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Beti Bachao Beti Padhao – बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ निबंध सहित

Beti Bachao Beti Padhao Yojana – हमारे देश (भारत) में अनेकों प्रकार की परम्पराओं का चलन है, कुछ परम्पराओं को पारम्परिकता का रूप दिया जाता है तो कुछ परम्पराओं में परिवर्तन निंदनीय है। भारत में ऐसी अनेकों परम्पराएं रही हैं जहाँ पे महिलाओं के शोषण की ओर ध्यान केंद्रित होता है, जिनमें सटी प्रथा, दहेज़ प्रथा जैसी प्रथाएं प्रचलित हैं। रूढ़िवादी विचारधारा होने की वजह से आज भी अनेक स्थानों पर महिलाओं के साथ व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया है। यही कारण है कि बहुत से स्थानों पर जन्म के साथ बेटियों को मृत्यु का आलिंगन करा दिया जाता है। जिस वजह में भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाओं का औसत 10:7 था।समाज की इन कुरीतियों को दूर करने एवं बेटियों के जीवन को सुरक्षित रखने हेतु सरकार की तरफ से एक योजना का सञ्चालन हुआ जिसे “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” “Beti Bachao Beti Padhao” का नाम दिया गया। आइये जानते हैं इस योजना (Beti Bachao Beti Padhao Yojana) के प्रारम्भ, उद्देश्य और क्यों इसकी आवश्यकता पड़ी के बारे में:

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का प्रारम्भ (Beti Bachao Beti Padhao Yojana Start Date):

देश के माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 24 जनवरी 2015 को Beti Bachao Beti Padhao Yojana (बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना) की हरियाणा के पानीपत में नींव लगाकर शुरू की। हमारे भारतीय समाज में हो रहे महिलाओं के मानवाधिकारों के हनन और महिलाओं के प्रति होने वाले शोषण को देखते हुए प्रधानमंत्री जी ने Beti Bachao Beti Padhao (बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ) कार्यक्रम की शुरुआत करी और समाज में सभी तबके में महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का कार्य किया है। बेटियों को भी बेटों जितना हक देकर उन्हें एक समान जीवन जीने की इस मुहिम के तहत सबसे पहले बेटियों को बचाना है और उसके बाद उन्हें पढ़ाना है ना की बेटों की चाह में बेटियों की हत्या कर देनी है। Beti Bachao Beti Padhao (बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ) मुहिम की देखरेख तीन भारतीय मंत्रालयों द्वारा की गई है जिनमें “महिला और बाल विकास मंत्रालय” ,”स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय” तथा “मानव संसाधन मंत्रालय” शामिल हैं। इस योजना को भारतीय जनगणना के अनुसार निम्न लिंगानुपात वाले 100 जिलों से प्रारम्भ किया गया था।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना क्या है? Beti Bachao Beti Padhao Yojana:

भारत में आज भी ऐसे अनेकों स्थान है जहाँ पर दहेज़ प्रथा के नाम बेटी के साथ साथ बेटी के माता पिता को भी उत्पीड़ित किया जाता है, और इस उत्पीड़न से बचने के लिए यदि किसी भी घर में बेटी का जन्म होता है तो उसे जीवन देने की बजाय उसे मृत्यु दे दी जाती है। अनेकों स्थान पर साक्षरता के अभाव में बेटियां अपने सपनो को पूरा काने में असमर्थ है, इसके अलावा क्यूंकि बेटियों को शिक्षा के अभाव में रखा जाता है जिस कारण वे कभी भी अपने ऊपर होने वाले शोषण के खिलाफ आवाज़ नहीं उठा पाती है, और यही कारण है की पुरुषों की तुलना में महिलाओं का लिंगानुपात 2001 की जनगणना के अनुसार प्रति हज़ार पुरुषों पर 927 महिलाओं का था, जो 2011 में बढ़कर 943 हो गया था। इन सभी कुरीतियों को दूर करने हेतु और समाज में महिलाओं को सामान स्थान देने हेतु सर्कार ने इस योजना को प्रारम्भ किया है, इसमें महिलाओं की शिक्षा, और महिलाओं को पुरुषों के सामान की अधिकार देने पर ज़ोर दिया गया है।

