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गांधी जयंती क्यों, कब, कैसे मनाई जाती है? गांधी जयंती का महत्व, 10 कविताएं

गांधी जयंती

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्मदिवस को भारत में ‘गांधी जयंती‘ के रूप में 2 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह भारत में राष्ट्रीय त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। चूंकि महात्मा गांधी जी के द्वारा अहिंसा आंदोलन को चलाया गया था, इसलिए विश्व स्तर पर उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए इस दिन को “विश्व अहिंसा दिवस” के रूप में भी मनाया जाता है। गाँधी जयंती का त्यौहार प्रतिवर्ष राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की जन्मतिथि पर उनकी स्मृति को कायम रखने के लिए मनाया जाता है।

महात्मा गाँधी का जन्म काठियावाड़ के पोरबम्दर में एक कुलीन वैश्य-परिवार में 2 अक्टूबर 1869 ई. को हुआ था। पिता करमचंद गांधी और मां पुतलीबाई द्वारा उनका नाम मोहनदास रखा गया, जिससे उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी हुआ। उनके माता-पिता धनी व्यक्ति थे। पोरबन्दर में उनके पिता, करमचन्द उत्तमचन्द गाँधी एक उच्च और जबाबदेह पद पर थे।

मोहनदास करमचन्द गाँधी स्थानीय प्राइमरी एवम् हाई स्कूलो में ही अपनी प्रारमभिक शिक्षा प्राप्त की। प्रवेशिका परिक्षा पास करने के बाद वे कानूनी पेशा के लिए योग्यता प्राप्त करने के लिए इंगलैन्ड गए। बचपन से ही वे सच्चे और ईमानदार थे। अपने चरित्र के सम्बन्ध में वे बड़े सावधान रहते थे। अपने को वकालत के लिए योग्य बनाकर वे भारत आए और बॉम्बे हाईकोर्ट में उन्होंने वकालत आरम्भ की। अपने मुव्क्किल के एक मुकदमे के सम्बन्ध में वे दक्षिण अफ्रीका में नेटाल गए। वहाँ उन्होंने देखा कि किस प्रकार भारतवासी दक्षिण अफ्रीका के यूरोपीय निवासियों द्वारा अपमानित किये जाते है। उन्होंने नेटाल इंडियन कांग्रेस की स्थापना की। इसके तत्वावधान में उन्होंने उन दु:खों को दूर करने के लिए आन्दोलन किया, जिनसे भारतवासी पीड़ित थे। उन्हें अपने प्रयत्न में काफी सफलता मिली। महात्मा गाँधी ने अपना असहयोग आन्दोलन 1921 ई. में आरम्भ किया। उसी समय से उन्होंने इंडियन नेशनल कांग्रेस शक्ति प्राप्त करते गए।

महत्मा गाँधी भारत के ही नहीं बल्कि पूरे दुनिया के महान पुरुष थे। अपनी राजनीति के कारण वे महान नहीं थे। उनकी महत्ता उनके जीवन के नैतिक दृष्टिकोण में थी। उनके लिए सत्य सद्गुन या आदर्श नहीं था। यह उनका जीवन ही था। वे किसी से डरते नहीं थे। सत्य और न्याय के लिए वे संसार की सबसे बड़ी शक्ति का भी सामना करने के लिए तैयार रहते थे। उन्होंने गीता का गहन अध्ययन किया था और व्यावहारिक जीवन में वे उसकी शिक्षा का पालन करते थे।

भारत की स्वतन्त्रता प्राप्ति में गाँधीजी सफल हुए। वे सारे संसार में सत्य और अहिंसा की प्रधानता देखना चाहते थे। अभाग्यवश संसार आज दूसरी ओर झुका है। परंतु, संसार का भविष्य तभी सुरक्षित है सकता है जब यह उनके बताए मार्ग पर चलें। दिल्ली में 30 जनवरी, 1948 को प्रार्थना-सभा में जाते समय वे गोली से मार दिए गए। महात्मा गाँधी जी के इतने कारनामें के बजा से आज उन्हें पूजा जाता है। उन्हें हम बापू कहते है और उनके जन्म के दिन को पूरे देश में गाँधी जयंती के रूप में बड़ी धूम-धाम और श्रद्धापूर्वक मनाते है।

