India Independence Day (2020) (हिंदी में) – अन्य कौन से देश 15 अगस्‍त मनाते हैं?

India Independence Day

India Independence Day – भारत का स्‍वतंत्रता दिवस हर वर्ष 15 अगस्‍त को देश भर में बहुत ही हर्ष और उल्‍लास के साथ मनाया जाता है। 200 वर्ष से अधिक समय तक ब्रिटिश उपनिवेशवाद के चंगुल से छूट कर इस दिन एक नए युग की शुरूआत हुई थी। 15 अगस्त सन 1947 में भारत को ब्रिटिश हुकूमत से पूर्णता आजादी मिली। यह दिन (India Independence Day) किसी त्यौहार से कम नहीं होता है और प्यार प्रेम से यह दिन मनाया जाता है। यह स्‍वतंत्रता संघर्ष काफी लम्‍बे समय तक चला था, जिसमें अनेक स्‍वतंत्रता सेनानियों ने अपने जीवन कुर्बान कर दिए।

ब्रिटिश साम्राज्य से देश की स्वतंत्रता को सम्मान देने के लिये पूरे भारत में राष्ट्रीय और राजपत्रित अवकाश के रुप में इस दिन को घोषित किया गया है। इस दिनसभी राष्ट्रीय, राज्य तथा स्थानीय सरकार के कार्यालय, बैंक, पोस्ट ऑफिस, बाजार, दुकानें, व्यापार, संस्थान आदि बंद रहते है। इसे बहुत उत्साह के साथ भारत की राजधानी दिल्ली में मनाया जाता है, जबकि स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक समुदाय तथा समाज सहित दूसरे शिक्षण संस्थानों में भी उत्साह के साथ मनाया जाता है और रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किये जाते हैं जिसमे बच्चे, बड़े सभी भाग लेते हैं।

India Independence Day 2020 (भारतीय स्वतंत्रता दिवस 2020)

15 अगस्त 2020 को भारत अपना 74वां स्वतंत्रता दिवस (India Independence Day) मनाएगा। कोरोना महामारी के कारण इस बार प्रदेशभर में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों में पिछले सालों जैसा नजारा देखने को नहीं मिलेगा। चूंकि इस समय पूरी दुनिया कोरोना से लड़ रही है, इसलिए भारत सरकार द्वारा इस साल स्वतंत्रता दिवस 2020 की थीम ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान पर रखी गई है। भारत में प्रथम स्वतंत्रता दिवस (India Independence Day) 15 अगस्त 1947 को मनाया गया था।

Independence Day Slogan

  • अब भी जिसका खून नही खौला वो खून नही पानी है,जो देश के काम न आये वो बेकार जवानी है।
  • आजादी के दिन हम सबका येही है नारा,तिरंगा सदा ऊँची बुलंदियों पर रहे हमारा।
  • न कभी झुके है न कभी झुकना चाहेगे,सच्चे भारतीय बनकर पूरे विश्व में भारत का मान बढ़ाएंगे।
  • हिंदुस्तान है हमको जान से प्यारा,पूरे विश्व में सबसे प्यारा देश हमारा।
  • करते है सलाम तिंरगे को जो हमारी शान है, सदा इसे ऊचा रखना है जबतक शरीर में जान है।
  • बड़ी क़ुरबानी से के बाद गुलामी से मुक्ति पाये, फिर न हो ऐसा कभी अपने देश की ऐसा ताकत बनाये।

पांच अन्य देश जो 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया

  • दोनों देश 15 अगस्त को अपनी आजादी का जश्न मनाते हैं।
  • इसे ‘नेशनल लिबरेशन डे ऑफ कोरिया’ कहा जाता है।
  • 1945 में इसी दिन अमेरिका और सोवियत की सेनाओं ने कोरियाई प्रायद्वीप से जापान के पांव उखाड़ फेंके थे।
  • इस दिन को ग्वांगबोकजियोल भी कहा जाता है।

बहरीन

  • ब्रिटिश हुकूमत से इस देश को 15 अगस्त, 1971 में आजादी मिली थी।
  • बहरीन की जनता के बीच संयुक्त राष्ट्र के सर्वे के बाद अंग्रेजों ने इस देश को छोड़ा था।
  • दोनों देशों ने ‘मित्र संधि’ पर हस्ताक्षर किया था।

लिचेंस्टीन

  • यह दुनिया का छठा सबसे छोटा मुल्क है।
  • 1866 में इसे जर्मनी के शासन से मुक्ति मिली थी।
  • यह देश 15 अगस्त को अपना आजादी द‍िवस मनाता है।
  • इस दिन आम लोगों को रॉयल फैमिली से बातचीत करने का मौका मिलता है।

कांगो

  • 1960 से 15 अगस्त को कांगो में ‘कांगोलीज नेशनल डे’ के तौर पर मनाया जाता है।
  • इसी दिन 80 साल की गुलामी के बाद कांगो वासियों को फ्रांस से पूरी तरह आजादी मिली थी।

India Independence Day History (भारत के स्वतंत्रता दिवस का इतिहास)

17वीँ शताब्दी के दौरान में कुछ यूरोपीय व्यापारियों द्वारा भारतीय उपमहाद्वीप की सीमा चौकी में प्रवेश किया गया। तब भारत में मुगल साम्राज्य का शासन था।उन्होने भारत को बड़े करीब से जाना और धीरे-धीरे उन्होने व्यापार के बहाने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाई। फिर अपने विशाल सैन्य शक्ति की वजह से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत को अपना गुलाम बना लिया और18वीं शताब्दी के दौरान, पूरे भारत में अंग्रेजों ने अपना स्थानीय साम्राज्य और असरदार ताकत स्थापित कर लिया था।

1857 में ब्राटीश शासन के खिलाफ भारतीयों द्वारा एक बहुत बड़े क्रांति की शुरुआत हो चुकी थी और वे काफी निर्णायक सिद्ध हुई। 1857 का विद्रोह, भारतीय बगावत, 1857 का पठान और सिपाहीयों का विद्रोह और कई ऐसे विद्रोह हुए, जो स्वतंत्रता के अभियान में मील का पत्थर साबित हुए और धीरे-धीरे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को इस बात का एहसास होने लगा कि उनका भविष्य खतरे में था।

1857 की बगावत एक असरदार विद्रोह था जिसके बाद पूरे भारत से कई सारे संगठन उभर कर सामने आए। उनमें से एक था भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी जिसका गठन वर्ष 1885 में हुआ। पूरे राष्ट्र में असंतोष और उदासी के काल ने अहिंसात्मक आंदोलनों (असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन) को बढ़ावा दिया जिसका नेतृत्व गांधी जी ने किया।

लाहौर में 1929 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में, भारत ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की। पूर्ण स्वराज की मांग को पूरा करने के लिये, राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा भारतीय नागरिकों से निवेदन किया गया कि वे सविनय अवज्ञा आंदोलन व आने वाले समय में किसी भी आंदोलन के आदेशों का पालन ठीक से करें।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1947 में ब्रिटिश सरकार आश्वस्त हो चुकी थी कि वो लंबे समय तक भारत में अपनी शक्ति नहीं दिखा सकती। भारतीय स्वतंत्रता सेनानी लगातार लड़ रहे थे और तब अंग्रेजों ने भारत को मुक्त करने का फैसला किया हालांकि भारत की आजादी (15 अगस्त 1947) के बाद हिन्दू-मुस्लिम दंगे हुए जिसने भारत और पाकिस्तान को अलग कर दिया। मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान के प्रथम गवर्नर जनरल बने जबकि पंडित जवाहर लाल नेहरु आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री। देश की राजधानी दिल्ली, में एक आधिकारिक समारोह रखा गया जहां सभी बड़े नेता और स्वतंत्रता सेनानियों (अबुल कलाम आजद, बी.आर.अंबेडकर, मास्टर तारा सिंह, आदि) ने इसमें भाग लेकर आजादी का पर्व मनाया।

बंटवारे की हिंसा के दौरान बड़ी संख्या में दोनों तरफ लोग मरे जबकि दूसरे क्षेत्र के लोगों ने स्वतंत्रता दिवस (India Independence Day) मनाया था। संवैधानिक हॉल, नई दिल्ली में राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद के नेतृत्व में 14 अगस्त को 11 बजे रात को संवैधानिक सभा की 5वीं बैठक रखी गई थी जहां जवाहर लाल नेहरु ने अपना भाषण दिया था।

15 अगस्त 1947 की मध्यरात्री, जवाहर लाल नेहरु ने भारत को स्वतंत्र देश घोषित किया जहां उन्होंने “ट्रीस्ट ओवर डेस्टिनी” भाषण दिया था। उन्होंने अपने भाषण के दौरान कहा कि “बहुत साल पहले हमने भाग्यवधु से प्रतिज्ञा की थी और अब समय आ गया है, जब हम अपने वादे को पूरा करें, ना ही पूर्णतया या पूरी मात्रा में बल्कि बहुत मजबूती से। मध्यरात्री घंटे के स्पर्श पर जब दुनिया सोती है, भारत जीवन और आजादी के लिये जागेगा। एक पल आयेगा, जो आयेगा, लेकिन इतिहास में कभी कभार, जब हम पुराने से नए की ओर बढ़ते है, जब उम्र खत्म हो जाती है और राष्ट्र की आत्मा जो लंबे समय से दबायी गयी थी उसको अभिव्यक्ति मिल गयी है। आज हमने अपने दुर्भाग्य को समाप्त कर दिया और भारत ने खुद को फिर से खोजा है”।

इसके बाद, असेंबली सदस्यों ने पूरी निष्ठा से देश को अपनी सेवाएं देने के की कसमें खायी। भारतीय महिलाओं के समूह द्वारा असेंबली को आधिकारिक रुप से राष्ट्रीय ध्वज प्रस्तुत किया था। अत: भारत आधिकारिक रुप से स्वतंत्र देश हो गयाऔर नेहरु तथा वायसराय लार्ड माउंटबेटन, क्रमश: प्रधानमंत्री और गवर्नर जनरल बने। महात्मा गांधी इस उत्सव में शामिल नहीं थे,वे कलकत्ता में रुके थे और हिन्दु तथा मुस्लिम के बीच शांति को बढ़ावा देने केलिये 24 घंटे का व्रत रखा था।

स्वतंत्रता दिवस (India Independence Day) से जुड़ी 6 रोचक बातें

  • 15 अगस्त 1947, जिस दिन हमारे भारत देश को आजादी मिली तब इस दिन के जश्न में महात्मा गांधी शामिल नहीं हो सके थे, क्योंकि तब वे दिल्ली से हजारों किलोमीटर दूर बंगाल के नोआखली में थे, जहां वे हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच हो रही सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए अनशन कर रहे थे।
  • 14 अगस्त की मध्यरात्रि को जवाहर लाल नेहरू ने अपना ऐतिहासिक भाषण ‘ट्रिस्ट विद डेस्टनी’ दिया था। इस भाषण को पूरी दुनिया ने सुना था लेकिन महात्मा गांधी ने इसे नहीं सुना क्योंकि उस दिन वे जल्दी सोने चले गए थे।
  • हर साल स्वतंत्रता दिवस (India Independence Day) पर भारत के प्रधानमंत्री लाल किले से झंडा फहराते हैं, लेकिन 15 अगस्त, 1947 को ऐसा नहीं हुआ था। लोकसभा सचिवालय के एक शोध पत्र के मुताबिक नेहरू ने 16 अगस्त, 1947 को लाल किले से झंडा फहराया था।
  • 15 अगस्त तक भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा का निर्धारण नहीं हुआ था। इसका फैसला 17 अगस्त को रेडक्लिफ लाइन की घोषणा से हुआ जोकि भारत और पाकिस्तान की सीमाअओं को निर्धारित करती थी।
  • भारत 15 अगस्त को आजाद जरूर हो गया लेकिन उस समय उसका अपना कोई राष्ट्र गान नहीं था। हालांकि रवींद्रनाथ टैगोर ‘जन-गण-मन’ 1911 में ही लिख चुके थे, लेकिन यह राष्ट्रगान 1950 में ही बन पाया।
  • 15 अगस्त की तारीख हो ही दक्षिण कोरिया, बहरीन और कांगो देश का भी स्वतंत्रता दिवस (India Independence Day) होता है। हांलाकि ये देश अलग-अलग वर्ष क्रमश: 1945, 1971 और 1960 को आजाद हुए थे।

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राष्ट्रपति का भाषण – 73वें स्वतंत्रता दिवस (India Independence Day) की पूर्व संध्या पर माननीय राष्ट्रपति महोदय का राष्ट्र के नाम संदेश

मेरे प्यारे देशवासियो,

नमस्कार

तिहत्तरवें स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर आप सभी को मेरी हार्दिक बधाई!यह स्वाधीनता दिवस भारत-माता की सभी संतानों के लिए बेहद खुशी का दिन है, चाहे वे देश में हों या विदेश में। आज के दिन हम सभी को देशप्रेम की भावना का और भी गहरा अनुभव होता है। इस अवसर पर, हम अपने उन असंख्‍य स्वतन्त्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को कृतज्ञता के साथ याद करते हैं, जिन्होंने हमें आज़ादी दिलाने के लिए संघर्ष, त्‍याग और बलिदान के महान आदर्श प्रस्‍तुत किए।

स्वाधीन देश के रूप में 72 वर्षों की हमारी यह यात्रा, आज एक खास मुकाम पर आ पहुंची है। कुछ ही सप्ताह बाद, 2 अक्टूबर को, हम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाएंगे। गांधीजी, हमारे स्वतंत्रता संग्राम के महानायक थे। वे समाज को हर प्रकार के अन्याय से मुक्त कराने के प्रयासों में हमारे मार्गदर्शक भी थे।