Beti Bachao Beti Padhao (बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ) अभियान के अंतर्गत प्रधान मंत्री ने देश के 100 ऐसे जिलों को चुना है जहां पर महिला लिंगानुपात पुरुष लिंग अनुपात से बहुत ही कम है। इन 100 जिलों में लोगों को बेटियों को बेटों की तरह ही एक समान हक देने और उनकी जन्म से पहले हत्या ना कर देने क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस योजना के तहत सभी गांव वालों को एक साथ सामूहिक रूप से बुलाकर उनको जागरूक किया जा रहा है महिला सशक्तिकरण के लिए। इस अभियान के तहत सभी माता पिता को अपनी बेटियों को किसी भी हालत में शिक्षा कीओर अग्रसर करना है और अगर आप आर्थिक दृष्टि से कमजोर है तो सरकार की ओर से आपको मदद प्रदान की जाएगी।

योजना का उद्देश्य:

घरेलु हिंसा, दहेज़ उत्पीड़न, बलात्कार, अत्याचार,यौन शोषण और भ्रूण हत्या जैसी घिनौनी समस्याएं हमारी बेटियों के जीवन से जीने के लक्ष्य को समाप्त का कर रही थी। Beti Bachao Beti Padhao (बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ) अभियान के बाद अब बालिका शिक्षा और विकास पर काफी जोर दिया जा रहा है जिससे बालिकाओं को सरकारी विद्यालयों के द्वारा मुफ्त में शिक्षा दी जा रही है। ऐसे बहुत सारे राज्य/जिले हैं जिन्होंने अपने स्तर पर बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और बालिकाओं  को बचाने के लिए राज्य/ जिला कार्य बल और ब्लॉक कार्यबल जैसे अनुसंधान गठित किये हैं, और इन संगठनों की बैठक सभी गांव और जिलों के लोगों के साथ ही की जाती हैं और लोगों में जागरूकता फैलाई जाती है।

सरकार की ओर से Beti Bachao Beti Padhao Yojana (बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना) के उद्देश्यों को निम्न प्रकार से विभाजित किया गया है:

1. बालिकाओं की शिक्षा को सुनिश्चित करना: इस योजना का अतिमहत्वपूर्ण भाग है बालिकाओं एवं उनके अभिभावकों को शिक्षा के लिए जागरूक करना। ऐसा देखा गया है की शिक्षा के अभाव में बालिकाएं अपने ऊपर होने वाले किसी भी अत्याचार या शोषण के प्रति आवाज़ नहीं उठा पाती।

2. लड़कियों को सामाजिक और वित्तीय रूप से स्वतंत्र बनाना: शिक्षा के अभाव के कारण लडकियां वित्तीय रूप से किसी दूसरे व्यक्ति पर आश्रित रहती है और यही कारण है की शोषण होने के बाद भी वे आवाज़ उठाने का प्रयास नहीं करती।

3. बालिकाओं को शोषण से बचाना व उन्हें सही/गलत के बारे में अवगत कराना।

4. इस योजना का उद्देश्य बेटियों के अस्तित्व को बचाना एवं उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।

5. इस अभियान के तहत  मुख्य रूप से लड़के एवं लड़कियों के लिंग अनुपात में ध्यान केन्द्रित किया गया है, ताकि महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव को समाप्त किया जा सके।

6. महिलाओं एवं बेटियों की शिक्षा व उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देना।

7. बालिकाओं के प्रति हो रहे अत्याचारों और अपराधों की रोकथाम।

अभियान, सफल और असफल?

जैसा भी हम जान ही चुके हैं, सरकार द्वारा अनेकों ऐसे प्रयास किए जाते हैं जहाँ पर समाज में होने वाली बुराइयों को समाप्त करने का पर्यटन किया जाता है, परन्तु सिर्फ सरकार के प्रयास कुरीतियों को समाप्त नहीं कर सकते, हमें अपनी ओर से भी सरकार के क़दमों में अपनी भागीदारिता देनी होगी, जिससे सर्कस के इन प्रयासों को सफल बनाया जा सके। इस योजना के प्रारम्भ होने के बाद से योजना को देश की जनता का समर्थन मिला और इसी वजह से यह योजना काफी हद तक सफल भी हुयी है।

