अर्जुन के बारे में ये बातें क्या आप जानते हैं?

महाभारत महान योद्धाओं से भरा पड़ा है, अगर हम ये आंकलन करना चाहे की कौन सबसे महान योद्धा था महाभारत का तो परमपिता “नारायण” का मुकाबला कोई नहीं कर सकता, अतः श्री कृष्णा को हम इस तुलना से दूर ही रखते हैं। महाभारत को पढ़ने के बाद ये पता चलता है की श्री कृष्णा के बाद सबसे महान योद्धा थे “अर्जुन”। तो आइये जानते हैं अर्जुन के उस विशाल पराक्रम के बारे में जिसकी वजह से अर्जुन को आज भी याद किया जाता है:

  1. महाभारत के हर अध्याय के प्रारम्भ में एक श्लोक लिखा हुआ है,

    नारायणं नमस्कृत्य नरम चौव नारात्त्मम।
    देवीम सरस्वतीम व्यासम ततो जयमुदिरएत।


    अर्थात: श्री नारायण,सभी पुरुषों में श्रेष्ठ – नर, देवी सरस्वती और महर्षि व्यास इन सभी को नमस्कार करके की इस “जय” नमक ग्रन्थ को पढ़ा जाना चाहिए।

    महाभारत का एक नाम ” जयसंहिता” भी है।
  2. महाभारत में बहुत सी जगह पर इस बात का वर्णन है की अर्जुन, सभी पुरषों में श्रेष्ठ – नर का ही अवतार थे।
  3. जब गुरु द्रोणाचार्य सभी विद्यार्थियों की परिक्षा ले रहे थे तो उस परीक्षा में केवल अर्जुन ही थे जो सफल हो पाए थे, शेष सभी को असफलता देखनी पड़ी थी।
  4. खांडव वन दाह के समय अर्जुन ने श्री कृष्णा के साथ मिलकर अग्नि देव की कार्य सिद्धि के लिए इंद्रा देव से युद्ध किया था, और देवराज इंद्रा को हराया भी था। इसी समय अग्नि देव ने प्रस्सन होकर अर्जुन को एक गांडीव और दो अक्षय तरकश भी प्रदान किये थे।
  5. द्रौपदी के स्वयमवर के समय, स्वयंवर की कठिन शर्तों को अर्जुन ने ही पूरा किया था और तत्पश्चात द्रौपदी से विवाह भी किया था।
  6. स्वयंवर के पश्चात् जब ईष्र्या वश दुर्योधन आदि ने महाराज द्रुपद को मारने की चेष्टा की तो अर्जुन और भीम ने सभी राजाओं से युद्ध कर पांचाल नरेश द्रुपद की रक्षा भी की थी।
  7. जरासंध से लड़ने के लिए श्री कृष्णा अपने साथ भीम को अर्जुन को ही लेकर गए थे,और मल युद्ध के लिए चुनौती देते समय उन्होंने जरासंध को कहा था की वो तीनो में से किसी एक को अपने साथ युद्ध के लिए चुन सकता है। श्री कृष्ण को अर्जुन के बाहुबल पर अपनी और भीम की शक्ति के समान ही विश्वास था।
  8. अर्जुन ने निवात कवच नामक राक्षशों को परास्त किया था जिन्हे देवता भी परास्त नहीं कर सके थे।
  9. अर्जुन ने वनवास के समय गंधर्वों को भी परास्त किया था, और उस युद्ध के पश्चात् गन्धर्व राज “चित्रसेन” अर्जुन के मित्र बन गए थे।
  10. अर्जुन ने गंधर्वों के बंधन से दुर्योंशन,कर्ण और दुःशासन को भी मुक्त कराया था।
  11. अर्जुन के अंदर नयी नयी चीज़ें सिखने की लालसा रहती थी, उन्होंने नृत्य कला भी सीखी थी और किरात वेषधारी भगवान् शिव से युद्ध किया था एवं भगवान् शिव को प्रस्सन करके “पशुपति” अस्त्र प्राप्त किया था।
  12. विराट नगर के युद्ध में अर्जुन ने अकेले ही दुर्योधन,कर्ण, दुःशासन, पितामह भीष्म और गुरु द्रोणाचार्य को परास्त किया था।
  13. अर्जुन एक अच्छे गुरु भी थे, अर्जुन ने अभिमन्यु समेत अन्य बालकों को भी धनुर्विद्या सिखाई थी।
  14. जयद्रध के वध के दिन अर्जुन ने अकेले ही हज़ारों सैनिकों का वध कर दिया था।
  15. अर्जुन की भुजाओं में अपार बल था, बल इतना था की अर्जुन के हाथ में साधारण धनुष टूट जाता था, और अग्नि देव द्वारा दिए गए गांडीव में इतना बल था की अर्जुन के अलावा उसमे सिर्फ श्री कृष्णा और भीम ही प्रत्यंचा चढ़ा सकते थे।
  16. अर्जुन दोनों हाथों से धनुष चलने में निपुण थे, इसलिए उन्हें “सव्यसाची” भी कहा जाता था, और हर युद्ध में विजय होने के कारन उनका नाम विजय भी था।
  17. अर्जुन कभी अधर्म के मार्ग में नहीं चले, महानता का एक परिचय यह भी है।
  18. अर्जुन ने स्वर्ग में उर्वशी द्वारा दिए गए विवाह प्रस्ताव को भी अस्वीकार किया था, क्यूंकि अर्जुन के पूर्वज उर्वशी और महर्षि पुरुरवा की संतान थे और इसी कारन अर्जुन ने उर्वशी को माता की संज्ञा दी थी। जिसके फलस्वररूप अर्जुन को एक वर्ष तक नपुंसक बनकर अपना जीवन बिताना पड़ा।

संपूर्ण महाभारत में ऐसे बहुत से वृत्तांत हैं जिनसे ये सिद्ध होता है अर्जुन न सिर्फ अथाह पराक्रमी थे अपितु एक अच्छे गुरु, भाई और दयालु व्यक्तित्व रखने वाले थे, अतः ये महाभारत के सबसे महान योद्धा “अर्जुन” ही थे।

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