गांधीजी का मार्गदर्शन आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने हमारी आज की गंभीर चुनौतियों का अनुमान पहले ही कर लिया था। गांधीजी मानते थे कि हमें प्रकृति के संसाधनों का उपयोग विवेक के साथ करना चाहिए ताकि विकास और प्रकृति का संतुलन हमेशा बना रहे। उन्होंने पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता पर ज़ोर दिया और प्रकृति के साथ सामंजस्‍य बिठाकर जीवन जीने की शिक्षा भी दी। वर्तमान में चल रहे हमारे अनेक प्रयास गांधीजी के विचारों को ही यथार्थ रूप देते हैं। अनेक कल्याणकारी कार्यक्रमों के माध्यम से हमारे देशवासियों का जीवन बेहतर बनाया जा रहा है। सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने पर विशेष ज़ोर देना भी गांधीजी की सोच के अनुरूप है।

2019 का यह साल, गुरु नानक देवजी का 550वां जयंती वर्ष भी है। वे भारत के सबसे महान संतों में से एक हैं। मानवता पर उनका प्रभाव बहुत ही व्यापक है। सिख पंथ के संस्थापक के रूप में लोगों के हृदय में उनके लिए जो आदर का भाव है, वह केवल हमारे सिख भाई-बहनों तक ही सीमित नहीं है। भारत और पूरी दुनिया में रहने वाले करोड़ों श्रद्धालु उन पर गहरी आस्था रखते हैं। गुरु नानक देवजी के सभी अनुयायियों को मैं इस पावन जयंती वर्ष के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

प्यारे देशवासियो,

जिस महान पीढ़ी के लोगों ने हमें आज़ादी दिलाई, उनके लिए स्वाधीनता, केवल राजनीतिक सत्ता को हासिल करने तक सीमित नहीं थी। उनका उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति के जीवन और समाज की व्यवस्था को बेहतर बनाना भी था।

इस संदर्भ में, मुझे विश्वास है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए हाल ही में किए गए बदलावों से वहां के निवासी बहुत अधिक लाभान्वित होंगे। वे भी अब उन सभी अधिकारों और सुविधाओं का लाभ उठा पाएंगे जो देश के दूसरे क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को मिलती हैं। वे भी अब समानता को बढ़ावा देने वाले प्रगतिशील क़ानूनों और प्रावधानों का उपयोग कर सकेंगे।’शिक्षा का अधिकार’ कानून लागू होने से सभी बच्चों के लिए शिक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।’सूचना का अधिकार’ मिल जाने से, अब वहां के लोग जनहित से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे; पारंपरिक रूप से वंचित रहे वर्गों के लोगों को शिक्षा व नौकरी में आरक्षण तथा अन्य सुविधाएं मिल सकेंगी। और ‘तीन तलाक’ जैसे अभिशाप के समाप्त हो जाने से वहां की हमारी बेटियों को भी न्याय मिलेगा तथा उन्हें भयमुक्त जीवन जीने का अवसर मिलेगा।

इसी वर्ष गर्मियों में, आप सभी देशवासियों ने 17वें आम चुनाव में भाग लेकर विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सम्पन्न किया है। इस उपलब्‍धि के लिए, सभी मतदाता बधाई के पात्र हैं। वे बड़ी संख्या में, बहुत उत्साह के साथ, मतदान केन्द्रों तक पहुंचे। उन्होंने न केवल अपने मताधिकार का प्रयोग किया बल्‍कि निर्वाचन से जुड़ी अपनी ज़िम्मेदारी भी निभाई।

हर आम चुनाव में, हमारी विकास यात्रा के एक नए अध्याय का शुभारंभ होता है। इन चुनावों के माध्यम से, हमारे देशवासी, अपनी आशा और विश्वास को नई अभिव्यक्ति देते हैं। इस राष्ट्रीय अभिव्यक्ति की शुरुआत आज़ादी के उस जज़्बे के साथ हुई थी जिसका अनुभव 15 अगस्त, 1947 के दिन सभी देशवासियों ने किया था। अब यह हम सभी की जिम्‍मेदारी है कि अपने गौरवशाली देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए उसी जोश के साथ, कंधे से कंधा मिलाकर काम करें।

मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है कि संसद के हाल ही में संपन्न हुए सत्र में लोकसभा और राज्यसभा, दोनों ही सदनों की बैठकें बहुत सफल रही हैं। राजनीतिक दलों के बीच परस्‍पर सहयोग के जरिए, कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए हैं। इस सफल शुरुआत से मुझे यह विश्वास हो रहा है कि आने वाले पांच वर्षों के दौरान संसद, इसी तरह से उपलब्धियां हासिल करती रहेगी। मैं चाहूंगा कि राज्यों की विधानसभाएं भी संसद की इस प्रभावी कार्य संस्कृति को अपनाएं।

लोकतन्त्र को मजबूत बनाने के लिए,संसद और विधानसभाओं में, आदर्श कार्य-संस्कृति का उदाहरण प्रस्तुत करना आवश्यक है। केवल इसलिए नहीं कि निर्वाचित सदस्य अपने मतदाताओं के विश्वास पर खरे उतरें। बल्‍कि इसलिए भी कि राष्ट्र-निर्माण के अभियान में हर संस्था और हितधारक को एक-जुट होकर काम करने की आवश्यकता होती है। एक-जुट होकर आगे बढ़ने की इसी भावना के बल पर हमें स्वाधीनता प्राप्त हुई थी। मतदाताओं और जन-प्रतिनिधियों के बीच, नागरिकों और सरकारों के बीच, तथा सिविल सोसायटी और प्रशासन के बीच आदर्श साझेदारी से ही राष्ट्र-निर्माण का हमारा अभियान और मजबूत होगा।

इस साझेदारी में सरकार की भूमिका लोगों की सहायता करने और उन्हें समर्थ बनाने की है। इसके लिए, हमारी संस्थाओं और नीति निर्माताओं को चाहिए कि नागरिकों से जो संकेत उन्‍हें मिलते हैं, उन पर पूरा ध्यान दें और देशवासियों के विचारों तथा इच्छाओं का सम्मान करें। भारत के राष्ट्रपति के रूप में मुझे देश के विभिन्न क्षेत्रों की यात्रा पर जाने का अवसर प्राप्‍त होता है। इन यात्राओं के दौरान, विभिन्न कार्य-क्षेत्रों से जुड़े देशवासियों से भी मिलता हूं। मैंने महसूस किया है कि भारत के लोगों की रुचियां और आदतें भले ही अलग-अलग हों, लेकिन उनके सपने एक जैसे हैं। 1947 से पहले, सभी भारतीयों का लक्ष्य था कि देश को आज़ादी प्राप्‍त हो। आज हमारा लक्ष्य है कि विकास की गति तेज हो, शासन व्यवस्था कुशल और पारदर्शी हो ताकि लोगों का जीवन बेहतर हो।

लोगों के जनादेश में उनकी आकांक्षाएं साफ दिखाई देती हैं। इन आकांक्षाओं को पूरा करने में सरकार अपनी भूमिका निभाती है। परंतु,मेरा मानना है कि 130 करोड़ भारतवासी अपने कौशल, प्रतिभा, उद्यम तथा इनोवेशन के जरिए, बहुत बड़े पैमाने पर, विकास के और अधिक अवसर पैदा कर सकते हैं। हम भारतवासियों में ये क्षमताएं सदियों से मौजूद रही हैं। अपनी इन्‍हीं क्षमताओं के बल पर हमारा देश, हजारों वर्षों से आगे बढ़ता रहा है और हमारी सभ्यता फलती-फूलती रही है। भारत के लंबे इतिहास में, हमारे देशवासियों को कई बार, चुनौतियों और कठिनाइयों से गुजरना पड़ा है। ऐसे कठिन समय में भी, हमारा समाज विपरीत परिस्‍थितियों का सामना करते हुए आगे बढ़ता रहा। अब परिस्थितियां बदल गई हैं। सरकार, लोगों की आशाओं-आकांक्षाओं को पूरा करने में उनकी सहायता के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाएं और सामर्थ्य उन्हें उपलब्ध करा रही है। ऐसे अनुकूल वातावरण में, हमारे देशवासी जो उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं, वे हमारी कल्पना से भी परे हैं।

देशवासियों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए, सरकार अनेक बुनियादी सुविधाएं प्रदान कर रही है। गरीब से गरीब लोगों के लिए घर बनाकर, और हर घर में बिजली, शौचालय तथा पानी की सुविधा देकर,सरकार बुनियादी ढांचे को मजबूत बना रही है। हर देशवासी के घर में नल के जरिए पीने का पानी पहुंचाने, किसान भाई-बहनों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने और देश में कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे की समस्या का प्रभावी समाधान करने के लिए जल-शक्ति के सदुपयोग पर विशेष बल दिया जा रहा है। जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में केंद्र तथा राज्य सरकारों के साथ-साथ हम सभी देशवासियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

देश के सभी हिस्सों में संचार सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। इसके लिए गाँव-गाँव को सड़कों से जोड़ा जा रहा है और बेहतर राजमार्ग बनाए जा रहे हैं। रेलयात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया जा रहा है। मेट्रो-रेल की सेवा के जरिए अनेक शहरों में लोगों का आवागमन आसान किया जा रहा है। छोटे शहरों को भी हवाई यात्रा की सुविधा से जोड़ा जा रहा है। नए बंदरगाह बनाए जा रहे हैं। साथ ही अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, हवाई-अड्डों, रेलवे स्टेशनों, बस-अड्डों और बन्दरगाहों को आधुनिक बनाया जा रहा है।

सामान्य व्यक्ति के हित में, बैंकिंग सुविधा को अधिक पारदर्शी और समावेशी बनाया गया है। उद्यमियों के लिए कर-व्यवस्था और पूंजी की उपलब्‍धता आसान बनाई गई है। डिजिटल इंडिया के माध्यम से सरकार, लोगों तक नागरिक सुविधाएं तथा उपयोगी जानकारी पहुंचा रही है।

सरकार, बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य-सेवाएं प्रदान कर रही है। दिव्यांग-जनों को मुख्य-धारा से जोड़ने के लिए उन्हें विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं। महिला सशक्तीकरण के लिए सरकार ने, कानून और न्याय-व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए हैं। देशवासियों का जीवन आसान बनाने के लिए अनुपयोगी कानूनों को भी निरस्त किया गया है।

सरकार के इन प्रयासों का पूरा लाभ उठाने के लिए हम सभी नागरिकों को जागरूक और सक्रिय रहना होगा। समाज के हित में और हम सभी की अपनी बेहतरी के लिए यह जरूरी है कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई बुनियादी सुविधाओं का हम सदुपयोग करें।

उदाहरण के तौर पर देखें तो, ग्रामीण सड़कों और बेहतर कनेक्‍टिविटी का पूरा लाभ तभी मिलेगा जब हमारे किसान भाई-बहन उनका उपयोग करके मंडियों तक पहुँचें और अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकें। वित्त और राजस्व के क्षेत्र में किए गए सुधारों और व्यापार के नियमों को सरल बनाने का पूरा लाभ तभी मिलेगा जब हमारे छोटे स्टार्ट-अप या काम-धंधे और बड़े उद्योग, नए तरीके से आगे बढ़ें और रोजगार पैदा करें। हर घर में शौचालय और पानी उपलब्ध कराने का पूरा लाभ तभी मिलेगा जब इन सुविधाओं से, हमारी बहन-बेटियों का सशक्तीकरण हो और उनकी गरिमा बढ़े। वे घर की दुनिया से बाहर निकलकर अपनी आकांक्षाओं को पूरा करें; उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार, जीवन जीने की आज़ादी हो; वे घर संभालने में अथवा कामकाजी महिलाओं के रूप में अपने भाग्‍य का निर्माण स्वयं करें।

समाज और राष्ट्र के विकास के लिए बनाए गए इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर का सदुपयोग करना और उसकी रक्षा करना, हम सभी का कर्तव्य है। यह इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर हर भारतवासी का है, हम सब का है क्योंकि यह राष्ट्रीय संपत्ति है। राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा भी, स्वाधीनता की रक्षा से जुड़ी हुई है। हमारे जो कर्तव्यनिष्ठ नागरिक राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा करते हैं वे देशप्रेम की उसी भावना और संकल्प का परिचय देते हैं, जिसका प्रदर्शन हमारे सशस्त्र बल, अर्धसैनिक बल और पुलिस बल के बहादुर जवान और सिपाही देश की कानून-व्यवस्था बनाए रखने व सीमाओं की रक्षा में करते हैं। मान लीजिए कि कोई गैर-जिम्मेदार व्यक्ति किसी ट्रेन या अन्य सार्वजनिक संपत्ति पर पत्‍थर फेंकता है या उसे नुकसान पहुंचाने वाला है; और यदि आप उसे ऐसा करने से रोकते हैं तो आप देश की मूल्यवान संपत्ति की रक्षा करते हैं। ऐसा करके आप कानून का पालन तो करते ही हैं, साथ ही, अपनी अंतरात्मा की आवाज के अनुसार एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपना कर्तव्य भी निभाते हैं।

मेरे प्‍यारे देशवासियो,

जब हम अपने देश की समावेशी संस्कृति की बात करते हैं तब हम सबको यह भी देखना है कि हमारा आपसी व्यवहार कैसा हो। सभी व्यक्तियों के साथ हमें वैसा ही सम्मान-जनक व्यवहार करना चाहिए जैसा हम उनसे अपने लिए चाहते हैं। भारत का समाज तो हमेशा से सहज और सरल रहा है, तथा ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत पर चलता रहा है। हम भाषा, पंथ और क्षेत्र की सीमाओं से ऊपर उठकर एक दूसरे का सम्मान करते रहे हैं। हजारों वर्षों के इतिहास में, भारतीय समाज ने शायद ही कभी दुर्भावना या पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर काम किया हो। मेल-जोल के साथ रहना, भाई-चारा निभाना, निरंतर सुधार करते रहना और समन्वय पर ज़ोर देना, हमारे इतिहास और विरासत का बुनियादी हिस्सा रहा है। हमारी नियति तथा भविष्य को सँवारने में भी इनकी प्रमुख भूमिका रहेगी। हमने दूसरों के अच्छे विचारों को खुशी-खुशी अपनाया है, और सदैव उदारता का परिचय दिया है।