Beti Bachao Beti Padhao Yojana (बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना) को प्रारम्भ करने के बाद यह पूरे देश में काफी तेजी से विस्तारित होने लगी। लोग अपनी बेटियों के साथ सेल्फी खींच कर प्रधान मंत्री मोदी को भेज रहे हैं। भारत सरकार का यह परिवर्तन कारी बदलाव महिला सशक्तिकरण के लिए धीरे-धीरे समाज के अंदर बेटियों को उनकी एक अलग पहचान दिला रहा है। आज हम देख सकते हैं महिलाएं हर क्षेत्र में अपने कौशल दिखा रही हैं। प्रतिभा को थोड़ा सा निखारा गया तो कल्पना चावला ने आसमान की बुलंदियों को छू लिया तो किरण बेदी ने जुर्म को खत्म करने का जिम्मा संभाला। आज मनोरंजन जगत, मीडिया, शिक्षा ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जहाँ बेटियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा ना मनवाया हो। बेटियां होना कोई अभिशाप नहीं है बल्कि बेटियां होना गर्व की बात है।इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर महीने  रेडियो के जरिए

‘मन की बात” से पूरे भारत के लोगो से बेटियों के विकास को लेकर बात करते हैं। धीरे -धीरे यह योजना देश के सभी राज्यों और जिलों में विस्तारित होकर अपनी पकड़ बना रही हैं और गांव – गांव में जाकर शिक्षण के अंदर नुक्कड़ नाटक द्वारा बेटियों की महत्वता को लोगों के सामने बताया जा रहा है।

देश के 100 जिलों में चल रही बीजेपी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” के अच्छे नतीजों से उत्साहित अब इसे देश के 61 और पिछड़े जिलों में लागू करने जा रही है। इन 61 जिलों में 11 राज्यों को चुना गया है,जो कि इस प्रकार है –

1. दिल्ली – उतर पूर्वी और दक्षिणी पूर्वी।

2. उत्तर प्रदेश – अलीगढ़,इटावा , फिरोजाबाद, हमीरपुर, सहारनपुर,महोबा, फर्रुखाबाद जालौन, इटा, बिजनौर और मैनपुरी शामिल है।

3. मध्यप्रदेश – रेवा और टीकमगढ़।

4. हरियाणा – गुड़गांव, फरीदाबाद ,हिसार, फतेहाबाद पंचकूला, सिरसा, पलवल ,जिंद।

5. महाराष्ट्र – हिंगोली ,सोलापुर,नाशिक ,लातूर ,पनाभी और पुणे।

6. जम्मू कश्मीर के 10 जिले – श्रीनगर, बारामुला, शोंपिया, उधमपुर, बांदीपुर, कुलगाम, राजरी, सांबा, गंधेर बल और कुपवाड़ा शामिल है।

7. गुजरात – आंनद,अमरेली ,भानगर और पाटन।

8. हिमाचल प्रदेश – कांगड़ा और हमीरपुर।

9. पंजाब – बठिंडा ,लुधियाना, हसियापुर , फरीदकोट,भगत सिंह नगर, मोगा,रूपनगर, कपूरथला, जलंधेर।

10. राजस्थान – जैसलमेर जोधपुर हनुमानगढ़ और टोंक शामिल है।

11. उत्तराखंड – देहरादून ,चमोली और हरिद्वार शामिल है।

देश के इन सभी अलग-अलग राज्यों के 61 जिलों में सरकार का केवल एक ही लक्ष्य है लिंगानुपात को कम करना और लोगों के प्रति बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के प्रति जागरूकता पैदा करना है।

बेई बचाओ अभियान को सफल बनाने में और इसके विस्तार के लिए कुछ मानक और रणनीतियों का निर्धारण किया गया था, जो कुछ निम्न प्रकार से हैं:

1. बालिकाओं की शिक्षा को विस्तारित करने के लिए एक सामाजिक आंदोलन और समान भाव को विक्सित करने के लिए जागरुकता अभियान का कार्यान्वय करना।

2. इस योजना को सार्वजनिक विमर्श का विषय बनाना और उसे संशोधित करने से ही कार्य को सही रूप से संपन्न करना।

3. जनगणना के अनुसार निम्न लिंगानुपात वाले राज्यों / जिलों की पहचान कर, ध्यान देते हुए गहन और एकीकृत कार्रवाई करना।