महात्मा गाँधी जीवन परिचय

पूरा नाममोहन दास करम चंद गाँधी
माता पितापुतली बाई, करम चंद गाँधी
पत्नीकस्तूरबा गाँधी
बच्चेहरिलाल, मणिलाल, रामदास, देवदास
जन्म – मृत्यु2 अक्टूबर 1869- 30 जनवरी 1948
अध्ययनवकालत
कार्यस्वतंत्रता सेनानी
मुख्य आन्दोलन दक्षिण अफ्रीका में आन्दोलन, असहयोग आन्दोलन,  स्वराज (नमक सत्याग्रह),  हरिजन आन्दोलन (निश्चय दिवस), भारत छोड़ो आन्दोलन
उपाधिराष्ट्रपिता (बापू)
प्रसिद्ध वाक्यअहिंसा परमो धर्म
सिधांतसत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, शाखाहारी, सद्कर्म एवम विचार, बोल पर नियंत्रण

गाँधी जी का देश की स्वतंत्रता में योगदान:

गाँधी जी एक साधारण व्यक्ति थे। उसी तरह उनके जीवन के भी वही सामान्य लक्ष्य थे पढ़ना एवम कमाना जिसके लिए उन्होंने इंग्लैंड विश्वविद्यालय से बेरिस्टर की उपाधि प्राप्त की। अपनी माता को उन्होंने माँस एवम मदिरा ना छूने का वचन दिया था जिसका उन्होंने पालन किया। यही से उनके संतुलित विचारों की परीक्षा प्रारंभ हो गई ।डिग्री लेने के बाद वे स्वदेश आकर आजीविका के लिए जुट गए लेकिन मन मुताबिक कुछ नहीं कर पाये। आखिरकार उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में एक नौकरी के लिए जाना स्वीकार किया।

गाँधी जी का दक्षिण अफ्रीका का जीवन

यह काल 1893 से 1914 तक का था कहा जा सकता हैं कि इसी काल ने गाँधी जी को एक साधारण व्यक्ति से  स्वतंत्रता सेनानी बनने की तरफ प्रेरित किया होगा। उन दिनों दक्षिण अफ्रीका में काले गौरे का भेद चरम सीमा पर था जिसका शिकार गाँधी जी को भी बनना पड़ा। एक घटना जिसे हम सबने सुना हैं उन दिनों गाँधी जी के पास फर्स्ट क्लास का टिकट होते हुए भी उन्हें थर्ड क्लास में जाने को कहा गया जिसे उन्होंने नहीं माना और इसके कारण उन्हें ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया। उन्हें जीवन व्यापन में भी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। यहाँ तक की न्याय की उम्मीद में जब न्याय पालिका से गुहार की गई तब भी उन्हें अपमानित किया गया। इन सभी गतिविधियों के कारण गाँधी जी के मन में कहीं ना कही स्वदेश की परतंत्रता का विचार तेजी पर था उन्हें महसूस हो रहा था कि देश के लोग किस तरह से आधीन होकर अपने आप को नित प्रतिदिन अपमानित होता देख रहे हैं। शायद इसी जीवन काल के कारण गाँधी जी ने स्वदेश की तरफ रुख लिया और देश की आजादी में अपने आपको को समर्पित किया।