दूसरे देशों के साथ हमारे सम्बन्धों में भी हम सहयोग की इसी भावना का परिचय देते हैं। हमारे पास जो भी विशेष अनुभव और योग्यताएं हैं उन्हें सहयोगी देशों के साथ साझा करने में हमें खुशी होती है। हम चाहे देश में हों या विदेश में, भारत के इन सांस्कृतिक मूल्यों को हमें सदैव अपने मानस-पटल पर बनाए रखना है।

भारत युवाओं का देश है। हमारे समाज का स्‍वरूप तय करने में युवाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है। हमारे युवाओं की ऊर्जा खेल से लेकर विज्ञान तक और ज्ञान की खोज से लेकर सॉफ्ट स्किल तक कई क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा बिखेर रही है। यह बहुत ही प्रसन्नता की बात है कि युवा-ऊर्जा की धारा को सही दिशा देने के लिए, देश के विद्यालयों में जिज्ञासा की संस्‍कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह, हमारे बेटे-बेटियों और आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारा अमूल्य उपहार होगा। उन की आशाओं और आकांक्षाओं पर विशेष ध्यान देना है, क्‍योंकि उनके सपनों में हम भविष्य के भारत की झलक देख पाते हैं।

मेरे प्यारे देशवासियो,

मुझे विश्वास है कि समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए भारत, अपनी संवेदनशीलता बनाए रखेगा; भारत, अपने आदर्शों पर अटल रहेगा; भारत, अपने जीवन मूल्यों को सँजोकर रखेगा और साहस की परंपरा को आगे बढ़ाएगा। हम भारत के लोग, अपने ज्ञान और विज्ञान के बल पर चाँद और मंगल तक पहुँचने की योग्यता रखते हैं। साथ ही, हमारी संस्कृति की यह विशेषता है कि हम सब प्रकृति के लिए और सभी जीवों के लिए प्रेम और करुणा का भाव रखते हैं। उदाहरण के लिए, पूरी दुनिया के जंगली बाघों की तीन-चौथाई आबादी को हमने सुरक्षित बसेरा दिया है।

हमारे स्वतन्त्रता आंदोलन को स्वर देने वाले महान कवि सुब्रह्मण्य भारती ने सौ वर्ष से भी पहले भावी भारत की जो कल्पना की थी वह आज के हमारे प्रयासों में साकार होती दिखाई देती है। उन्होंने कहा था:

मंदरम् कर्पोम्, विनय तंदरम् कर्पोम्,
वानय अलप्पोम्, कडल मीनय अलप्पोम्।
चंदिरअ मण्डलत्तु, इयल कण्डु तेलिवोम्,
संदि, तेरुपेरुक्कुम् सात्तिरम् कर्पोम्॥

अर्थात

हम शास्त्र और कार्य कुशलता दोनों सीखेंगे,
हम आकाश और महासागर की सीमाएं नापेंगे।
हम चंद्रमा की प्रकृति को गहराई से जानेंगे,
हम सर्वत्र स्वच्छता रखने की कला सीखेंगे॥

मेरे प्यारे देशवासियो,

मेरी कामना है कि हमारी समावेशी संस्कृति, हमारे आदर्श, हमारी करुणा, हमारी जिज्ञासा और हमारा भाई-चारा सदैव बना रहे। और हम सभी, इन जीवन-मूल्‍यों की छाया में आगे बढ़ते रहें।

इन्‍हीं शब्‍दों के साथ, मैं आप सभी को स्‍वाधीनता दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद
जय हिन्द!

प्रधानमंत्री का अभिभाषण – 73वें स्वतंत्रता दिवस (India Independence Day) के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री का देश को संबोधन

मेरे प्‍यारे देशवासियो,

स्‍वतंत्रता के इस पवित्र दिवस पर, सभी देशवासियों को अनेक-अनेक शुभकामनाएं।

आज रक्षा-बंधन का भी पर्व है। सदियों से चली आई यह परंपरा भाई-बहन के प्‍यार को अभिव्‍यक्‍त करती है। मैं सभी देशवासियों को, सभी भाइयों-बहनों को इस रक्षा-बंधन के पावन पर्व पर अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। स्‍नेह से भरा यह पर्व हमारे सभी भाइयों-बहनों के जीवन में आशा-आकांक्षाओं को पूर्ण करने वाला हो, सपनों को साकार करने वाला होऔर स्‍नेह की सरिता को बढ़ाने वाला हो।

आज जब देश आजादी का पर्व मना रहा है, उसी समय देश के अनेक भागों में अति वर्षा के कारण, बाढ़ के कारण लोग कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। कइयों ने अपने स्‍वजन खोए हैं। मैं उनके प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करता हूं और राज्‍य सरकार, केंद्र सरकार, एनडीआरएफ सभी संगठन, नागरिकों का कष्‍ट कम कैसे हो, सामान्‍य परिस्थिति जल्‍दी कैसे लौटे, उसके लिए दिन-रात प्रयास कर रहे हैं।

आज जब हम आजादी के इस पवित्र दिवस को मना रहे हैं, तब देश की आजादी के लिए जिन्‍होंने अपना जीवन दे दिया, जिन्‍होंने अपनी जवानी दे दी, जिन्‍होंने जवानी जेलों में काट दी, जिन्‍होंने फांसी के फंदे को चूम लिया, जिन्‍होंने सत्‍याग्रह के माध्‍यम से आजादी के बिगुल में अहिंसा के स्‍वर भर दिए। पूज्य बापू के नेतृत्‍व में देश ने आजादी पाई।मैं आज देश के आजादी के उन सभी बलिदानियों को, त्‍यागी-तपस्वियों को आदरपूर्वक नमन करता हूं।

उसी प्रकार से देश आजाद होने के बाद इतने वर्षों में देश की शांति के लिए, सुरक्षा के लिए, समृद्धि के लिए लक्षावधी लोगों ने अपना योगदान दिया है। मैं आज आजाद भारत के विकास के लिए, शांति के लिए, समृद्धि के लिए जनसामान्‍य की आशाओं-आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए जिन-जिन लोगों ने योगदान किया है, आज मैं उनको भी नमन करता हूं।

नई सरकार बनने के बाद लालकिले से मुझे आज फिर से एक बार आप सबका गौरव करने का अवसर मिला है। अभी इस नई सरकार को दस हफ्ते भी नहीं हुए हैं, लेकिन दस हफ्ते के छोटे से कार्यकाल में भी सभी क्षेत्रों में, सभी दिशाओं मेंहर प्रकार के प्रयासों को बल दिया गया है, नये आयाम दिए गए हैं और सामान्‍य जनता ने जिन आशा, अपेक्षा, आकांक्षाओं के साथ हमें सेवा करने का मौका दिया है, उसको पूर्ण करने में एक पल का भी विलंब किये बिना,हम पूरे सामर्थ्य के साथ, पूरे समर्पण भाव के साथ, आपकी सेवा में मग्‍न हैं।

दस हफ्ते के भीतर-भीतर ही अनुच्‍छेद 370 का हटना, 35A का हटना सरदार वल्‍लभ भाई पटेल के सपनों को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम है।दस हफ्ते के भीतर-भीतर हमारे मुस्लिम माताओं और बहनों को उनका अधिकार दिलाने के लिए तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाना, आतंक से जुड़े कानूनों में आमूल-चूल परिवर्तन करके उसको एक नई ताकत देने का, आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के संकल्‍प को और मजबूत करने का काम, हमारे किसान भाइयों-बहनों को प्रधानमंत्री सम्‍मान निधि के तहत 90 हजार करोड़ रुपया किसानों के खाते में transferकरने का एक महत्‍वपूर्ण काम आगे बढ़ा है।

हमारे किसान भाई-बहन, हमारे छोटे व्‍यापारी भाई-बहन, उनकोकभी कल्‍पना नहीं थी कि कभी उनके जीवन में भी पेंशन की व्‍यवस्‍था हो सकती है। साठ साल की आयु के बाद वे भी सम्‍मान के साथ जी सकते हैं। शरीर जब ज्‍यादा काम करने के लिए मदद न करता हो, उस समय कोई सहारा मिल जाए, वैसी पेंशन योजना को भी लागू करने का काम कर दिया है।

जल संकट की चर्चा बहुत होती है, भविष्‍य जल संकट से गुजरेगा, यह भी चर्चा होती है, उन चीजों को पहले से ही सोच करके, केंद्र और राज्‍य मिलकर के योजनाएं बनाएं इसके लिए एक अलग जल-शक्ति मंत्रालय का भी निर्माण किया गया है।

हमारे देश में बहुत बड़ी तादाद में डॉक्‍टरों की जरूरत है, आरोग्‍य की सुविधाएं और व्‍यवस्‍थाओं की आवश्यकता है। उसको पूर्ण करने के लिए नए कानूनों की जरूरत है, नई व्‍यवस्‍थाओं की जरूरत है, नई सोच की जरूरत है, देश के नौजवानों को डॉक्‍टर बनने के लिए अवसर देने की जरूरत है। उन चीजों को ध्‍यान में रखते हुए Medical Education को पारदर्शी बनाने के लिए अनेक महत्‍वपूर्ण कानून हमने बनाए हैं, महत्‍वपूर्ण निर्णय लिए हैं।

आज पूरे विश्‍व में बच्‍चों के साथ अत्‍याचार की घटनाएं सुनते हैं। भारत भी हमारे छोटे-छोटे बालकों को असहाय नहीं छोड़ सकता है। उन बालकों की सुरक्षा के लिए कठोर कानून प्रबंधन आवश्‍यक था। हमने इस काम को भी पूर्ण कर लिया है।

भाइयो-बहनो, 2014 से 2019, पांच साल मुझे सेवा करने का आपने मौका दिया। अनेक चीजें ऐसी थीं… सामान्‍य मानव अपनी निजी आवश्‍यकताओं के लिए जूझता था। हमनें पांच साल लगातार प्रयास किया कि हमारे नागरिकों की जो रोजमर्रा की जिदंगी की आवश्‍यकताएं हैं, खासतौर पर गांव की, गरीब की, किसान की, दलित की, पीड़ित की, शोषित की, वंचित की, आदिवासी की,उन पर बल देने का हमने प्रयास किया है और गाड़ी को हम ट्रैक पर लाए और उस दिशा में आज बहुत तेजी से काम चल रहा है। लेकिन वक्‍त बदलता है। अगर 2014 से 2019 आवश्‍यकताओं की पूर्ति का दौर था, तो 2019 के बाद का कालखंड देशवासियों की आकांक्षाओं की पूर्ति का कालखंड है, उनके सपनों को साकार करने का कालखंड है और इसलिए 21वीं सदी का भारतकैसा हो, कितनी तेज गति से चलता हो, कितनी व्‍यापकता से काम करता हो, कितनी ऊंचाई से सोचता हो,इन सभी बातों को ध्‍यान में रखते हुए, आने वाले पांच साल के कार्यकाल को आगे बढ़ाने का एक खाका हम तैयार करके एक के बाद एक कदम उठा रहे हैं।

2014 में, मैं देश के लिए नया था। 2013-14 में चुनाव के पूर्व, भारत-भ्रमण करके मैं देशवासियों की भावनाओं को समझने का प्रयास कर रहा था।लेकिन हर किसी के चेहरे पर एक निराशा थी, एक आशंका थी।लोग सोचते थे क्‍या यह देश बदल सकता है? क्‍या सरकारें बदलने से देश बदल जाएगा? एक निराशा जन-सामान्‍य के मन में घर कर गई थी। लम्‍बे कालखंड के अनुभव का यह परिणाम था- आशाएं लम्‍बी टिकती नहीं थीं, पल-दो पल में आशा, निराशा के गर्त में डूब जाती थी। लेकिन जब 2019 में, पांच साल के कठोर परिश्रम के बाद जन-सामान्‍य के लिए एकमात्र समर्पण भाव के साथ, दिल-दिमाग में सिर्फ और सिर्फ मेरा देश, दिल-दिमाग में सिर्फ और सिर्फ मेरे देश के करोड़ों देशवासी इस भावना को लेकर चलते रहे, पल-पल उसी के लिए खपाते रहेऔर जब 2019 में गए, मैं हैरान था। देशवासियों का मिजाज बदल चुका था। निराशा, आशा में बदल चुकी थी, सपने, संकल्‍पों से जुड़ चुके थे, सिद्धि सामने नजर आ रही थी और सामान्‍य मानव का एक ही स्‍वर था- हां, मेरा देश बदल सकता है। सामान्‍य मानव की एक ही गूंज थी- हां, हम भी देश बदल सकते हैं, हम पीछे नहीं रह सकते।

130 करोड़ नागरिकों के चेहरे के ये भाव, भावनाओं की यह गूंज हमें नई ताकत, नया विश्‍वास देती है।

सबका साथ-सबका विकास का मंत्र ले करके चले थे, लेकिन पांच साल के भीतर-भीतर ही देशवासियों ने सबके विश्‍वास के रंग से पूरे माहौल को रंग दिया। ये सबका विश्‍वास ही पांच सालों में पैदा हुआ जो हमें आने वाले दिनों में और अधिक सामर्थ्‍य के साथ देशवासियों की सेवा करने के लिए प्रेरित करता रहेगा।

इस चुनाव में मैंने देखा थाऔर मैंने उस समय भी कहा था- न कोई राजनेता चुनाव लड़ रहा था, न कोई राजनीतिक दल चुनाव लड़ रहा था, न मोदी चुनाव लड़ रहा था, न मोदी के साथी चुनाव लड़ रहे थे, देश का आम आदमी, जनता-जनार्दन चुनाव लड़ रही थी, 130 करोड़ देशवासी चुनाव लड़ रहे थे, अपने सपनों के लिए लड़ रहे थे। लोकतंत्र का सही स्‍वरूप इस चुनाव में नजर आ रहा था।