4. विकासशील एवं सामाजिक परिवर्तन लाने हेतु महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में स्थानीय महिला संगठनों/युवाओं की सहभागिता लेते हुए पंचायती राज्य संस्थाओं, स्थानीय निकायों और जमीनी स्तर पर जुड़े कार्यकर्ताओं को प्रेरित एवं प्रशिक्षित करते हुए सामाजिक परिवर्तन के प्रेरक की भूमिका में ढालना।

5. राज्य / ज़िला / ब्लॉक के स्तर पर अंतर-क्षेत्रीय और अंतर-संस्थागत समायोजन को सक्षम करना।

हमारे समाज के बेहतर कल्याण के लिए महिलाओं का शिक्षित होना अति आवश्यक है, उनके शिक्षित होने पर ही समाज सुचारु रूप से चल पाएगा साथ ही साथ महिलाओं को जीवन में उन्नति प्राप्त होगी। दहेज़ प्रथा, दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा जैसी घटनाएं समाज में तभी से कम हुयी हैं जब से बेटियों को अच्छी शिक्षा का अवसर दिया गया साथ ही साथ उन्हें अपने लिए सही जीवन सुनने का अवसर और हक़ दिया गया हालांकि सरकार के अथक प्रयासो के बाद भी समाज में बलात्कार जैसी कुरीति काम होने का नाम नहीं ले रही।ये बात हम सभी को समझनी होगी कि सरकार और प्रणाली हमें सिर्फ बेटियों को बचाये रखने और उनके आगे बढ़ने का माध्यम दे सकती है, परन्तु इस समाज को बेटियों और महिलाओं के लिए जीने लायक बनाना हम सभी का दायित्व है।

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Beti Bachao Beti Badhao Essay in Hindi

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध 1 (100 शब्द) – Beti Bachao Beti Badhao Essay in Hindi

भारतीय समाज में छोटी बच्चियों के खिलाफ भेदभाव और लैंगिक असमानता की ओर ध्यान दिलाने के लिये Beti Bachao Beti Padhao (बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ) नाम से प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा एक सरकारी सामाजिक योजना की शुरुआत की गयी है। हरियाणा के पानीपत में 22 जनवरी 2015, बुधवार को प्रधानमंत्री के द्वारा इस योजना की शुरुआत हुयी। ये योजना समाज में लड़कियों के महत्व के बारे लोगों को जागरुक करने के लिये है। कन्या भ्रूण हत्या को पूरी तरह समाप्त करने के द्वारा लड़कियों के जीवन को बचाने के लिये आम लोगों के बीच ये जागरुकता बढ़ाने का कार्य करेगी तथा इसमें एक लड़के की भाँति ही एक लड़की के जन्म पर खुशी मनाने और उसे पूरी जिम्मेदारी से शिक्षित करने के लिये कहा गया है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध 2 (150 शब्द) – Beti Bachao Beti Badhao Essay in Hindi

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ (इसका अर्थ है लड़कियों को बचाना और शिक्षित करना) योजना की शुरुआत भारतीय सरकार द्वारा 2015 के जनवरी महीने में हुई। इस योजना का मकसद भारतीय समाज में लड़कियों और महिलाओं के लिये कल्याणकारी कार्यों की कुशलता को बढ़ाने के साथ-साथ लोगों के बीच जागरुकता उत्पन्न करने के लिये भी है। इस योजना के लिये 100 करोड़ की शुरुआती पूँजी की आवश्यकता थी।

इस योजना की शुरुआत की जरुरत 2001 के सेंसस के आँकड़ों के अनुसार हुई, जिसके तहत हमारे देश में 0 से 6 साल के बीच का लिंगानुपात हर 1000 लड़कों पर 927 लड़कियों का था। इसके बाद इसमें 2011 में और गिरावट देखी गयी तथा अब आँकड़ा 1000 लड़कों पर 918 लड़कियों तक पहुँच चुका था। 2012 में यूनिसेफ द्वारा पूरे विश्वभर में 195 देशों में भारत का स्थान 41वाँ था इसी वजह से भारत में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के प्रति लोगों की जागरुकता जरुरी हो गयी। ये योजना कन्या भ्रूण हत्या को जड़ से मिटाने के लिये लोगों से आह्वन भी करती है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध 3 (200 शब्द) – Beti Bachao Beti Badhao Essay in Hindi