स्वदेश लौटकर गाँधी जी ने सबसे पहले किसान भाईयों को एक कर लुटेरे जमीदारों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया । वे जमींदार भी अंग्रेजो के हुक्म के आधीन थे। राज कोष के लिए दो तीन गुना कर वसूला जाने लगा। इस तरह गरीबों को जानवरों की जिन्दगी से आजाद करने के लिए 1918 में गाँधी जी ने गुजरात के चंपारण और खेड़ा नामक स्थान पर लोगो का नेतृत्व किया। सबसे पहले उनके जीवन को एक सही दिशा में ले जाने के लिए उन्हें स्वच्छता का पाठ सिखाया फिर कर का विरोध करने के लिए मार्गदर्शन दिया। सभी ने एक जुट होकर अंग्रेजो एवम जमींदार के खिलाफ आवाज उठाई जिसके फलस्वरूप गाँधी जी को जेल में डाल दिया गया और पुलिस फ़ोर्स को जनता को डराने का आदेश दिया गया लेकिन इस बार सभी ने आन्दोलन का रास्ता चुना और गाँधी जी को बाहर निकालने के लिए आवाज बुलंद की। इस रैली का नेतृत्व लोह पुरुष वल्लभभाई पटेल ने किया और परिणाम स्वरूप गाँधी जी को रिहाई मिली। यह पहली बड़ी जीत साबित हुई । इस चंपारण खेड़ा आन्दोलन के कारण गाँधी जी को देश में पहचाना जाने लगा। लोगों में जागरूकता आने लगी और यही से देशव्यापी एकता की शुरुवात हो गई। और इसी समय इन्हें “बापू” कहकर पुकारा जाने लगा।

जलियांवाला बाग़ हत्याकांड

13 अप्रैल 1919 में पंजाब वर्तमान अमृतसर में एक महासभा में अंग्रेजो द्वारा नरसंहार किया गया। इस स्थान का नाम जलियांवाला बाग़ था। जहाँ सभा हो रही थी। उस दिन बैसाखी का पर्व था। जलिवाला बाग़ चारो तरफ से लम्बी दीवारों से बना हुआ था और केवल एक छोटा सा रास्ता था इसी बात का फायदा उठाकर अंग्रेज जनरल रेजीनॉल्ड डायर ने 90 सिपाहियों के साथ बिना ऐलान किये गोलीबारी शुरू कर दी। देखते ही देखते स्थान मृतक लाशो का मेला बन गया। लगभग 3 हजार लोग मारे गए। कई गोलियों से छल्ली हुए तो कई भगदड़ में दब गये और कई डर के कारण बाग़ में बने कुएँ में कूद गए। ब्रिटिश सरकार ने इस घृणित अपराध को दबा दिया और प्रशासन को मरने वालो की संख्या के गलत आंकड़े दिये गये। आज तक जलियांवाला बाग़ हत्याकांड सबसे निंदनीय कांड माना जाता हैं जिसकी निंदा स्वयं ब्रिटिशर्स ने की और आज तक कर रहे हैं।

देश व्यापी असहयोग आन्दोलन

जलियावाला हत्याकांड के बाद गाँधी जी ने देशव्यापी स्तर पर असहयोग आन्दोलन किया। यह 1 अगस्त 1920 को शुरू किया गया। इस आन्दोलन में पहली बार सीधे शासन के विरुद्ध आवाज उठाई गई। सदनों का विरोध किया गया। सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू किया गया। स्वदेश अपनाओ का नारा दिया गया। गाँधी जी ने अहिंसा के जरिये आन्दोलन के लिए देशवासियों को प्रेरित किया।

स्वराज आन्दोलन शुरू किया गया। दांडी यात्रा निकाल कर नमक कानून तोडा एवम अपना असहयोग अंग्रेजो के सामने प्रकट किया। इस तरह देश के हर कौने में लोगो ने गाँधी जी को फॉलो करना शुरू किया और पूरा देश स्वतंत्रता की इस लड़ाई का हिस्सा बनने लगा। इन सबके बीच कई बार गाँधी जी को जेल भी जाना पड़ा। कई स्वतंत्रता सेनानियों ने गाँधी जी के अहिंसा के पथ को नकार भी दिया। इस तरह नरम दल एवम गरम दल का निर्माण हुआ। गाँधी जी को कई कटुता भरे आरोपों का वहन भी करना पड़ा।