मेरे प्‍यारे देशवासियो, समस्‍याओं का समाधान- इसके साथ-साथ सपनों, संकल्‍प और सिद्धि का कालखंड- हमें अब साथ-साथ चलना है। यह साफ बात है कि समस्याओं का जब समाधान होता है, तो स्वावलंबन का भाव पैदा होता है। समाधान से स्वावलंबन की ओर गतिबढ़ती है। जब स्वावलंबन होता है, तो अपने-आप स्‍वाभिमान उजागर होता है और स्‍वाभिमान का सामर्थ्‍य बहुत होता है। आत्‍म-सम्‍मान का सामर्थ्‍य किसी से भी ज्‍यादा होता है और जब समाधान हो, संकल्‍प हो, सामर्थ्‍य हो, स्‍वाभिमान हो,तब सफलता के आड़े कुछ नहीं आ सकता है और आज देश उस स्‍वाभिमान के साथ सफलता की नई ऊंचाइयों को पार करने के लिये, आगे बढ़ने के लिये कृत-निश्चय है। जब हम समस्याओं का समाधान देखते हैं, तो टुकड़ों में नहीं सोचना चाहिए। तकलीफें आयेंगी, एक साथ वाह-वाही के लिये हाथ लगाकर छोड़ देना, यह तरीका देश के सपनों को साकार करने के काम नहीं आयेगा। हमें समस्याओं को जड़ों से मिटाने की कोशिश करनी होगी। आपने देखा होगा हमारी मुस्लिम बेटियां, हमारी बहनें, उनके सिर पर तीन तलाक की तलवार लटकती थी, वे डरी हुई जिंदगी जीती थीं। तीन तलाक की शिकार शायद नहीं हुई हों, लेकिन कभी भी तीन तलाक की शिकार हो सकती हैं, यह भय उनको जीने नहीं देता था, उनको मजबूर कर देता था। दुनिया के कई देश, इस्लामिक देश, उन्होंने भी इस कुप्रथा को हमसे बहुत पहले खत्म कर दिया, लेकिन किसी न किसी कारण से हमारी इन मुस्लिम माताओं-बहनों को हक देने में हम हिचकिचाते थे। अगर इस देश में, हम सती प्रथा को खत्म कर सकते हैं, हम भ्रूण हत्या को खत्म करने के कानून बना सकते हैं, अगर हम बाल-विवाह के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं, हम दहेज में लेन-देन की प्रथा के खिलाफ कठोर कदम उठा सकते हैं, तो क्यों न हम तीन तलाक के खिलाफ भी आवाज उठाएं और इसलिए भारत के लोकतंत्र की spirit को पकड़ते हुये, भारत के संविधान की भावना का, बाबा साहेब अंबेडकर की भावना का आदर करते हुये, हमारी मुस्लिम बहनों को समान अधिकार मिले, उनके अंदर भी एक नया विश्वास पैदा हो, भारत की विकास यात्रा में वे भी सक्रिय भागीदार बनें, इसलिये हमने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया। ये निर्णय राजनीति के तराजू से तौलने के निर्णय नहीं होते हैं, सदियों तक माताओं-बहनों के जीवन की रक्षा की गारंटी देते हैं।

उसी प्रकार से मैं एक दूसरा उदाहरण देना चाहता हूं – अनुच्छेद 370, 35A। क्या कारण था? इस सरकार की पहचान है – हम समस्याओं को टालते भी नहीं हैं और न ही हम समस्याओं को पालते हैं। अब समस्याओं को टालने का भी वक्त नहीं है, अब समस्याओं का पालने का भी वक्त नहीं है। जो काम पिछले 70 साल में नहीं हुआ, नई सरकार बनने के बाद, 70 दिन के भीतर-भीतर अनुच्‍छेद 370 और 35A को हटाने का काम भारत के दोनों सदनों ने, राज्यसभा और लोकसभा ने, दो-तिहाई बहुमत से पारित कर दिया। इसका मतलब यह हुआ कि हर किसी के दिल में यह बात थी, लेकिन प्रारंभ कौन करे, आगे कौन आये, शायद उसी का इंतजार था और देशवासियों ने मुझे यह काम दिया और जो काम आपने मुझे दिया मैं वही करने के लिए आया हूं। मेरा अपना कुछ नहीं है।

हम जम्मू-कश्मीर reorganisation की दिशा में भी आगे बढ़े। 70 साल हर किसी ने कुछ-न-कुछ प्रयास किया, हर सरकार ने कोई-न-कोई प्रयास किया लेकिन इच्छित परिणाम नहीं मिले और जब इच्छित परिणाम नहीं मिले हैं, तो नये सिरे से सोचने की, नये सिरे से कदम बढ़ाने की आवश्‍यकता होती है। और जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख के नागरिकों की आशा-आकांक्षा पूरी हो, यह हम सब का दायित्‍व है। उनके सपनों को नये पंख मिले, यह हम सब की जिम्‍मेदारी है। और उसके लिए 130 करोड़ देशवासियों को इस जिम्‍मेदारी को उठाना है और इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए, जो भी रुकावटें सामने आई हैं, उनको दूर करने का हमने प्रयास किया है।

पिछले 70 साल में इन व्‍यवस्‍थाओं ने अलगाववाद को बल दिया है, आतंकवाद को जन्‍म दिया है, परिवारवाद को पोसा है और एक प्रकार से भ्रष्‍टाचार और भेदभाव की नींव को मजबूती देने का ही काम किया है। और इसलिएवहां की महिलाओं को अधिकार मिलें। वहां के मेरे दलित भाइयो-बहनो को, देश के दलितों को जो अधिकार मिलता था, वो उन्हें नहीं मिलता था। हमारे देश के जनजातीय समूहों को, tribalsको जो अधिकार मिलते हैं, वो उनको भी मिलने चाहिए। वहां हमारे कई ऐसे समाज और व्‍यवस्‍था के लोग चाहे वह गुर्जर हों, बकरवाल हों, गद्दी हों, सिप्‍पी हों, बाल्‍टी हों – ऐसी अनेक जनजातियां, उनको राजनीतिक अधिकार भी मिलने चाहिए। उसे देने की दिशा में, हम हैरान हो जाएंगे, वहां के हमारे सफाई कर्मचारी भाइयों और बहनों पर कानूनी रोक लगा दी गई थीं। उनके सपनों को कुचल दिया गया था। आज हमने उनको यह आजादी देने का काम किया है।

भारत विभाजन हुआ, लाखों-करोड़ों लोग विस्‍थापित होकर आये उनका कोई गुनाह नहीं था लेकिन जो जम्‍मू-कश्‍मीर मेंआकर बसे, उनको मानवीय अधिकार भी नहीं मिले, नागरिक के अधिकार भी नहीं मिले। जम्‍मू-कश्‍मीर के अन्‍दर मेरे पहाड़ी भाई-बहन भी हैं। उनकी भी चिंता करने की दिशा में हम कदम उठाना चाहते हैं।

मेरे प्‍यारे देशवासियो, जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख सुख-समृद्धि और शांति के लिए भारत के लिए प्रेरक बन सकता है। भारत की विकास यात्रा में बहुत बड़ा योगदान दे सकता है। उसके पुराने उन महान दिवसों को लौटाने का हम सब प्रयास करें। उन प्रयासों को लेकर यह जो नई व्‍यवस्‍था बनी है वह सीधे-सीधे नागरिकों के हितों के लिए काम करने के लिए सुविधा पैदा करेगी। अब देश का, जम्‍मू-कश्‍मीर का सामान्‍य नागरिक भी दिल्‍ली सरकार को पूछ सकता है। उसको बीच में कोई रुकावटें नहीं आएंगी। यह सीधी-सीधी व्‍यवस्‍था आज हम कर पाए हैं। लेकिन जब पूरा देश, सभी राजनीतिक दलों के भीतर भी, एक भी राजनीतिक दल अपवाद नहीं हैं, अनुच्‍छेद 370,35A को हटाने के लिए कोई प्रखर रूप से तो कोई मूक रूप से समर्थन देता रहा है। लेकिन राजनीति के गलियारों में चुनाव के तराजू से तोलने वाले कुछ लोग 370 के पक्ष में कुछ न कुछ कहते रहते हैं। जो लोग 370 के पक्ष में वकालत करते हैं, उनको देश पूछ रहा है, अगर ये अनुच्‍छेद 370, यह 35A इतना महत्‍वपूर्ण था,इतना अनिवार्य था, उसी से भाग्य बदलने वाला थातो 70 साल तक इतना भारी बहुमत होने के बावजूद आप लोगों ने उसको permanent क्‍यों नहीं किया? Temporary क्‍यों बनाए रखा?अगर इतना conviction था, तो आगे आते और permanent कर देते। लेकिन इसका मतलब यह है, आप भी जानते थेजो तय हुआ है, वह सही नहीं हुआ है, लेकिन सुधार करने की आप में हिम्‍मत नहीं थी, इरादा नहीं था। राजनीतिक भविष्‍य पर सवालिया निशान लगते थे। मेरे लिए देश का भविष्‍य ही सब कुछ है, राजनीतिक भविष्‍य कुछ नहीं होता है।

हमारे संविधान निर्माताओं ने, सरदार वल्‍लभ भाई पटेल जैसे महापुरुषों ने, देश की एकता के लिए, राजकीय एकीकरण के लिए उस कठिन समय में भी महत्‍वपूर्ण फैसले लिए, हिम्‍मत के साथ फैसले लिए। देश के एकीकरण का सफल प्रयास किया। लेकिन Article 370 के कारण, 35A के कारण कुछ रुकावटें भी आई हैं।

आज लाल किले सेमैं जब देश को संबोधित कर रहा हूं, मैं यह गर्व के साथ कहता हूं कि आज हर हिन्‍दुस्तानी कह सकता है- One Nation, One Constitution और हम सरदार साहब का एक भारत-श्रेष्‍ठ भारत, इसी सपने को चरितार्थ करने में लगे हुए हैं। तब ये साफ-साफ बनता है कि हम ऐसी व्‍यवस्‍थाओं को विकसित करेंजो देश की एकता को बल दें, देश को जोड़ने के लिए cementing force के रूप में उभर करके आएं और यह प्रक्रिया निरंतर चलनी चाहिए। वह एक समय के लिए नहीं होती है, अविरल होनी चाहिए।

GST के माध्‍यम सेहमने One Nation, One Tax, उस सपने को साकार किया है। उसी प्रकार सेपिछले दिनों ऊर्जा के क्षेत्र में One Nation, One Grid इस काम को भी हमने सफलतापूर्वक पार किया।

उसी प्रकार से One Nation, One Mobility Card – इस व्‍यवस्‍था को भी हमने विकसित किया है। और आज देश में व्‍यापक रूप से चर्चा चल रही है, “एक देश, एक साथ चुनाव’’। यह चर्चा होनी चाहिए, लोकतांत्रिक तरीके से होनी चाहिए और कभी न कभी “एक भारत-श्रेष्‍ठ भारत’’ के सपनों को साकार करने के लिए और भी ऐसी नई चीजों को हमें जोड़ना होगा।

मेरे प्‍यारे देशवासियो, देश को नई ऊंचाइयों को पार करना है, देश को विश्‍व के अंदर अपना स्‍थान प्रस्‍थापित करना है। तो हमें अपने घर में भी गरीबी से मुक्ति के भान को बल देना ही होगा। यह किसी के लिए उपकार नहीं है। भारत के उज्‍ज्‍वल भविष्‍य के लिए, हमें गरीबी से मुक्‍त होना ही होगा। गत पांच वर्ष में गरीबी कम करने की दिशा में, लोग गरीबी से बाहर आएं, बहुत सफल प्रयास हुए हैं। पहले की तुलना में ज्‍यादा तेज गति से और ज्‍यादा व्‍यापकता से इस दिशा में सफलता प्राप्‍त हुई है।लेकिन फिर भी गरीब व्‍यक्ति, सम्‍मान अगर उसको प्राप्‍त हो जाता है, उसका स्‍वाभिमान जग जाता है तो वह गरीबी से लड़ने के लिए सरकार का इंतजार नहीं करेगा।वो अपने सामर्थ्‍य से गरीबी को परास्‍त करने के लिए आएगा। हम में से किसी से भी ज्‍यादा विपरीत परिस्थितियों से जूझने की ताकत अगर किसी में है, तो मेरे गरीब भाइयों-बहनों में है। कितनी ही ठंड क्‍यों न हो, वो मुठ्ठी बंद करके गुजारा कर सकता है। उसके भीतर यह सामर्थ्‍य है। आइये उस सामर्थ्‍य के हम पुजारी बनें और इसलिए उसकी रोजमर्रा की जिंदगी की कठिनाइयों को हम दूर करें।

क्‍या कारण है कि मेरे गरीब के पास शौचालय न हो, घर में बिजली न हो, रहने के लिए घर न हो, पानी की सुविधा न हो, बैंक में खाता न हो, कर्ज लेने के लिए साहूकारों के घर जा करके एक प्रकार से सब कुछ गिरवी रखना पड़ता हो। आइये, गरीबों के आत्‍म-सम्‍मान, आत्‍म-विश्‍वास को, उनके स्‍वाभिमान को ही आगे बढ़ाने के लिए, सामर्थ्‍य देने के लिए हम प्रयास करें।

