिक कथा (Mythology of Kashi Vishwanath Temple)

स्कंद पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा और विष्णु जी में बहस हो गयी कि श्रेष्ठ कौन है? इसके बाद सभी देवता, ब्रह्मा और विष्णु जी कैलाश पर्वत पहुंचे और भगवान भोलेनाथ से पूछा कि ब्रह्मांड में सबसे श्रेष्ठ कौन हैं? देवताओं का ये सवाल सुनते ही तत्क्षण भगवान शिव जी के शरीर से ज्योति कुञ्ज निकली, जो नभ और पाताल की दिशा की ओर बढ़ी।

इसके बाद भगवान शिव ने ब्रह्मा और विष्णु जी से कहा कि आप दोनों में जो इस ज्योति की अंतिम छोर पर सबसे पहले पहुंचेगा, वही श्रेष्ठ है। भगवान शिव की बात सुनते ही ब्रह्मा जी अपने हंस पर सवार होकर इसके अंत का पता लगाने के लिए चल पड़े। वहीं दूसरी ओर श्रीहरि भगवान विष्णु गरुण पर सवार होकर ज्योति के अंत तक पहुँचने के लिए निकल पड़े।

कुछ समय दोनों वापस आ गए। तब शिव जी ने पूछा कि क्या आप दोनों में से किसी को अंतिम छोर प्राप्त हुआ? विष्णु जी भगवान शिव के इस रूप के सामने नतमस्तक हो गए और बोले कि यह ज्योति अनंत है, इसका कोई अंत नहीं। जबकि ब्रह्मा जी ने अपनी हार को स्वीकार नहीं क‍िया और झूठ बोले कि मैं अंतिम छोर तक पहुँच गया था।

यह सुन भोलेनाथ क्रोधित हो जाते हैं और ब्रह्मा जी को श्राप देते हैं कि उनकी कभी पूजा नहीं होगी। कहा जाता है कि पृथ्वी के भीतर जहां भी भगवान शिव का दिव्य प्रकाश निकला था, वो 12 ज्योर्तिलिंग कहलाया। काशी विश्वनाथ मंदिर भी इन्हीं ज्योर्तिलिंगो में से एक है।

काशी विश्वनाथ धाम से सम्बंधित महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)

  • काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण कब हुआ?

    13 दिसंबर 2021

  • काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण किसने किया?

    श्री नरेंद्र मोदी

  • काशी विश्वनाथ मंदिर कहाँ पर स्थित है?

    वाराणसी में गंगा नदी के पश्चिम घाट पर

  • काशी विश्वनाथ धाम का क्षेत्रफल कितना है?

    लगभग 5 लाख वर्ग फीट

  • ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण किसने किया?

    औरंगजेब ने

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