भारत छोड़ो आन्दोलन

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान देश में भारत छोड़ो आन्दोलन शुरू किया गया। 9 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आन्दोलन का एलान किया गया। यह एक ऐसा समय था जब ब्रिटिश हुकूमत युद्ध में फसी हुई थी। दूसरी तरफ देश की जनता जाग उठी थी। नरम दल एवम गरम दल दोनों ही अपने जोरो पर देश में आदोलन चला रहे थे । सभी नेता सक्रीय थे। सुभाषचंद्र बोस ने भी अपनी आजाद हिन्द फ़ौज के साथ “दिल्ली चलो” का ऐलान कर दिया था। इस प्रकार पुरे देश में खलबली के बीच भारत छोड़ो आन्दोलन की शुरुवात हुई जिसके बाद गाँधी जी को गिरफ्तार किया गया लेकिन देश में आन्दोलन अपनी तेजी से बढ़ रहा था।

स्वतंत्रता दिवस का दिन:

1942 से 47 के बीच देश की स्थिती में बड़े बदलाव आये। अंग्रेजी हुकूमत हिलने लगी। देश को एक जुट रखना भी मुश्किल था। जहाँ एक तरफ देश आजाद होने की तरफ बढ़ रहा था। वहीँ दूसरी तरफ हिन्दू मुस्लिम लड़ाई ने अपने पैर इस कदर फैला लिये थे कि अंग्रेजी हुकुमत ने देश को दो हिस्सों में बांटने का ऐलान कर दिया। नये वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने संधि के  कई रास्ते दिखायें लेकिन अंततः भारत को आजादी देने का निर्णय लिया गया जिसमे पकिस्तान को अलग देश बनाने का निर्णय लेना पड़ा क्यूंकि उस वक्त गाँधी जी के लिए आजादी की कीमत ज्यादा थी जो कि इस विभाजन के बिना उन्हें संभव होती दिखाई नहीं दे रही थी इसलिए यह एतिहासिक फैसला लिया गया। 14 अगस्त की मध्य रात्रि को पकिस्तान का जन्म हुआ और 15 अगस्त को भारत को आजादी मिली।

भारत में गांधी जयंती कैसे मनाई जाती है? How to celebrate Gandhi Jayanti?

  • भारत में गांधी जयंती, प्रार्थना सभाओं और राजघाट नई दिल्ली में गांधी प्रतिमा के सामने श्रद्धांजलि देकर राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाई जाती है।
  • महात्मा गांधी की समाधि पर राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री की उपस्थिति में प्रार्थना आयोजित की जाती है, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया था।
  • उनका सबसे पसंदीदा और भक्ति गीत रघुपति राघव राजा राम उनकी स्मरति में गया जाता है।
  • पूरे भारत में इस दिवस को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी आयोजित किया जाता है।
  • अधिकतर स्कूलों में एक दिन पहले ही गाँधी जयंती का उत्सव मनाया जाता है. ये सभी उत्सव जीवन के उन सिद्धांतों को प्रभावित करते हैं जो कि गांधी जी ने बताए थे: अनुशासन, शांति, ईमानदारी, अहिंसा और विश्वास।
  • भारत में कई स्थानों पर लोग बापू के प्रसिद्ध गीत “रघुपति राघव राजा राम” को गाते हैं, प्रार्थना करते हैं और स्मारक समारोह के माध्यम से गांधी जी को श्रद्धांजलि देते हैं।
  • इस दिवस को कला, विज्ञान की प्रदर्शनियों और निबंध की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है. साथ ही अहिंसा और शांति को बढ़ावा देने के लिए पुरस्कार और सम्मान प्रदान किये जाते हैं।