भाइयो-बहनो, आजादी के 70 साल हो गए। बहुत सारे काम सब सरकारों ने अपने-अपने तरीके से किए हैं। सरकार किसी भी दल की क्‍यों न हो, केंद्र की हो, राज्‍य की हो, हर किसी ने अपने-अपने तरीके से प्रयास किए हैं। लेकिन यह भी सच्‍चाई है कि आज हिन्‍दुस्‍तान में करीब-करीब आधे घर ऐसे हैं, जिन घरों में पीने का पानी उपलब्ध नहीं है। उनको पीने का पानी प्राप्‍त करने के लिए मशक्‍कत करनी पड़ती है। माताओं-बहनों कोसिर पर बोझ उठा करके, मटके लेकरदो-दो, तीन-तीन, पांच-पांचकिलोमीटर जाना पड़ता है। जीवन का बहुत सारा हिस्‍सा सिर्फ पानी में खप जाता हैऔर इसलिएइस सरकार ने एक विशेष काम की तरफ बल देने का निर्णय लिया है और वह है – हमारे हर घर में जल कैसे पहुंचे? हर घर को जल कैसे मिले? पीने का शुद्ध पानी कैसे मिले? और इसलिए आज मैं लाल किले से घोषणा करता हूं कि हम आने वाले दिनों में जल-जीवन मिशन को आगे ले करके बढ़ेंगे। यह जल-जीवन मिशन, इसके लिए केंद्र और राज्‍य सरकार साथ मिलकर काम करेंगे और आने वाले वर्षों में साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा रकम इस जल-जीवन मिशनके लिए खर्च करने का हमने संकल्‍प लिया है। जल संचय हो, जल सिंचन हो, वर्षा की बूंद-बूंद पानी को रोकने का काम हो, समुद्री पानी को या Waste Water को Treatment करने का विषय हो, किसानों के लिए ‘Per Drop, More Crop’, Micro Irrigation का काम हो, पानी बचाने का अभियान हो, पानी के प्रति सामान्‍य से सामान्‍य नागरिक सजग बने, संवेदनशील बने, पानी का महत्व समझें, हमारे शिक्षा कर्मों में भीबच्‍चों को भी बचपन से ही पानी के महत्व की शिक्षा दी जाए। पानी संग्रह के लिए, पानी के स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए हम लगातार प्रयास करें और हम इस विश्‍वास के साथ आगे बढ़ें कि पानी के क्षेत्र में पिछले 70 साल में जो काम हुआ है, हमें 5 साल में चार गुना से भी ज्‍यादा उस काम को करना होगा। अब हम ज्‍यादा इंतजार नहीं कर सकते और इस देश के महान संत, सैकड़ों साल पहले,संत तिरुवल्लुवर जी ने उस समय एक महत्‍वपूर्ण बात कही थी, सैकड़ों साल पहले, तब तो शायद किसी ने पानी के संकट के बारे में सोचा भी नहीं होगा, पानी के महत्वके बारे में भी नहीं सोचा होगा, और तब संत तिरुवल्लुवर जी ने कहा था“नीर इन्ड़्री अमियादू, उल्ग:, नीर इन्ड़्री अमियादू, उल्ग:,” यानि जब पानी समाप्‍त हो जाता है, तो प्रकृति का कार्य थम जाता है, रूक जाता है। एक प्रकार से विनाश प्रारंभ हो जाता है।

मेरा जन्‍म गुजरात में हुआ, गुजरात में तीर्थ क्षेत्र है महुडी, जो उत्‍तरी गुजरात में है। जैन समुदाय के लोग वहां आते-जाते रहते हैं। आज से करीब 100 साल पहले वहां एक जैन मुनि हुए, वह किसान के घर में पैदा हुए थे, किसान थे, खेत में काम करते थे लेकिन जैन परंपरा के साथ जुड़ करके वह दीक्षित हुए और जैन-मुनि बने।

करीब 100 साल पहले वह लिखकर गए हैं। बुद्धि सागर जी महाराज ने लिखा है कि एक दिन ऐसा आएगा, जब पानी किराने की दुकान में बिकेगा। आप कल्‍पना कर सकते हैं 100 साल पहले एक संत लिख कर गए कि पानी किराने की दुकान में बिकेगा और आज हम पीने का पानी किराने की दुकान से लेते हैं। हम कहां से कहां पहुंच गए।

मेरे प्‍यारे देशवासियो, न हमें थकना है, न हमें थमना है, न हमें रूकना है और न हमें आगे बढ़ने से हिचकिचाना है। यह अभियान सरकारी नहीं बनना चाहिए। जल संचय का यह अभियान, जैसे स्‍वच्‍छता का अभियान चला था, जन सामान्‍य का अभियान बनना चाहिए। जन सामान्‍य के आदर्शों को लेकर, जन सामान्‍य की अपेक्षाओं को लेकर, जन सामान्‍य के सामर्थ्‍य को लेकर हमें आगे बढ़ना है।

मेरे प्‍यारे देशवासियो, अब हमारा देश उस दौर में पहुंचा है जिसमें बहुत-सी बातों से अब हमें अपने आपको छुपाए रखने की जरूरत नहीं है। चुनौतियों को सामने से स्‍वीकार करने का वक्‍त आ चुका है। कभी राजनीतिक नफा-नुकसान के इरादे से हम निर्णय करते हैं लेकिन इससे देश की भावी पीढ़ी का बहुत नुकसान होता है।

वैसा ही एक विषय है जिसको मैं आज लाल किले से स्‍पष्‍ट करना चाहता हूं। और वह विषय है, हमारे यहां हो रहा बेतहाशा जनसंख्‍या विस्‍फोट।यह जनसंख्‍या विस्‍फोट हमारे लिए, हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए अनेक नए संकट पैदा करता है लेकिन यह बात माननी होगी कि हमारे देश में एक जागरूक वर्ग है, जो इस बात को भली-भांति समझता है। वे अपने घर में शिशु को जन्‍म देने से पहले भली-भांति सोचता है कि मैं कहीं उसके साथ अन्‍याय तो नहीं कर दूंगा। उसकी जो मानवीय आवश्‍यकताएं हैं उनकी पूर्ति मैं कर पाऊंगा कि नहीं कर पाऊंगा, उसके जो सपने हैं, वो सपने पूरा करने के लिए मैं अपनी भूमिका अदा कर पाऊंगा कि नहीं कर पाऊंगा। इन सारे parameters से अपने परिवार का लेखा-जोखा लेकर हमारे देश में आज भी स्वः प्रेरणा से एक छोटा वर्ग परिवार को सीमित करके, अपने परिवार का भी भला करता है और देश का भला करने में बहुत बड़ा योगदान देता है। ये सभी सम्‍मान के अधिकारी हैं, ये आदर के अधिकारी हैं। छोटा परिवार रखकर भी वह देश भक्ति को ही प्रकट करते हैं। वो देशभक्ति को अभिव्‍यक्‍त करते हैं। मैं चाहूंगा कि हम सभी समाज के लोग इनके जीवन को बारीकी से देखें कि उन्‍होंने अपने परिवार में जनसंख्‍या वृद्धि से अपने-आपको बचा करके परिवार की कितनी सेवा की है। देखते ही देखते एक दो पीढ़ी नहीं, परिवार कैसे आगे बढ़ता चला गया है, बच्‍चों ने कैसे शिक्षा पाई है, वह परिवार बीमारी से मुक्‍त कैसे है, वह परिवार अपनी प्राथमिक आवश्‍यकताओं को कैसे बढ़िया ढंग से पूरा करता है।हम भी उनसे सीखें और हमारे घर में किसी भी शिशु के आने से पहले हम सोचें कि जो शिशु मेरे घर में आएगा, क्‍या उसकी आवश्‍यकताओं की पूर्ति के लिए मैंने अपने-आपको तैयार कर लिया है? क्‍या मैं उसको समाज के भरोसे ही छोड़ दूंगा? मैं उसको उसके नसीब पर ही छोड़ दूंगा? कोई मां-बाप ऐसा नहीं हो सकता है, जो अपने बच्‍चों को जन्म देकर इस प्रकार की जिंदगी जीने के लिए मजबूर होने दें और इसलिए एक सामाजिक जागरूकता की आवश्‍यकता है।

जिन लोगों ने यह बहुत बड़ी भूमिका अदा की है, उनके सम्‍मान की आवश्‍यकता है, और उन्‍हीं के प्रयासों के उदाहरण लेकर समाज के बाकी वर्ग, जो अभी भी इससे बाहर हैं, उनको जोड़कर जनसंख्‍या विस्‍फोट- इसकी हमें चिंता करनी ही होगी।

सरकारों को भी भिन्‍न-भिन्‍न योजनाओं के तहत आगे आना होगा। चाहे राज्‍य सरकार हो, केंद्र सरकार हो- हर किसी को इस दायित्‍व को निभाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर चलना होगा। हम अस्‍वस्‍थ समाज नहीं सोच सकते, हम अशिक्षित समाज नहीं सोच सकते। 21वीं सदी के भारत मेंसपनों को पूरा करने का सामर्थ्‍य व्‍यक्ति से शुरू होता है, परिवार से शुरू होता है लेकिन अगर आबादी शिक्षित नहीं है, तंदुरूस्‍त नहीं है, तो न ही वह घर सुखी होता है, न ही वह देश सुखी होता है।

जन आबादी शिक्षित हो, सामर्थ्‍यवान हो, Skilled हो और अपनी इच्‍छा और आवश्‍यकताओं की पूर्ति करने के लिए, उपयुक्‍त माहौल प्राप्‍त करने के लिए संसाधन उपलब्‍ध हों, तो मैं समझता हूं कि देश इन बातों को पूर्ण कर सकता है।

मेरे प्‍यारे देशवासियो, आप भलीभांति जानते हैं कि भ्रष्‍टाचार, भाई-भतीजावाद ने हमारे देश का कल्‍पना से परे नुकसान किया है और दीमक की तरह हमारे जीवन में घुस गया है। उसको बाहर निकालने के लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। सफलताएं भी मिली हैं, लेकिन बीमारी इतनी गहरी है, बीमारी इतनी फैली हुई है कि हमें और अधिक प्रयास, और वह भी सिर्फ सरकारी स्‍तर पर नहीं, हर स्‍तर पर करते ही रहना पड़ेगा, और ऐसा निरंतर करते रहना पड़ेगा।एक बार में सारा काम नहीं होता, बुरी आदतें – पुरानी बीमारी जैसी होती हैं, कभी ठीक हो जाती हैं, लेकिन मौका मिलते ही फिर से बीमारी आ जाती हैं। वैसे ही यह एक ऐसी बीमारी है, जिसको हमने निरंतर Technology का उपयोग करते हुए इसको निरस्‍त करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। हर स्‍तर पर ईमानदारी और पारदर्शिता को बल मिले, इसके लिए भी भरसक प्रयास किए गए हैं।

आपने देखा होगा पिछले पांच साल में भी, इस बार आते ही सरकार में बैठे हुए अच्‍छे-अच्‍छे लोगों की छुट्टी कर दी गई। हमारे इस अभियान में जो रुकावट बनते थे, उनसे कहा गया कि आप अपना कारोबार कर लीजिए, अब देश को आपकी सेवाओं की जरूरत नहीं है।

मैं स्‍पष्‍ट मानता हूं, व्‍यवस्‍थाओं में बदलाव होना चाहिए, लेकिन साथ-साथ सामाजिक जीवन में भी बदलाव होना चाहिए। सामाजिक जीवन में बदलाव होना चाहिए, उसके साथ-साथ व्‍यवस्‍थाओं को चलाने वाले लोगों के दिल-दिमाग में भी बदलाव बहुत अनिवार्य होता है। तभी जाकर हम इच्छित परिणामों को प्राप्‍त कर सकते हैं।

भाइयो और बहनो, देश आजादी के इतने साल बाद एक प्रकार से परिपक्‍व हुआ है। हम आजादी के 75 साल मनाने जा रहे हैं। तब यह आजादी सहज संस्कार, सहज स्वभाव, सहज अनुभूति, यह भी आवश्यक होती है। मैं अपने अफसरों के साथ जब बैठता हूं तो एक बात करता हूं, सार्वजनिक रूप से तो बोलता नहीं था लेकिन आज मन कर रहा है तो बोल ही दूं। मैं अपने अफसरों के बीच बार-बार कहता हूं कि क्या आजादी के इतने सालों के बाद रोजमर्रा की जिंदगी में, सरकारों का जो दखल है सामान्य नागरिक के जीवन में, क्या हम उस दखल को कम नहीं कर सकते?खत्म नहीं कर सकते हैं? आजाद भारत का मतलब मेरे लिए यह है कि धीरे-धीरे सरकारेंलोगों की जिंदगी से बाहर आएं, लोग अपनी जिंदगी के निर्णय करने के लिये आगे बढ़ने के लिये, सारे रास्ते उनके लिये खुले होने चाहिए, मन-मर्जी पड़े उस दिशा में, देश के हित में और परिवार की भलाई के लिये स्वयं के सपनों के लियेआगे बढ़ें, ऐसा Eco-systemहमको बनाना ही होगा। और इसलिये सरकार का दवाब नहीं होना चाहिए लेकिन साथ-साथ जहां मुसीबत के पल हों, तो सरकार का अभाव भी नहीं होना चाहिए। न सरकार का दवाब हो, न सरकार का अभाव हो, लेकिन हम सपनों को लेकर आगे बढ़ें। सरकार हमारे एक साथी के रूप मेंहर पल मौजूद हो। जरूरत पड़े तो लगना चाहिए कि हां कोई है, चिंता का विषय नहीं है।क्या उस प्रकार की व्यवस्थाएं हम विकसित कर सकते हैं?