देश में छोटी बच्चियों को सशक्त करने के साथ-साथ समाज में लड़कियों की  गिरती संख्या के अनुपात के मुद्दे को बताने के लिये एक उद्देश्यपूर्णं ढंग से एकराष्ट्रव्यापी योजना की शुरुआत हुई जिसका नाम Beti Bachao Beti Padhao (बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ) है। हरियाणा के पानीपत में 22 जनवरी 2015 को भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सफलतापूर्वक इस योजना का आरंभ हुआ। लड़कियों के प्रति लोगों की विचारधारा में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ ही ये योजना भारतीय समाज में लड़कियों की महत्ता की ओर भी इंगित करता है। भारतीय समाज में लड़कियों के प्रति लोगों की मानसिकता बहुत क्रूर हो चुकी है। ऐसे लोगों का मानना है कि लड़कियाँ पहले परिवार के लिये बोझ होती है और फिर पति के लिये तथा ये सिर्फ लेने के लिये होती है देने के लिये नहीं।

हालाँकि ये सच नहीं है, दुनिया की आधी जनसंख्या लगभग महिलाओं की है इसलिये वो धरती पर जीवन के अस्तित्व के लिये आधी जिम्मेदार होती है। लड़कियों या महिलाओं को कम महत्ता देने से धरती पर मानव समाज खतरे में पड़ सकता है क्योंकि अगर महिलाएँ नहीं तो जन्म नहीं। लगातार प्रति लड़कों पर गिरते लड़कियों का अनुपात इस मुद्दे की चिंता को साफतौर पर दिखाता है। इसलिये, उन्हें गुणवत्तापूर्णं शिक्षा प्रदान कराने के साथ, छोटी बच्ची की सुरक्षा को पक्का करना ,लड़कियों को बचाना, कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिये इस योजना की शुरुआत की गयी है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध 4 (300 शब्द) – Beti Bachao Beti Badhao Essay in Hindi

हरियाणा के पानीपत में 22 जनवरी 2015 को पीएम नरेन्द्र मोदी के द्वारा Beti Bachao Beti Padhao (बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ) के नाम से एक सरकारी योजना की शुरुआत हुई। भारतीय समाज में लड़कियों की दयनीय दशा को देखते हुए इस कार्यक्रम की शुरुआत की गयी। आँकड़ों के अनुसार, 1991 में (0-6 वर्ष के उम्र के) हर 1000 लड़कों पर 945 लड़कियाँ है, जबकि 2001 में लड़कियों की संख्या 927 पर और दुबारा 2011 में इसमें गिरावट होते हुए ये 1000 लड़कों पर 918 पर आकर सिमट गयी। अगर हम सेंसस के आँकड़ों पर गौर करें तो पाएँगे कि हर दशक में लड़कियों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज हुई है। ये धरती पर जीवन की संभावनाओं के लिये भी खतरे का निशान है। अगर जल्द ही लड़कियों से जुड़े ऐसे मुद्दों को सुलझाया नहीं गया तो आने वाले दिनों में धरती बिना नारियों की हो जायेगी और तथा कोई नया जन्म नहीं होगा।

देश में लड़कियों के बुरे आँकड़ों को ध्यान में रखते हुए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने Beti Bachao Beti Padhao Yojana (बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना) की शुरुआत की। ये बेहद प्रभावकारी योजना है जिसके तहत लड़कियों की संख्या में सुधार, इनकी सुरक्षा, शिक्षा, कन्या भ्रूण हत्या का उन्मूलन, व्यक्तिगत और पेशेवर विकास आदि का लक्ष्य पूरे देश भर में है।  इसे सभी राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों में लागू करने के लिये एक राष्ट्रीय अभियान के द्वारा देश (केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय, स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय) के 100 चुनिंदा शहरों में इस योजना को लागू किया गया है। इसमें कुछ सकारात्मक पहलू ये है कि ये योजना लड़कियों के खिलाफ होने वाले अपराध और गलत प्रथाओं को हटाने के लिये एक बड़े कदम के रुप में साबित होगा। हम ये आशा करते हैं कि आने वाले दिनों में सामाजिक-आर्थिक कारणों की वजह से किसी भी लड़की को गर्भ में नहीं मारा जायेगा, अशिक्षित नहीं रहेंगी, असुरक्षित नहीं रहेंगी, बलात्कार नहीं होगा आदि। अत: पूरे देश में लैंगिक भेदभाव को मिटाने के द्वारा बेटी-बचाओ बेटी-पढ़ाओ योजना का लक्ष्य लड़कियों को आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह से स्वतंत्र बनाने का है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध 5 (400 शब्द) – Beti Bachao Beti Badhao Essay in Hindi