गांधी जयंती का क्या महत्व है? Gandhi Jayanti Significance

इस दुनिया को शांति और अहिंसा का पाठ पढानें की दिशा में महात्मा गांधी जी का योगदान सामानांतर है। उनकी शिक्षा यही है कि सभी प्रकार के संघर्ष का समाधान अहिंसा से किया जाये। साथ ही इस विश्व में प्रत्येक बड़ी और छोटी समस्या का समाधान शांति और अहिंसा से निकाला जाये ताकि लोगों के रहने के लिए बेहतर माहौल का निर्माण किया जा सके।

गांधी जयंती के बारे में रोचक तथ्य – Interesting Facts about Gandhi Jayanti in Hindi

  • गांधी जयंती प्रत्येक वर्ष 2 अक्टूबर को मनायी जाती है। 2 अक्टूबर महात्मा गांधी जी की जन्मतिथि है।
  • गांधी जयंती प्रतिवर्ष राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जन्मतिथि पर उनकी स्मृति को कायम रखने के लिए मनायी जाती है।
  • महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचन्द गांधी था। उनका जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को पोरबंदर, गुजरात, भारत में हुआ था।
  • उनके पिता का नाम करमचन्द गांधी था जो ब्रिटिश राज के समय काठियावाड़ की एक छोटी सी रियासत (पोरबंदर) के दीवान थे। उनकी माता का नाम पुतलीबाई था।
  • मई 1883 में साढ़े 13 साल की आयु पूर्ण करते ही उनका विवाह 14 साल की कस्तूरबा से कर दिया गया। मोहनदास और कस्तूरबा के चार सन्तान हुईं जो सभी पुत्र थे।
  • गांधी जी को ‘महात्मा’ के नाम से सबसे पहले 1915 में राजवैद्य जीवराम कालिदास ने संबोधित किया। उन्हें ‘बापू’ के नाम से भी याद किया जाता है। उन्हें सम्पूर्ण देश ‘राष्ट्रपिता’ के नाम से संबोधित करता है।
  • महात्मा गांधी को 5 बार नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) के लिए नामित किया गया।
  • महात्मा गांधी अंग्रेजी को एक आयरिश लहजे के एक रंग के साथ बोलते थे क्योंकि उनके पहले अंग्रेजी शिक्षकों में से एक शिक्षक आयरिश थे।
  • महात्मा गांधी 4 महाद्वीपों और 12 देशों में नागरिक अधिकार आंदोलन (Civil Rights Movement) के लिए जिम्मेदार थे।
  • 1913 से 1938 तक वे लगभग 79000 किलोमीटर चले, जो लगभग पृथ्वी का दो बार चक्कर लगाने के बराबर है।
  • महात्मा गांधी ने बोअर युद्ध (Boer War) के दौरान सेना में सेवा की। पर युद्ध के भयानक चित्र को देखकर उनहोंने हिंसा के खिलाफ आवाज़ उठाने की ठान ली।
  • 1939 में गांधीजी ने हिटलर को युद्ध न करने के लिए एक अनुरोध पत्र लिखा। लेकिन यह पत्र ब्रिटिश आर्मी के हस्तक्षेप के कारण कभी भी अपने इच्छित प्राप्तकर्ता के पास नहीं पहुंच पाया।
  • स्टीव जॉब्स महात्मा गांधी के एक प्रशंसक थे।
  • गांधी जी ने दुर्बन, प्रिटोरिया और जोहान्सबर्ग में 3 फुटबॉल क्लब की स्थापना में मदद की थी। इन तीनों क्लब का नाम एक ही था – “पैसिव रेसिस्टर्स सॉकर क्लब”।
  • भारत की 53 प्रमुख सड़कों और दुनिया के अन्य हिस्सों की लगभग 48 सड़कों का नाम “महात्मा गांधी रोड” है।
  • 30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गौड़से नामक व्यक्ति ने गांधी जी की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी जब वे नई दिल्ली के बिड़ला हाउस के मैदान में रात में चहलकदमी कर रहे थे।
  • उन्होंने अपनी मृत्यु के एक दिन पहले कांग्रेस को भंग (dissolve) करने का सोचा था।
  • महात्मा गांधी की शवयात्रा 8 किलोमीटर लंबी थी।
  • ग्रेट ब्रिटेन, वह देश जिसके खिलाफ महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी, उसी देश ने गांधी जी की मृत्यु के 21 साल बाद उनके सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया।
  • गांधी जी का शुक्रवार (Friday) के साथ एक अजीब इत्तेफाक था। उनका जन्म शुक्रवार को हुआ था, भारत को स्वतंत्रता शुक्रवार को मिली और इसके साथ-साथ गांधी जी की हत्या भी शुक्रवार को ही की गयी थी।
  • गांधी जी ने अपना जीवन सत्य की व्यापक खोज में समर्पित कर दिया। उन्होंने इस लक्ष्य को प्राप्त करने करने के लिए अपनी स्वयं की गल्तियों और खुद पर प्रयोग करते हुए सीखने की कोशिश की। उन्होंने अपनी आत्मकथा को सत्य के प्रयोग का नाम दिया।
  • गांधी जी ने अपनी आत्मकथा “द स्टोरी ऑफ़ माय एक्सपेरिमेंट्स विथ ट्रुथ ” (The Story of My Experiments with Truth) में दर्शन और अपने जीवन के मार्ग का वर्णन किया है।
  • भारत में, गांधी जयंती राष्ट्रीय त्यौहार के रूप में मनायी जाती है। इस दिन सभी सरकारी, अर्धसरकारी कार्यालय, निगम एवं शैक्षिक संस्थानों में सार्वजनिक अवकाश होता है।
  • गांधी जयंती के दिन गांधीजी की स्मृति में उनकी समाधि पर फूल, माला अर्पित करते हैं तथा रघुपति राघव राजा राम की कीर्तन ध्वनि, चरखा इत्यादि कार्यक्रमों का आयोजन होता है।