हमने गैर-जरूरी कई कानूनों को खत्म किया है। गत 5 वर्ष में एक प्रकार से मैंने प्रतिदिन एक गैर-जरूरी कानून खत्म किया था। देश के लोगों तक शायद यह बात पहुंची नहीं होगी। हर दिन एक कानून खत्म किया था, करीब-करीब 1450 कानून खत्म किये थे। सामान्य मानव के जीवन से बोझ कम हो। अभी सरकार को 10 हफ्ते हुए, अभी तो इन 10 हफ्तों में 60 ऐसे कानूनों को खत्म कर दिया है।

Ease of living यह आजाद भारत की आवश्यकता है और इसलिये हम Ease of living पर बल देना चाहते हैं, उसी को आगे ले जाना चाहते हैं।आज Ease of doing business में हम काफी प्रगति कर रहे हैं। पहले 50 में पहुंचने का सपना है, उसके लिये कई reform करने की जरूरत होगी, कई छोटी-मोटी रुकावटें हैं। कोई व्यक्ति छोटा सा उद्योग करना चाहता है या कोई छोटा-सा काम करना चाहता है, तो यहां form भरो, उधर form भरो, इधर जाओ, उस office जाओ, सैंकड़ों ऑफिसों में चक्कर लगाने जैसी परेशानियों में उलझा रहता है, उसका मेल ही नहीं बैठता है। इनको खत्म करते-करते, reform करते-करते, केंद्र और राज्यों को भी साथ लेते-लेते, नगरपालिका-महानगरपालिकाओं को भी साथ लेते-लेते, हम Ease of doing business के काम में बहुत कुछ करने में सफल हुये हैं। और दुनिया में भी विश्वास पैदा हुआ है कि भारत जैसा इतना बड़ा Developing देश इतना बड़ा सपना देख सकता है और इतनी बड़ी jump लगा सकता है। Ease of doing business तो एक पड़ाव है, मेरी मंजिल तो है Ease of living – सामान्य मानव के जीवन में उसको सरकारी काम में कोई मशक्कत न करनी पड़े, उसके हक उसको सहज रूप से मिले और इसलिए हमें आगे बढ़ने की जरूरत है, हम उस दिशा में काम करना चाहते हैं।

मेरे प्यारे देशवासियो, हमारा देश आगे बढ़े, लेकिन incremental progress, उसके लिये देश अब ज्यादा इंतजार नहीं कर सकता है, हमें high jump लगानी पड़ेंगी, हमें छलांग लगानी पड़ेगी, हमें हमारी सोच को भी बदलना पड़ेगा। भारत को Global benchmark के बराबर लाने के लिये हमारे आधुनिक infrastructure,उसकी ओर भी जाना पड़ेगा और कोई कुछ भी कहे कोई कुछ भी लिखे, लेकिन सामान्‍य मानव का सपना अच्‍छी व्‍यवस्‍थाओं का होता है। अच्‍छी चीज उसे अच्‍छी लगती हैं, उसकी उसमें रूचि बनती है। और इसलिए हमने तय किया है कि इन कालखंड में 100 लाख करोड़ रुपया आधुनिक Infrastructure के लिए लगाए जाएंगे, जिससे रोजगार भी मिलेगा, जीवन में भी नई व्‍यवस्‍था विकसित होंगी जो आवश्‍यकताओं की पूर्ति भी करेगी। चाहे सागरमाला प्रोजक्‍ट हो, चाहे भारतमाला प्रोजेक्‍ट हो, चाहे आधुनिक रेलवे स्‍टेशन बनाने हों या बस स्‍टेशन बनाने हों या एयरपोर्ट बनाने हों, चाहे आधुनिक अस्‍पताल बनाने हों, चाहे विश्‍व स्‍तर के educational institutions का निर्माण करना हो, infrastructure की दृष्टि से भी इन सभी चीजों को हम आगे बढ़ाना चाहते हैं। अब देश में seaport की भी आवश्‍यकता है। सामान्य जीवन का भी मन बदला है। हमें इसे समझना होगा।

पहले एक जमाना था कि अगर कागज पर सिर्फ निर्णय हो जाए कि एक रेलवे स्‍टेशन फलाना इलाके में बनने वाला है, तो महीनों तक, सालों तक एक सकारात्‍मक गूंज बनी रहती थी कि चलो हमारे यहां नजदीक में अब नया रेलवे स्‍टेशन आ रहा है। आज वक्‍त बदल चुका है। आज सामान्‍य नागरिक रेलवे स्‍टेशन मिलने से संतुष्‍ट नहीं है, वो तुरंत पूछता है, वंदे भारत एक्सप्रेस हमारे इलाके में कब आएगी? उसकी सोच बदल गई है। अगर हम एक बढ़िया से बढ़िया बस स्‍टेशन बना दें, FIVE STAR रेलवे स्‍टेशन बना दें तो वहां का नागरिक ये नहीं कहता है साहब आज बहुत बढ़िया काम किया है। वो तुरंत कहता है- साहब हवाई अड्डा कब आएगा? यानी अब उसकी सोच बदल चुकी है। कभी रेलवे के stoppage से संतुष्‍ट होने वाला मेरा देश का नागरि‍क बढ़िया से बढ़िया रेलवे स्‍टेशन मिलने के बाद तुरंत कहता है- साहब बाकी तो ठीक है, हवाई अड्डा कब आएगा?

पहले किसी भी नागरिक को मिलें तो कहता था- साहब, पक्‍की सड़क कब आएगी? हमारे यहां पक्‍की सड़क कब बनेगी? आज कोई मिलता है तो तुरंत कहता है- साहब, 4 lane वाला रोड बनेगा कि 6 lane वाला? सिर्फ पक्‍की सड़क तक वो सीमित रहना नहीं चाहता और मैं मानता हूं आकांक्षी भारत के लिए ये बहुत बड़ी बात होती है।

पहले गांव के बाहर बिजली का खंभा ऐसे ही नीचे लाकर सुला दिया हो तो लोग कहते हैं कि चलो भाई बिजली आई, अभी तो खंभा नीचे पड़ा हुआ है, गाड़ा भी नहीं है। आज बिजली के तार भी लग जाएं, घर में मीटर भी लग जाएं तो वो पूछता है- साहब, 24 घंटे बिजली कब आएगी? अब वो खंभे, तार और मीटर से संतुष्‍ट नहीं है।

पहले जब मोबाइल आया, तो उनको लगता था मोबाइल फोन आ गया। वो एक संतोष का अनुभव करता था। लेकिन आज वो तुरंत चर्चा करने लगता है कि data की speed क्‍या है?

ये बदलते हुए मिजाज को, बदलते हुए वक्‍त को हमें समझना होगा और उसी प्रकार से Global Benchmarkके साथ हमें अपने देश को आधुनिक infrastructure के साथ – clean energy हो, gas based economy हो, gas grid हो, e-mobility हो, ऐसे अनेक क्षेत्रों में हमें आगे बढ़ना है।

मेरे प्‍यारे देशवासियो, आमतौर पर हमारे देश में सरकारों की पहचान ये बनती रही कि सरकार ने फलाने इलाके के लिए क्‍या किया, फलाने वर्ग के लिए क्‍या किया, फलाने समूह के लिए क्‍या किया? आमतौर पर क्‍या दिया, कितना दिया, किसको दिया, किसको मिला, उसी के आसपास सरकार और जनमानस चलते रहे और उसको अच्‍छा भी माना गया। मैं भी, शायद उस समय की मांग रही होगी, आवश्यकता रही होगी लेकिन अब किस को क्‍या मिला, कैसे मिला, कब मिला, कितना मिला। इन सबके रहते हुए भी हम सब मिल करके देश को कहां ले जाएंगे, हम सब मिल करके देश को कहां पहुंचाएगे, हम सब मिल करके देश के लिए क्‍याachieve करेंगे, इन सपनों को ले करके जीना, जूझना और चल पड़ना ये समय की मांग है। और इसलिए 5 Trillion Dollar Economy का सपना संजोया है। 130 करोड़ देशवासी अगर छोटी-छोटी चीजों को लेकर चल पड़े तो 5 Trillion Dollar Economy, कई लोंगो को मुश्किल लगता है, वो गलत नहीं हो सकते, लेकिन अगर मुश्किल काम नहीं करेंगे तो देश आगे कैसे बढेगा? मुश्किल चुनौतियों को नहीं उठाएंगे तो चलने का मिजाज़ कहां से बनेगा? मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी हमें हमेशा ऊंचे निशान रखने चाहिए और हमने रखा है। लेकिन वो हवा में नहीं है। आजादी के 70 साल बाद हम दो Trillion Dollar Economy पर पहुंचे थे, 70 साल की विकास यात्रा ने हमें दो Trillion Dollar Economy पर पहुंचाया था। लेकिन 2014 से 2019, पांच साल के भीतर-भीतर हम लोग दो Trillion से तीन Trillion पहुंच गए, एक Trillion Dollar हमने जोड़ दिया। अगर पांच साल में, 70 साल में जो हुआ उसमें इतना बड़ा jump लगाया तो आने वाले पांच साल में हम 5 Trillion Dollar Economy बन सकते है, और ये सपना हर हिन्‍दुस्‍तानी का होना चाहिए। जब Economy बढ़ती है तो जीवन भी बेहतर बनाने की सुविधा बनती है। छोटे-से-छोटे व्‍यक्ति के सपनों को साकार करने के लिए अवसर पैदा होते हैं। और ये अवसर पैदा करने के लिए देश के आर्थिक क्षेत्र में हमें इस बात को आगे ले जाना है।

जब हम सपना देखते हैं कि देश के किसान की आय दो गुनी होनी चाहिए, जब हम सपना देखते है कि आजादी के 75 साल में हिन्‍दुस्‍तान में कोई परिवार, गरीब से गरीब भी, उसका पक्‍का घर होना चाहिए। जब हम सपना देखते हैं कि आजादी के 75 साल हों तब देश के हर परिवार के पास बिजली होनी चाहिए, जब हम सपना देखते है कि आजादी के 75 साल हो, तब हिन्‍दुस्‍तान के हर गांव में Optical Fiber Network हो, Broadband की Connectivity हो, Long Distance Education की सुविधा हो।

हमारी समुद्री संपत्ति, Blue Economy इस क्षेत्र को हम बल दें। हमारे मछुआरे भाइयों-बहनों को हम ताकत दें। हमारे किसान अन्‍नदाता है, ऊर्जादाता बनें। हमारे किसान, ये भी Exporter क्‍यों न बनें। दुनिया के अंदर हमारे किसानों के द्वारा पैदा की हुई चीजों का डंका क्यों न बजे। इन सपनों को ले करके हम चलना चाहते हैं। हमारे देश को Export बढ़ाना ही होगा, हम सिर्फ दुनिया, हिन्‍दुस्‍तान को बाजार बना करके देखे, हम भी दुनिया के बाजार में पहुंचने के लिए भरसक प्रयास करें।

हमारे हर District में दुनिया के एक-एक देश की जो ताकत होती है, छोटे-छोटे देशों की, वो ताकत हमारे एक-एक District में होती है। हमें इस सामर्थ्‍य को समझना है, इस सामर्थ्‍य को हमें Channelize करना है और हमारे हर जिले Export Hub बनने की दिशा में क्‍यों न सोचें, हर जिले का अपना Handicraft है, हर जिले के अंदर अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। अगर किसी जिले के पास इत्र की पहचान है, तो किसी जिले के पास साड़ियों की पहचान है, किसी जिले के बर्तन मशहूर है, तो किसी जिले में मिठाई मशहूर है। हर एक के पास विविधता है, सामर्थ्‍य है, हमने Global Market के लिएzero defect, zero effect से उसका manufacturing कैसे हो और इस विविधता से दुनिया को परिचित कराते हुए अगर हम उसके export पर बल देंगे, दुनिया के मार्केट कोcapture करने की दिशा में हम काम करेंगे, तो देश के नौजवानों को रोजगार मिलेगा। हमारे small scale industries को, micro level industries को इसके कारण एक बहुत बड़ी ताकत मिलेगी और हमें उस ताकत को बढ़ाना है।

हमारा देश Tourist Destination के लिए दुनिया के लिए अजूबा हो सकता है, लेकिन किसी न किसी कारण से जितनी तेजी से हमें वह काम करना चाहिए, वो हम नहीं कर पाए हैं। आइये, हम सभी देशवासी तय करें कि हमें देश के tourism पर बल देना है। जब tourism बढ़ता है, कम से कम पूंजी‍निवेश में ज्‍यादा से ज्‍यादा रोजगार मिलता है। देश की economy को बल मिलता है और दुनियाभर के लोग आज भारत को नये सिरे से देखने के लिए तैयार हैं। हम सोचें कि दुनिया हमारे देश में कैसे आए, हमारे tourism के क्षेत्र को कैसे बल मिले और इसके लिए Tourist Destination की व्‍यवस्‍था हो, सामान्‍य मानव की आमदनी बढ़ाने की बात हो, बेहतर शिक्षा, नये रोजगार के अवसर प्राप्‍त हों, मध्‍यम वर्ग के लोगों के बेहतर सपनों को साकार करने के लिए, ऊंची उड़ान के लिए सारे launching pad उनके लिए available होने चाहिए। हमारे वैज्ञानिकों के पास बेहतर संसाधनों की पूरी सुविधा हो, हमारी सेना के पास बेहतर इंतजाम हो, वो भी देश में बना हुआ हो, तो मैं मानता हूं ऐसे अनेक क्षेत्र हैं जो 5 trillion dollar economy के लिए भारत को एक नई शक्ति दे सकते हैं।

मेरे प्‍यारे भाइयो-बहनो, आज देश में आर्थिक सिद्धि प्राप्‍त करने के लिए बहुत ही अनुकूल वातावरण है।जबGovernment stable होती है, policy predictable होती है, व्‍यवस्‍थाएं stable होती है तो दुनिया का भी एक भरोसा बनता है। देश की जनता ने यह काम करके दिखाया है। विश्‍व भी भारत की political stability को बड़े गर्व और आदर के साथ देख रहा है। हमें इस अवसर को जाने नहीं देना चाहिए। आज विश्‍व हमारे साथ व्यापार करने को उत्‍सुक है। वह हमारे साथ जुड़ना चाहता है। आज हमारे लिए गर्व का विषय है कि महंगाई को control करते हुए हम विकास दर को बढ़ाने वाले एक महत्‍वपूर्ण समीकरण को ले करके चले हैं। कभी विकास दर तो बढ़ जाती है, लेकिन महंगाई control में नहीं रहती है। कभी महंगाई बढ़ जाती है तो विकास दर का ठिकाना नहीं होता है। लेकिन यह ऐसी सरकार है जिसने महंगाई को control भी किया और विकास दर को आगे भी बढ़ाया।