पूरे भारत में लड़कियों को शिक्षित बनाने और उन्हें बचाने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने Beti Bachao Beti Padhao (बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ) नाम से लड़कियों के लिये एक योजना की शुरुआत की। इसका आरंभ हरियाणा के पानीपत में 22 जनवरी 2015, गुरुवार को हुआ। पूरे देश में हरियाणा में लिंगानुपात 775 लड़कियाँ पर 1000 लड़कों का है जो बेटीयों की दयनीय स्थिति को दर्शाता है इसी वजह से इसकी शुरुआत हरियाणा राज्य से हुई। लड़कियों की दशा को सुधारने के लिये पूरे देश के 100 जिलों में इसे प्रभावशाली तरीके से लागू किया गया है, सबसे कम स्त्री-पुरुष अनुपात होने की वजह से हरियाणा के 12 जिलों (अंबाला, कुरुक्षेत्र, रिवारी, भिवानी, महेन्द्रगण, सोनीपत, झज्जर, रोहतक, करनाल, यमुना नगर, पानीपत और कैथाल) को चुना गया।

लड़कियों की दशा को सुधारने और उन्हें महत्व देने के लिये हरियाणा सरकार 14 जनवरी को ‘बेटी की लोहड़ी’ नाम से एक कार्यक्रम मनाती है। इस योजना का उद्देश्य लड़कियों को सामाजिक और आर्थिक रुप से स्वतंत्र बनाना है जिससे वो अपने उचित अधिकार और उच्च शिक्षा का प्रयोग कर सकें। आम जन में जागरुकता फैलाने में ये मदद करता है साथ ही महिलाओं को दिये जाने वाले लोक कल्याणकारी सेवाएँ की कार्यकुशलता को भी बढ़ाएगा। अगर हम 2011 के सेंसस रिपोर्ट पर नजर डाले तो हम पाएँगे कि पिछले कुछ दशकों से 0 से 6 वर्ष के लड़कियों की संख्या में लगातार गिरावट हो रही है। 2001 में ये 927/1000 था जबकि 2011 में ये और गिर कर 919/1000 पर आ गया। अस्पतालों में आधुनिक लक्षण यंत्रों के द्वारा लिंग पता करने के बाद गर्भ में ही कन्या भ्रूण की हत्या करने की वजह से लड़कियों की संख्या में भारी कमी आयी है। समाज में लैंगिक भेदभाव की वजह से ये बुरी प्रथा अस्तित्व में आ गयी। शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, खान-पान, अधिकार आदि दूसरी जरुरतें है जो लड़कियों को भी प्राप्त होनी चाहिये। हम कह सकते हैँ कि महिलाओं को सशक्त करने के बजाय असशक्त किया जा रहा है। महिलाओं को सशक्त बनाने और जन्म से ही अधिकार देने के लिये सरकार ने इस योजना की शुरुआत की। महिलाओं के सशक्तिकरण से सभी जगह प्रगति होगी खासतौर से परिवार और समाज में। मानव की नकारात्मक पूर्वाग्रह को सकारात्मक बदलाव में परिवर्तित करने के लिये ये योजना एक रास्ता है। ये संभव है कि इस योजना से लड़कों और लड़कियों के प्रति भेदभाव खत्म हो जाये तथा कन्या भ्रूण हत्या का अन्त करने में ये मुख्य कड़ी साबित हो। इस योजना की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी ने चिकित्सक बिरादरी को ये याद दिलाया कि चिकित्सा पेशा लोगों को जीवन देने के लिये बना है ना कि उन्हें खत्म करने के लिये।

यह भी देखें 👉👉 Sukanya Samriddhi Yojana – सुकन्या समृद्धि योजना – फायदे, नियम

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