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गांधी जयंती पर कविता – Poems on Gandhi Jayanti in Hindi

Gandhi Jayanti Poem 1

2 अक्टूबर खास बहुत है इसमें है इतिहास छिपा,
इस दिन गाँधी जी जन्मे थे दिया उन्होंने ज्ञान नया,
सत्य अहिंसा को अपनाओ इनसे होती सदा भलाई,
इनके दम पर गाँधी जी ने अंग्रेजों की फौज भगाई,
इस दिन लाल बहादुर जी भी इस दुनिया में आये थे,
ईमानदार और सबके प्यारे कहलाये थे,
नहीं भुला सकते इस दिन को ये दिन तो है बहुत महान,
इसमें भारत का गौरव है इसमें तिरंगे की शान हैं।

Gandhi Jayanti Poem 2

राष्ट्रपिता तुम कहलाते हो सभी प्यार से कहते बापू,
तुमने हमको सही मार्ग दिखाया सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया,
हम सब तेरी संतान है तुम हो हमारे प्यारे बापू।
सीधा सादा वेश तुम्हारा नहीं कोई अभिमान,
खादी की एक धोती पहने वाह रे बापू तेरी शान।
एक लाठी के दम पर तुमने अंग्रेजों की जड़ें हिलायी,
भारत माँ को आजाद कराया राखी देश की शान।

Gandhi Jayanti Poem 3तुझ बिन

बापू तुझ बिन आज ये तेरी गलियां सूनी हैं
हां आज उन्नति रात चौगुनी, और दिन दूनी है
पर तेरे भारत को और तरंगें, अभी भी छूनी हैं
इस भारत में कुछ यात्राएं, और भी होनी हैं
दांडी में तो टूटा नमक, परंपराएं और भी टूटनी हैं
बापू तुझ बिन आज ये तेरी, गलियां सूनी हैं।

