हनुमान जयंती 2021 तिथि, मुहूर्त – हनुमान जयंती क्यों मनाई जाती है?

हनुमान जयंती

हनुमान जयंती क्यों मनाई जाती है?

हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र शुक्‍ल पूर्णिमा को हनुमान जी का जन्‍मोत्‍सव यानि हनुमान जयंती मनाई जाती है। हिंदू मान्यता के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के परम भक्‍त श्री हनुमान ने श‍िव के 11वें अवतार के रूप में माता अंजना की कोख से जन्‍म लिया था। हिंदू लोगों में इस बात का परम विश्वास है कि हनुमान जी के स्‍मरण मात्र से ही सभी कष्‍ट दूर हो जाते हैं और भक्‍तों को किसी बात का भय भी नहीं सताता। इसलिए हनुमान जी को परम बलशाली और मंगलकारी माना गया है।

हनुमान जी का जन्म साल भर में दो तिथियों में मनाया जाता है पहला चैत्र माह की पूर्णिमा को तो दूसरी तिथि कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। एक तिथि को जन्मदिवस के रूप में तो दूसरी को विजय अभिनन्दन महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसमें उत्तर भारत में चैत्र शुक्‍ल पूर्णिमा के दिन मनाई जाने वाली हनुमान जयंती अधिक लोकप्रिय है।

ऐसी मान्यता है जब हनुमान जी माता अंजनि के पेट से पैदा हुए तभी उन्हें बहुत तेज भूख लग गई थी। तब उन्होंने सूर्य को फल समझ कर खाने के लिए दौड़े, उसी दिन राहू भी सूर्य को अपना ग्रास बनाने के लिए आया हुआ था लेकिन हनुमान जी को देखकर सूर्यदेव ने उन्हें दूसरा राहु समझ लिया। तभी इंद्र ने पवनपुत्र पर वज्र से प्रहार किया जिससे उनकी ठोड़ी पर चोट लगी व उसमें टेढ़ापन आ गया इसी कारण उनका नाम भी हनुमान पड़ा। इस दिन चैत्र माह की पूर्णिमा होने से इस तिथि को हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है।

वहीं दूसरी कथा माता सीता से हनुमान जी को मिले अमरता के वरदान से जुड़ी है। हुआं यूं कि एक बार माता सीता अपनी मांग में सिंदूर लगा रही थी तो हनुमान जी को यह देखकर जिज्ञासा जागी कि माता ऐसा क्यों कर रही हैं। उनसे अपनी शंका को रोका न गया और माता से पूछ बैठे कि माता आप अपनी मांग में सिंदूर क्यों लगाती हैं। माता सीता ने कहा कि इससे मेरे स्वामी श्री राम की आयु और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

रामभक्त हनुमान ने सोचा जब माता सीता के चुटकी भर सिंदूर लगाने से प्रभु श्री राम का सौभाग्य और आयु बढ़ती है तो क्यों न पूरे शरीर पर ही सिंदूर लगाने लगूं। उन्होंने ऐसा ही किया इसके बाद माता सीता ने उनकी भक्ति और समर्पण को देखकर महावीर हनुमान को अमरता का वरदान दिया। माना जाता है कि यह दिन दीपावली का दिन था। इसलिये इस दिन को भी हनुमान जयंती के रुप में मनाया जाता है। सिंदूर चढ़ाने से बजरंग बलि के प्रसन्न होने का भी यही रहस्य है।

हनुमान जयंती 2021 तारीख व मुहूर्त – Hanuman Jayanti 2021 Date, Time

त्यौहार के नामदिनत्यौहार के तारीख
हनुमान जयंती पूजामंगलवार27 अप्रैल 2021

हनुमान जयंती पूजा समय :
पूर्णिमा तिथि शुरू : 12:45 – 26 अप्रैल 2021
पूर्णिमा तिथि ख़त्म : 09:05 – 27 अप्रैल 2021

हनुमान जयंती का महत्‍व

  • संकटमोचन बजरंग बली हनुमान को खुश करने के लिए भक्‍त हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए पूरे दिन व्रत धारण करते हैं।
  • इस दिन पांच या 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करने से पवन पुत्र हनुमान प्रसन्‍न होकर अपने भक्‍तों पर कृपा बरसाते हैं।
  • मंदिरों में विशेष पूजा-पाठ और भंडारों का आयोजन होता है
  • लोग अपने घरों पर भी भजन-कीर्तन करते हैं।
  • हनुमान जी को प्रसन्‍न करने के लिए सिंदूर चढ़ाया जाता है
  • सुंदर कांड का पाठ करने का भी प्रावधान है।
  • श्री हनुमान जयंती में कई जगहों पर मेला भी लगता है।

हनुमान जी की कैसे करें पूजा?

  • हनुमान जयंती वाले दिन सुबह उठकर सीता-राम और हनुमान जी को याद करें।
  • स्‍नान करने व स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण कर पूर्व दिशा में हनुमान जी की प्रतिमा को स्‍थापित करें। ऐसी मान्‍यता है कि हनुमान जी मूर्ति खड़ी अवस्‍था में होनी चाहिए।
  • पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करें: ‘ॐ श्री हनुमंते नम:’।
  • हनुमान जी को सिंदूर और पान का बीड़ा चढ़ाएं।
  • मंगल कामना के लिए इमरती का भोग भी लगाये।
  • हनुमान जयंती के दिन रामचरितमानस के सुंदर कांड और हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।
  • आरती के बाद गुड़-चने का प्रसाद बांटें।

हनुमान जयंती पर बरतें ये सावधानियां

  • पूजा में शुद्धता के लिए नहाने के बाद साफ-धुले कपड़े ही पहनें।
  • मांस या मदिरा का सेवन न करें।
  • व्रत में नमक का सेवन न करें।
  • हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी थे और स्‍त्रियों के स्‍पर्श से दूर रहते थे। ऐसे में महिलाएं हनुमन जी के चरणों में दीपक प्रज्‍ज्‍वलित कर सकती हैं।
  • पूजा के समय महिलाएं न तो हनुमान जी मूर्ति का स्‍पर्श करें और न ही वस्‍त्र अर्पित करें।

हनुमान जी के इन 12 नामों का जप करने से पल भर में दूर होंगे सारे कष्ट

  • ॐ हनुमान
  • ॐ अंजनीसुत
  • ॐ वायुपुत्र
  • ॐ महाबल
  • ॐ रामेष्ठ
  • ॐ फाल्गुण सखा
  • ॐ पिंगाक्ष
  • ॐ अमित विक्रम
  • ॐ उदधिक्रमण
  • ॐ सीता शोक विनाशन
  • ॐ लक्ष्मण प्राणदाता
  • ॐ दशग्रीव दर्पहा

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