हमारे अर्थव्‍यवस्‍था के fundamentals बहुत मजबूत हैं। यह मजबूती हमें आगे ले जाने के लिए भरोसा देती है। उसी प्रकार से जीएसटी जैसी व्‍यवस्‍था विकसित करके, IBC जैसे reform लाना अपने आप में एक नया विश्‍वास पैदा करना चाहते हैं। हमारे देश में उत्‍पादन बढ़े, हमारी प्राकृतिक संपदा की processing बढ़ें, value addition हो, value addition वाली चीजें दुनिया के अंदर export हों और दुनिया के अनेक देशों तक exportहों। हम क्‍यों न सपना देखें कि दुनिया का कोई देश ऐसा नही होगा, जहां कोई न कोई चीज भारत से न जाती हों, हिन्‍दुस्‍तान का कोई जिला ऐसा नहीं होगा जहां से कुछ न कुछ export न होता हो। अगर इन दोनों चीजों को लेकर हम चले, तो हम आमदनी भी बढ़ा सकते हैं। हमारी कंपनियां, हमारे उद्यमी वे भी दुनिया के बाजार में जाने के सपने देखते हैं। दुनिया के बाजार में जाकर भारत के रुतबे को वहां आवाज देने की ताकत दें, हमारे निवेशक ज्‍यादा कमाएं, हमारे निवेशक ज्‍यादा निवेश करें, हमारे निवेशक ज्‍यादा रोजगार पैदा करें – इसको प्रोत्‍साहन देने के लिए हम पूरी तरह से आगे आने को तैयार हैं।

हमारे देश में कुछ ऐसी गलत मान्‍यताओं ने घर कर लिया है। उन मान्‍यताओं से बाहर निकलना पड़ेगा। जो देश की wealth को create करता है, जो देश की wealth creation में contribute करता है, वे सब देश की सेवा कर रहे हैं। हम wealth creator को आशंका की नजरों से न देखें,उनके प्रति हीन भाव से न देखें।आवश्‍यकता है देश में wealth create करने वालों का भी उतना ही मान-सम्‍मान और प्रोत्‍साहन होना चाहिए। उनका गौरव बढ़ना चाहिए और wealth create नहीं होगी तो wealth distribute भी नहीं होगी। अगर wealth distribute नहीं होगी तो देश के गरीब आदमी की भलाई नहीं होगी। और इसलिए तो wealth creation, यह भी हमारे जैसे देश के लिए एक महत्‍वपूर्ण अहमियत रखता है और उसको भी हमें आगे ले जाना है। जो लोगwealth create करने में लगे हैं, मेरे लिए वह भी हमारे देश की wealth हैं। उनका सम्‍मान और उनका गौरव इस कदम को नई ताकत देगा।

मेरे प्‍यारे देशवासियो, आज शांति और सुरक्षा विकास के अनिवार्य पहलू हैं। दुनिया आज असुरक्षा से घिरी हुई है। दुनिया के किसी न किसी भाग में, किसी न किसी रूप में मौत का साया मंडरा रहा है। विश्‍व शांति की समृद्धि के लिए भारत को अपनी भूमिका अदा करनी होगी। वैश्विक परिवेश में भारत मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता है और भारत आतंक फैलाने वालों के खिलाफ मजबूती के साथ लड़ रहा है। विश्‍व के किसी भी कोने में आतंक की घटना मानवतावाद के खिलाफ छेड़ा हुआ युद्ध है। इसलिए यह आह्वान है कि विश्वभर की मानवतावादी शक्तियां एक हों। आतंकवाद को पनाह देने वाले, आतंकवाद को प्रोत्‍साहन देने वाले, आतंकवाद को export करने वाले, ऐसी सारी ताकतों को दुनिया के सामने उनके सही स्‍वरूप में प्रस्‍तुत करते हुए दुनिया की ताकत को जोड़कर आतंकवाद को नष्‍ट करने के प्रयासों में भारत अपनी भूमिका अदा करें, हम यही चाहते हैं।

कुछ लोगों ने सिर्फ भारत को ही नहीं हमारे पड़ोस के देशों को भी आतंकवाद से तबाह करके रखा हुआ है। बांग्लादेश भी आतंकवाद से जूझ रहा है, अफगानिस्‍तान भी आतंकवाद से जूझ रहा है। श्रीलंका के अंदर चर्च में बैठे हुए निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। कितनी बड़ी दर्दनाक बाते हैं और इसलिए आतंकवाद के खिलाफ जब हम लड़ाई लड़ते हैं तब हम इस पूरे भू-भाग की शांति और सुरक्षा के लिए भी हमारी भूमिका अदा करने के लिए भी सक्रिय काम कर रहे हैं।

हमारा पड़ोसी, हमारा एक अच्‍छा मित्र अफगानिस्‍तान चार दिन के बाद अपनी आजादी का जश्‍न मनाएगा और यह उनकी आजादी का 100वां साल है।मैं आज लाल किले से अफगानिस्‍तान के मेरे मित्रों को, जो चार दिन के बाद 100वीं आजादी का उत्‍सव मनाने जा रहें हैं, अनेक-अनेक शुभकानाएं देता हूं।

आतंक और हिंसा का माहौल बनाने वालों को, उनको फैलाने वालों को, भय का वातारवरण पैदा करने वालों को नेस्तानाबूत करना सरकार की नीति, सरकार की रणनीति और उसमें हमारी स्‍पष्‍टता साफ है। हमें कोई हिचकिचाहट नहीं है। हमारे सैनिकों ने, हमारे सुरक्षा बलों ने, सुरक्षा एजेंसियों ने बहुत प्रशंसनीय काम किया है। संकट की घड़ी में भी देश को शांति देने के लिए यूनिफार्म में खड़े हुए सब लोगों ने आज अपने जीवन की आहूति देकर हमारे कल को रोशन करने के लिए जीवन खपाया है। मैं उन सबको salute करता हूं। मैं उनको नमन करता हूं। लेकिन समय रहते Reform की भी बहुत आवश्‍यकता होती है।

आपने देखा होगा हमारे देश में सैन्‍य व्‍यवस्‍था, सैन्‍य शक्ति, सैन्‍य संसाधन – उसके Reform पर लंबे अरसे से चर्चा चल रही है। अनेक सरकारों ने इसकी चर्चा की है। अनेक commission बैठे हैं, अनेक रिपोर्ट आई हैं और सारे रिपोर्ट करीब-करीब एक ही स्‍वर को उजागर करते रहे हैं।19- 20 का फर्क है, ज्‍यादा फर्क नहीं है, लेकिन इन बातों को लगातार कहा गया है। हमारी तीनों सेना – जल, थल, नभ, उनके बीच coordination तो है, हम गर्व कर सकें, ऐसी हमारी सेना की व्‍यवस्‍था है। किसी भी हिन्‍दुस्‍तानी को गर्व हो, ऐसा हो। वे अपने-अपने तरीके से आधुनिकता के लिए भी प्रयास करते हैं।लेकिन आज जैसे दुनिया बदल रही है, आज युद्ध के दायरे बदल रहे हैं, रूप-रंग बदल रहे हैं। आज जिस प्रकार से Technology Driven व्‍यवस्‍थाएं बन रही हैं, तब भारत को भी टुकड़ों में भी सोचने से नहीं चलेगा। हमारी पूरी सैन्‍यशक्ति को एकमुश्‍त होकर एक साथ आगे बढ़ने की दिशा में काम करना होगा। जल, थल, नभ में से एक आगे रहे दूसरा दो कदम पीछे रहे, तीसरा तीन कदम पीछे रहे, तो नहीं चल सकता। तीनों एक साथ एक ही ऊंचाई पर आगे बढ़ें। coordination अच्‍छा हो, सामान्‍य मानव की आशा-आकांक्षाओं के अनुरूप हों, विश्‍व में बदलते हुए युद्ध के और सुरक्षा के माहौल के अनुरूप हो, इन बातों को ध्‍यान में रखते हुए आज मैं लाल किले से एक महत्‍वपूर्ण निर्णय की घोषणा करना चाहता हूं। इस विषय के जो जानकार हैं, वह बहुत लम्‍बे अर्से से इसकी मांग करते रहे हैं।

आज हमने निर्णय किया है कि अब हम Chief of defense – CDS की व्‍यवस्‍था करेंगे और इस पद के गठन के बाद तीनों सेनाओं को शीर्ष स्‍तर पर प्रभावी नेतृत्‍व मिलेगा। हिन्‍दुस्‍तान की सामरिक दुनिया की गति में ये CDS एक बहुत अहम और reform करने का जो हमारा सपना है, उसके लिए बल देने वाला काम है।

मेरे प्‍यारे देशवासियो, हम लोग भाग्‍यवान हैं कि हम एक ऐसे कालखंड में जन्‍मे हैं, हम एक ऐसे कालखंड में जी रहे हैं, हम एक ऐसे कालखंड में हैं जब हम कुछ न कुछ करने का सामर्थ्‍य रखते हैं। कभी-कभी मन में हमेशा रहता है कि जब आजादी की जंग चल रही थी, भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरू जैसे महापुरुष अपने बलिदान के लिए स्‍पर्धा कर रहे थे। महात्‍मा गांधी के नेतृत्‍व में आजादी के दीवाने घर-घर, गली-गली जा करके आजादी के सपनों का साकार करने के लिए देश को जगा रहे थे। हम उस समय नहीं थे, हम पैदा नहीं हुए थे, देश के लिए हमें मरने का मौका नहीं मिला,लेकिन देश के लिए जीने का मौका जरूर मिला है। और ये सौभाग्‍य है कि ये कालखंड ऐसा है, ये वर्ष हमारे लिए बहुत महत्‍वपूर्ण है। पूज्‍य बापू महात्‍मा गांधी, इनकी 150वीं जन्‍म-जयंती का ये पर्व है। ऐसे अवसर हमें अपने कालखंड में मिले, ये अपने-आप में हमारा सौभाग्‍य है। और दूसरा हमारी आजादी के 75 साल, देश की आजादी के लिए मर-मिटने वालों का स्‍मरण हमें कुछ करने की प्रेरणा देता है। इस अवसर को हमें खोने नहीं देना है। 130 करोड़ देशवासियों के हृदय में महात्‍मा गांधी के सपनों के अनुरूप, देश की आजादी के दीवानों के सपनों के अनुरूप आजादी के 75 साल और गांधी के 150 साल, इस पर्व को हमारी प्रेरणा का महान अवसर बना करके हमें आगे बढ़ना है।

मैंने इसी लाल किले से 2014 में स्‍वच्‍छता के लिए बात कही थी। 2019 में कुछ ही सप्‍ताह के बाद, मुझे विश्‍वास है, भारत अपने-आपको open defecation free घोषित कर पाएगा। राज्‍यों ने, गांवों ने, नगर पालिकाओं ने- सबने, मीडिया ने जन-आंदोलन खड़ा कर दिया। सरकार कहीं नजर नहीं आई, लोगों ने उठा लिया और परिणाम सामने हैं।

मेरे प्‍यारे देशवासियो, मैं एक छोटी-सी अपेक्षा आज आपके सामने रखना चाहता हूं। इस 02 अक्‍तूबर को हम भारत को single use plastic, क्‍या इससे देश को मुक्ति दिला सकते हैं। हम निकल पड़ें, टोलियां बना करके निकल पड़े school, college हम सब पूज्‍य बापू को याद करते हुए और घर में प्‍लास्टिक हो – single use plastic या बाहर चौहराएं पर पड़ा हो, गंदी नाली में पड़ा हो, वह सब इकट्ठा करें, नगरपालिकाएं, महानगर-पालिकाएं, ग्राम पंचायत सब इसको जमा करने की व्‍यवस्‍था करें। हम प्‍लास्टिक को विदाई देने की दिशा में 2 अक्‍टूबर को पहला मजबूत कदम उठा सकते हैं क्‍या?

आइए मेरे देशवासियो, हम इसको आगे बढ़ाएं।और फिर मैं Start-up वालों को, Technician को, उद्यमियों को आग्रह करता हूं कि हम इन प्लास्टिक के Recycle के लिये क्या करें? जैसे highways बनाने के लिये प्लास्टिक का उपयोग हो रहा है। ऐसी बहुत-सी विधाएं हो सकती हैं, लेकिन जिसके कारण अनेक समस्याएं पैदा हो रही हैं, उससे मुक्ति के लिये हमें ही अभियान छेड़ना होगा। लेकिन साथ-साथ हमें alternate व्यवस्थाएं भी देनी पड़ेंगी। मैं तो सभी दुकानदानों से आग्रह करूंगा, आप अपने दुकान पर हमेशा Board लगाते हैं, एक Board यह भी लगा दीजिये, कृपा करके हमसे प्लास्टिक की थैली की अपेक्षा न करें। आप अपने घर से कपड़े का थैला लेकर आइए या तो हम कपड़े का थैला भी बेचेंगे, ले जाइये। हम एक वातावरण बनायें। दीवाली पर जहां हम लोगों को भांति-भांति के गिफ्ट देते हैं, क्यों न इस बार और हर बार कपड़े के थैले लोगों को गिफ्ट करें, ताकि कोई कपड़े का थैला लेकर मार्किट जायेगा, तो आपकी company की advertisement भी होगी। आप सिर्फ डायरी देते हैं, तो शायद कुछ नहीं होता है, Calendar देते हैं तो कुछ नहीं होता है, थैला देंगे, तो जहां जायेगा तो थैला आपकी advertise भी करता रहेगा। जूट के थैले हों, मेरे किसानों को मदद करेगा, कपड़े के थैले हों, मेरे किसान को मदद मिलेगी। छोटे-छोटे काम हैं। गरीब-विधवा मां जो सिलाई करती होगी, उसको मदद करेगा यानी हमारा छोटा सा निर्णय भी सामान्य मानव के जीवन में किस प्रकार से बदलाव ला सकता है, हम उस दिशा में काम करें।