एक तमन्ना ‘शुभ’ को मन में आजा लेके इक अवतार
इस कुरीत अग्नि में बरसे जैसे सावन की बौछार
जैसे दी थी तब आजादी लड़ के तूने गोरों से
आज आजाद करा दे, मानस मन में बसे अंधेरों से
कर दे फिर इक बार सत्य-शांति समागम जीवन में
दे दे सभी कुरीति कुंड में
बापू तुझ बिन आज ये तेरी गलियां सूनी हैं।

Gandhi Jayanti Poem 4

देखो महात्मा गाँधी की जयंती आई,
बच्चों के चेहरों पर मुस्कान है लाई।

हमारे बापू थे भारतवर्ष के तारणहार,
आजादी के सपने को किया साकार।

भारत के लिए वह सदा जीते-मरते थे,
आजादी के लिए संघर्ष किया करते थे।

खादी द्वारा स्वावलंबन का सपना देखा था,
स्वदेशी का उनका विचार सबसे अनोखा था।

आजादी के लिए सत्याग्रह किया करते थे,
सदा मात्र देश सेवा के लिए जीया करते थे।

भारत की आजादी में है उनका विशेष योगदान,
इसीलिए तो सब करते हैं बापू का सम्मान,
और देते है उन्हें अपने दिलों में स्थान।

देखो उनके कार्यो कभी भूल ना जाओ,
इसलिए तुम इन्हें अपने जीवन में अपनाओ।

तो आओ सब मिलकर सब झूमें गाये,
साथ मिलकर गांधी जयंती का यह पर्व मनायें।

Gandhi Jayanti Poem 5

गौरों की ताकत बाँधी थी गाँधी के रूप में आंधी थी,
बड़े दिलवाले फकीर थे वो पत्थर के अमिट लकीर थे वो,
पहनते थे वो धोती खादी रखते थे इरादें फौलादी,
उच्च विचार और जीवन सादा उनको प्रिय थे सबसे ज्यादा,
संघर्ष अगर तो हिंसा क्यों खून का प्यासा इंसा क्यों,
हर चीज का सही तरीका है जो बापू से हमने सिखा है,
क्रांति जिसने लादी थी सोच वो गाँधी वादी थी,
उन्होंने कहा करो अत्याचार थक जाओगे आखिरकार,
जुल्मों को सहते जाएंगे पर हम ना हाथ उठाएंगे,
एक दिन आएगा वो अवसर जब बाँधोगे अपने बिस्तर,
आगे चलके ऐसा ही हुआ गाँधी नारों ने उनको छुआ,
आगे फिरंग की बर्बाद थी और पीछे उनकी समाधि थी,
गौरों की ताकत बाँधी थी गाँधी के रूप में आंधी थी।

Gandhi Jayanti Poem 6 – महात्मा थे 

थाम लिया था हाथ सबका नेक रास्ते बढ़ते गए,
हिंसा से दूर रह के आजादी वास्ते लड़ते गए।

तन पे सूती वस्त्र वे ओढे, हाथ में लाठी रखते थे,
हिंसा के विरोधी थे वो यही परिपाटी रखते थे।

राष्ट्रपिता के नाम से जिनको मिली हुई पहचान है,
जिनके संघर्ष के समय से वाकिफ हर इंसान है,

जिनकी बातों में अपनापन वो भाईचारा रखते थे,
देश की खातिर कुछ करने तत्पर हमेशा रहते थे,

अहिंसा के पथ पर चलते वो भी राष्ट्रवादी थे,
ऐसे शख्स और कोई नहीं अपने महात्मा गांधी थे।

Gandhi Jayanti Poem 7 – ‘महात्मा गांधी – एक अलग पहचान’

एक व्यक्तित्व थी साधारण सी,

दुबली-पतली जिनकी काया थी।

विचारों में थी गजब की प्रबलता,

जिन्होंने पायी हमेशा सफलता।

जन्म हुआ पोरबंदर में,

और पढ़ाई लंदन में।

नौकरी पायी दक्षिण अफ्रिका में,

और मृत्यु हुई भारत में।

विश्वास के धनी थे वो,

सत्य, अहिंसा थी जिनकी ताकत।

सादगी का जीवन जीते थे वो,

और खादी था उनका प्रिय वस्त्र।

पूरी दुनिया में अलग पहचान बनाकर,

अहिंसा के पुजारी वे कहलाये।

चाहे अधनंगा फकीर लोगों ने कहा,

पर तनिक भी वे ना घबराए।

बड़े-बड़े योद्धा भी न कर सके,

जो इस साधारण काया ने कर दिखाए।

सत्य, अहिंसा के मार्ग को चुन कर,

भारत को अंग्रेजों से आज़ाद कराये।

नमन है ऐसे महापुरुष को,

जो देश के बापू कहलाए।

महात्मा कि उपाधि इन्हे मिली,

और एक सच्चे देश भक्त कहलाए।

सत्य-अहिंसा में है गजब की ताकत,

ये इस महापुरुष ने सिखलाये।

पूरी दुनिया में नाम कमाकर,

वे गर्व से महात्मा गाँधी कहलाये।

Gandhi Jayanti Poem 8

मैया मेरे लिए मँगा दो छोटी धोती खादी की,
जिसे पहन मैं नकल करूँगा प्यारे बाबा गाँधी की।
आँखों में चश्मा पहनूँगा कमर पर घडी लटकाऊँगा,
छड़ी हाथ में लिये हुये मैं जल्दी जल्दी आऊँगा,
लाखों लोग चले आयेंगें मेरे दर्शन पाने को,
बैठूँगा जब बीच सभा में अच्छी बात सुनाने को।

Gandhi Jayanti Poem 9 – गौरव आप

हर दिल में तस्वीर जो होती, बापू सचमुच आपकी।
जीवन में लोगों के बापू बात न होती पाप की।

ऋणी है भारत, देश भावना, निष्ठा अनुपम आपकी।
राष्ट्र गौरव थे तुम बापू, छवि अनोखी आपकी।

श्रम सेवा व सत्य अहिंसा रीति-शैली प्यारी थी।
धैर्य, सहिष्णू सहनशीलता, नीति-तुममें न्यारी थी।

उपवासों से आत्म शुद्धि की, विधि थी पश्चाताप की।
राष्ट्र गौरव थे तुम बापू, छवि अनोखी आपकी।

समता-ममता स्नेह भावना, प्रबल आत्मविश्वास था।
वस्तु स्वदेशी भाषा अपनी पसंद-देशहित खास था।
राष्ट्र गौरव थे तुम बापू, छवि अनोखी आपकी।

Gandhi Jayanti Poem 10 ‘बापू के विचार’

हर वर्ष गांधी जयंती तो मनाते हो,

पर बापू के विचारों को ना अपनाते हो।

देश के लिए उन्होंने ना जाने कितने कष्ट सहे,

देश की आजादी की खातिर जेलों में भी रहे।

कहने को तो राष्ट्रपिता का उनको दर्जा देते हो,

फिर भी उनके कार्यों का फर्ज ना अदा करते हो।

आजादी को प्राप्त हुए बीत चुके है इतने वर्ष,

फिर भी देश में स्वेदशी के लिए हो रहा संघर्ष।

यदि हम ऐसे ही विदेशी उत्पाद अपनायेगें,

तो देश के तरक्की में कैसे हाथ बटायेंगे।

बापू ने तो सबको अंहिसा का पाठ सिखाया,

पर ना जाने देश ने इसे क्यों ना अपनाया।

कर दिया उन्होंने देश के लिए सब कुछ कुर्बान,

पर अपने उपलब्धियों पर कभी ना किया अभिमान।

आओ हम सब ले यह प्रण कि बापू के विचारों को अपनायेंगे,

साथ मिलकर देश को तरक्की की राह पर आगे बढ़ायेंगे।

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