मेरे प्यारे देशवासियो Five trillion Dollar economy का सपना हो, स्वावलंबी भारत का सपना हो, महात्मा गांधी के आदर्शों को जीना आज भी प्रस्तुत है। महात्मा गांधी के विचार आज भी स्तुत्य हैं और इसलिये Make in India का जो मिशन हमने लिया है, उसे हमें आगे बढ़ाना है। Made in India Product, हमारी प्राथमिकता क्यों न होनी चाहिए? हम तय करें अपने जीवन में मेरे देश में जो बनता है, मिलता है, वो मेरी प्राथमिकता होगी और हमें तो lucky कल के लिये…. lucky कल के लिये local product पर बल देना है। lucky कल के लिये local, सुहानी कल के लिये local, उज्ज्वल कल के लिये local, जो गांव में बनता है पहले उसके लिये प्राथमिकता होनी चाहिये। वहां नहीं तो तहसील में, तहसील से बाहर जाना पड़े तो, जिले में, जिले के बाहर जाना पड़े तो, राज्य में और मैं नहीं मानता हूं कि उसके बाद अपनी आवश्यकताओं के लिये कहीं जाना पड़ेगा। कितना बड़ा बल मिलेगा? हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कितना बल मिलेगा?, लघु उद्यमियों को कितना बल मिलेगा?, हमारी परंपरागत चीजों को कितना बल मिलेगा? भाइयों-बहनों हमें Mobile phone अच्छा लगता है, हमें whatsapp भेजना अच्छा लगता है, हमें facebook-twitter पर रहना अच्छा लगता है, लेकिन देश की Economy में भी इसके कारण हम मदद कर सकते हैं। जानकारियों के लिये technology का जितना उपयोग है, आधुनिक भारत के निर्माण के लिये भी technologyका उतना ही उपयोग है और हम सामान्य नागरिक Digital payment के लिये क्यूं न चलें? आज हमें गर्व है कि हमारा Rupay card सिंगापुर में चल रहा है, हमारे Rupay card आने वाले दिनों में और देशों में भी चलने वाला है। हमारा एकdigital platform बड़ी मजबूती के साथ उभर रहा है, लेकिन हमारे गांव में, छोटी-छोटी दुकानों में भी, हमारे शहर के छोटे-छोटे मॉल में भी हम क्यूं न Digital payment पर बल दें? आइए ईमानदारी के लिये, Transparency के लिये और देश की Economy को ताकत देने के लिये हम Digital payment को अपनाएं। और मैं तो व्यापारियों को कहूंगा, आप board लगाते हैं ज्यादातर गांव में जाओगे व्यापारियों के board होते हैं – आज नकद-कल उधार। मैं चाहता हूं कि अब तो हमें board लगाया जाना चाहिए Digital payment को हां नकद को ना, यह एक माहौल बनाना चाहिए। मैं Banking क्षेत्र से आग्रह करता हूं, मैं व्यापार जगत के लोगों से आग्रह करता हूं कि आइये हम इन चीजों पर बल दें।

हमारे देश में Middle class, Higher Middle class का bulk बढ़ता जा रहा है, अच्छी बात है। साल में एक-दो बार परिवार के साथ, बच्चों के साथ दुनिया के अलग-अलग देशों में tourist के रूप में भी जाते हैं,बच्‍चों को exposure मिलता है। अच्‍छी बात है। लेकिन मैं आज ऐसे सभी परिवारों से आग्रह करता हूं, देश के लिए जब देश आजादी का 75 साल मना रहा है, देश के लिए इतने महापुरुषों ने बलिदान दिए हैं तब, जिंदगी खपा दी है तब क्‍या आप नहीं चाहते हैं कि आपकी संतान भी हमारे देश की बारीकियों को समझे।कौन मां-बाप नहीं चाहेगा कि हमारी-आपकी आने वाली पीढ़ी भावनात्मक रूप से इस मिट्टी से जुड़े, इसके इतिहास से जुड़े, इसकी हवाओं से, इसके पानी से नई ऊर्जा प्राप्‍त करें। ये हमें प्रयत्‍न पूर्वक करना चाहिए। हम कितने ही आगे बढ़े लेकिन जड़ों से कटना हमें कभी भी बचा नहीं सकता है, बढ़ा नहीं सकता है। और इसलिए जो दुनिया में Tourist के रूप में भले ही जाते हों, क्‍या मैं आपसे एक चीज मांग सकता हूं, लालकिले से देश के नौजवानों के रोजगार के लिए, विश्‍व में भारत की पहचान बनाने के लिए, भारत का सामर्थ्‍य उजागर करने के लिए मेरे प्‍यारे देशवासियो आज मैं आपसे एक छोटी- सी मांग कर रहा हूं – क्या आप तय कर सकते हैं कि 2022 आजादी के 75 साल के पहले हम अपने परिवार के साथ भारत के कम से कम 15 tourist destinations पर जाएंगे। वहां कठिनाईयां होंगी तो भी जाएंगे। वहां अच्छे होटल नहीं होंगे तो भी जाएंगे। कभी-कभी कठिनाईयां भी जिदंगी जीने के लिए काम आती हैं। हम बच्‍चों में आदत डालें यही हमारा देश है। एक बार जाना शुरू करेंगे तो वहां व्‍यवस्‍थाएं विकसित करने वाले लोग भी आने लग जाएंगे। क्‍यों न हमारे देश में 100 ऐसे बढि़या tourist destination develop न करें, क्‍यों न हर राज्‍य में 2 या 5 या 7 top class tourist destination तैयार करें target करके तैयार करें। हम तय करें- हमारे North-east में इतनी प्राकृतिक संपदा है लेकिन कितनी यूनिवसिर्टीज होंगी जो अपना tourist destination north-east को बनाती हैं? ज्‍यादा contribute नहीं करना पड़ता है। आपको 7 दिन, 10 दिन निकालने हैं लेकिन देश के भीतर ही निकालिए।

आप देखिए आप जहां जाकर आएंगे, वहां नई दुनिया खड़ी करके आएंगे, बीज रोपित करके आ जाएंगे और जीवन में आपको भी संतोष मिलेगा। हिंदुस्‍तान के लोग जाना शुरू करें तो दुनिया के लोग भी आना शुरू करेंगे। हम दुनिया में जाएंगे और कहेंगे कि आपने वो देखा है? कोई tourist हमसे पूछेगा कि आप हिन्‍दुस्‍तान से आ रहे है, आपने तमिलनाडू का वो temple देखा है? और हम कहेंगे कि मैं नहीं गया तो वो हमें कहेगा कि भाई कमाल है मैं तो तुम्‍हारे देश में तमिलनाडू के मंदिर देखने चला गया था और तुम यहां देखने आए हो। हम दुनिया में जाएं अपने देश को जानने के बाद जाएं। हम इतना काम कर सकते हैं।

मैं, मेरे किसान भाईयों से आज आग्रह करना चाहता हूं। आपसे मैं कुछ मांगना चाहता हूं। मेरे किसान के लिए, मेरे देशवासियों के लिए, ये धरती हमारी मां हैं। भारत माता की जय बोलते ही हमारे भीतर ऊर्जा का संचार होता है।वंदे मातरम बोलते ही इस धरती मां के लिए खप जाने की प्रेरणा मिलती है। एक दीर्घकालिक इतिहास हमारे सामने आता है लेकिन क्‍या कभी हमने इस धरती मां के स्‍वास्‍थ्‍य की चिंता की है। हम जिस प्रकार से chemical का उपयोग कर रहे हैं chemical fertilizer का उपयोग कर रहे हैं pesticides का उपयोग कर रहे हैं। हम हमारी इस धरती मां को तबाह कर रहे हैं। इस मां के संतान के रूप में, एक किसान के रूप में मुझे मेरी धरती मां को तबाह करने का हक नहीं है। मेरी धरती मां को दुखी करने का हक नहीं है, मेरी धरती मां को बीमार बना देने का हक नहीं है।

आइए, आजादी के 75 साल होने जा रहे हैं।पूज्‍य बापू ने हमें रास्‍ता दिखाया है क्‍या हम 10 percent, 20 percent, 25 percent अपने खेत में यह chemical fertilizer को कम करेंगे, हो सके तो मुक्तिकर अभियान चलाएंगे। आप देखिए देश की कितनी बड़ी सेवा होगी। हमारी धरती मां को बचाने में, आपका कितना बड़ा योगदान होगा। वन्‍दे मातरम् कहकरजो फांसी के तख्‍त पर चढ़ गया था, उसके सपनों को पूरा करने के लिए, यह धरती मां को बचाने का आपका काम, उसका भी आशीर्वाद प्राप्‍त करेगा, जो कभी फांसी के तख्‍त पर चढ़ करके वंदे मातरम् कहा करता था। इसलिए मैं आपसे आग्रह करता हूं और मुझे विश्‍वास है कि मेरे देशवासी यह करके रहेंगे। मेरे किसान मेरी इस मांग को पूरा करेंगे यह मुझे पूरा विश्‍वास है।

मेरे प्‍यारे भाइयो-बहनो, हमारे देश के professionals उनकी आज पूरी दुनिया में गूंज है। उनके सामर्थ्‍य की चर्चा है। लोग उनका लोहा मानते हैं। Space हो, technology हो, हमने नये मुकाम प्राप्‍त किए हैं। हमारे लिए खुशी की बात है कि हमारा चंद्रयान तेजी से चांद के उस छोर की ओर आगे बढ़ रहा है, जहां अब तक कोई नहीं गया है। हमारे वैज्ञानिकों की सिद्धि है।

उसी प्रकार से खेल के मैदानों में हम बहुत कम नजर आते थे। आज दुनिया के खेल के मैदानों में मेरे देश के 18-20 साल, 22 साल के बेटे-बेटियां हिन्‍दुस्‍तान का तिरंगा झंडा फहरा रही हैं। कितना गर्व होता है। देश के खिलाड़ी देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

मेरे देशवासियो, हमें हमारे देश को आगे बढ़ाना है। हमें हमारे देश में बदलाव लाना है। हमें देश में नई ऊंचाइयों को पार करना है और मिल-जुलकर करना है। सरकार और जनता को मिलकर करना है। 130 करोड़ देशवासियो ने करना है। देश का प्रधानमंत्री भी आपकी की तरह इस देश का एक बालक है, इस देश का एक नागरिक है। हम सबको मिलकर करना है।

चाहे आने वाले दिनों में गांव में डेढ़ लाख wellness center बनाने होंगे, health center बनाने होंगे, हर तीन लोकसभा के बीच एक medical college हमारे नौजवानों को डॉक्‍टर बनने का सपना पूरा कराना है। दो करोड़ से अधिक गरीब लोगों के लिए घर बनाने हैं। हमें 15 करोड़ ग्रामीण घरों में पीने का पानी पहुंचाना है। सवा लाख किलोमीटर गांव की सड़के बनानी हैं। हर गांव को Broadband connectivity, optical fiber network से जोड़ना है। 50 हजार से ज्‍यादा नये start up का जाल बिछाना है। अनेक सपनों को ले करके आगे बढ़ना है।इसलिए भाइयो-बहनो, हमें देशवासियों ने मिल करके, सपनों को ले करके देश को आगे बढ़ाने के लिए चलना है और आजादी के 75 साल इसके लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।

मैं जानता हूं कि लाल किले की प्राचीर पर समय की भी एक सीमा है। 130 करोड़ देशवासी उनके सपने भी हैं, 130 करोड़ देशवासियों की अपनी चुनौतियां भी है। हर सपने का, हर चुनौती का अपना महत्‍व भी है। कोई अधिक महत्‍वपूर्ण है कोई कम महत्‍पूर्ण है ऐसा नहीं है। लेकिन बारिश का मौसम है, लंबा बोलते-बोलतेspeech पूरे होने की संभावना नहीं है और इसलिए हर issue का अपना महत्व होने के बावजूद जितनी चीजें आज कह पाया हूं और जो नहीं कह पाया हूं वो भी महत्‍वपूर्ण हैं। उन बातों को लेकर हम आगे बढ़ें, देश को हमें आगे बढ़ाना है।

आजादी के 75 साल, गांधी के 150 साल और भारत के संविधान के 70 साल हो गए हैं। बाबा साहेब अम्‍बेडकर के सपने और यह वर्ष महत्‍वपूर्ण है, गुरू नानक देव जी का 550वां पर्व भी है। आइये, बाबा साहेब अम्‍बेडकर, गुरू नानक देव जी की शिक्षा को ले करके हम आगे बढ़ें और एक उत्‍तम समाज का निर्माण, उत्‍तम देश का निर्माण, विश्‍व की आशाओं-अपेक्षाओं के अनुरूप भारत का निर्माण हमें करना है।

मेरे प्‍यारे भाइयो-बहनो हम जानते हैं कि हमारे लक्ष्‍य हिमालय जितने ही ऊंचे हैं, हमारे सपने अनगिनत असंख्‍य तारों से भी ज्‍यादा हैं लेकिन हम ये भी जानते हैं कि हमारे हौसलों के उड़ान के आगे आसमान भी कुछ नहीं है।यह संकल्‍प हैं, हमारा सामर्थ्‍य हिन्‍द महासागर जितना अथाह है, हमारी कोशिशें गंगा की धारा जितनी पव‍ित्र हैं, निरंतर हैं और सबसे बड़ी बात हमारे मूल्‍यों के पीछे हजारों साल की पुरानी संस्‍कृति, ऋषियों की मुनियों की तपस्‍या, देशवासियों का त्‍याग, कठोर परिश्रम – यह हमारी प्रेरणा है।

आइये, हम इन्‍हीं विचारों के साथ, इन्‍हीं आदर्शों के साथ, इन्‍हीं संकल्‍पों के साथ सिद्धि प्राप्‍त करने के लक्ष्‍य को ले करके हम चल पड़ें नया भारत निर्माण करने के लिए, अपनी जिम्‍मेदारियों को निभाते हुए, नया आत्‍मविश्‍वास, नया संकल्‍प, नया भारत बनाने की जड़ी-बूटी है। आइये, हम मिल करके देश को आगे बढ़ाएं। इसी एक अपेक्षा के साथ, मैं फिर एक बार देश के लिए जीने वाले, देश के लिए जूझने वाले, देश के लिए मरने वाले, देश के लिए कुछ कर-गुजरने वाले हर किसी को नमन करते हुए मेरे साथ बोलिये –

‘जय हिन्‍द’।

‘जय हिन्‍द’।

भारत माता की जय,

भारत माता की जय,

वन्‍दे मातरम।

वन्‍दे मातरम।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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